होर्मुज जलडमरूमध्य से निकला कतर एनर्जी का एलएनजी टैंकर, 11 जुलाई के बाद पहली सफल आवाजाही
सारांश
मुख्य बातें
कतर एनर्जी के नियंत्रण वाला एलएनजी टैंकर अल अरीश 29 जुलाई 2025 की रात होर्मुज जलडमरूमध्य से सफलतापूर्वक बाहर निकल गया — पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच 11 जुलाई के बाद यह पहला मौका है जब कतर एनर्जी का कोई एलएनजी पोत इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुज़रने में सफल रहा। जहाज़ी निगरानी कंपनियों केप्लर और एलएसईजी के आँकड़ों ने इस घटनाक्रम की पुष्टि की है।
मुख्य घटनाक्रम
केप्लर और एलएसईजी के आँकड़ों के अनुसार, अल अरीश ने 4 से 6 जुलाई के बीच कतर के रस लाफान टर्मिनल से एलएनजी कार्गो लोड किया था। इसके बाद 29 जुलाई की रात यह टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकला। एलएसईजी के आँकड़ों के मुताबिक, यह पोत अभी पाकिस्तान के पोर्ट कासिम की ओर बढ़ रहा है और 31 जुलाई तक वहाँ पहुँचने का अनुमान है।
गौरतलब है कि इससे पहले अल रेकय्यात नामक कतर एनर्जी के टैंकर के जुलाई की शुरुआत में प्रभावित होने के बाद से यह पहली बार है जब कंपनी का कोई एलएनजी पोत इस जलमार्ग से निकलने में सफल रहा है।
आईआरजीसी का दावा और नई घटना
इसी बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि बुधवार रात होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिणी हिस्से में एक तेल टैंकर में भीषण आग लग गई। इस घटना के बाद उसी मार्ग से गुज़र रहे दो अन्य तेल जहाज़ आगे बढ़ने के बजाय वापस लौट गए।
आईआरजीसी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी विमान इन जहाज़ों को एक 'असुरक्षित रास्ते' से ले जा रहे थे। हालाँकि, उसने यह स्पष्ट नहीं किया कि आग किस कारण लगी, कौन से टैंकर थे और इस घटना में कोई हताहत हुआ या नहीं। आईआरजीसी ने चेतावनी दी कि "जब तक अमेरिका क्षेत्र की समुद्री गतिविधियों में हस्तक्षेप करता रहेगा, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा।"
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है, जहाँ से वैश्विक एलएनजी व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते इस मार्ग से आवाजाही में भारी कमी आई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप और एशिया दोनों एलएनजी आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश में हैं।
क्या होगा आगे
अल अरीश का होर्मुज से सफलतापूर्वक निकलना एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, लेकिन आईआरजीसी की चेतावनियों और टैंकर में आग की घटना के मद्देनज़र विशेषज्ञ इस मार्ग की स्थिति को अभी भी अस्थिर बता रहे हैं। ऊर्जा बाज़ार विश्लेषकों की नज़र इस बात पर है कि आने वाले दिनों में इस जलमार्ग से आवाजाही की रफ़्तार बढ़ती है या नहीं।