क्वाड विदेश मंत्रियों की अटलांटा बैठक: क्रिटिकल मिनरल्स, AI और समुद्री सुरक्षा पर बड़े फैसले
सारांश
मुख्य बातें
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने 31 अक्टूबर 2026 को अटलांटा में क्वाड की बैठक में क्रिटिकल मिनरल्स आपूर्ति श्रृंखला को मज़बूत करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), समुद्री सुरक्षा और डिजिटल संपर्क में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी संयुक्त बयान में आर्थिक सुरक्षा को वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए अनिवार्य बताया गया। यह बैठक इस वर्ष मई और जुलाई के बाद क्वाड विदेश मंत्रियों की तीसरी बैठक थी।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी शामिल हुए। चारों देशों ने स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। संयुक्त बयान में वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करने वाले मनमाने निर्यात प्रतिबंधों और बाज़ार को विकृत करने वाली गैर-बाज़ार नीतियों पर साझा चिंता व्यक्त की गई।
क्रिटिकल मिनरल्स पर बड़ी पहल
क्वाड के महत्वपूर्ण खनिज पहल ढाँचे के तहत चारों देश इलेक्ट्रॉनिक कचरे और स्क्रैप से खनिज पुनः प्राप्त करने, प्रसंस्करण संयंत्रों व रिफाइनरियों के विकास और वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखलाएँ तैयार करने पर मिलकर काम करेंगे। अमेरिका ने भारत और आसियान देशों में कचरे से खनिज निकालने की सुविधाओं और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए एक करोड़ डॉलर की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य किसी एक आपूर्तिकर्ता पर निर्भरता कम करना है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योगों में इन खनिजों की बढ़ती माँग को देखते हुए यह सहयोग आर्थिक सुरक्षा के नज़रिये से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
AI और डिजिटल बुनियादी ढाँचे पर सहयोग
AI के क्षेत्र में चारों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भरोसेमंद AI तकनीक तक पहुँच बढ़ाने के लिए 8 करोड़ 50 लाख डॉलर से अधिक की तकनीकी और वित्तीय सहायता देने का इरादा रखते हैं। इसके लिए क्वाड AI एक्सेलेरेटर के माध्यम से काम किया जाएगा। डिजिटल बुनियादी ढाँचे के मोर्चे पर चारों देशों ने सुरक्षित और तेज़ समुद्री डेटा केबल नेटवर्क विकसित करने पर सहमति जताई है।
इसके अलावा, सेमीकंडक्टर और AI हार्डवेयर की आपूर्ति श्रृंखला में कमज़ोर कड़ियों की पहचान के लिए नई पहल शुरू की जाएगी। 5G, 6G और ओपन रेडियो एक्सेस नेटवर्क (Open RAN) जैसी तकनीकों में भरोसेमंद सहयोग बढ़ाने की योजना भी घोषित की गई।
समुद्री सुरक्षा और भारत की भूमिका
बैठक में समुद्री सुरक्षा को आर्थिक समृद्धि से सीधे जोड़कर देखा गया। चारों देशों ने होर्मुज़ स्ट्रेट, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता और व्यापारिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने की ज़रूरत पर बल दिया। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून अभिसमय (UNCLOS) के अनुरूप समुद्री मार्गों पर किसी भी प्रकार का टोल न लगाए जाने की बात भी कही गई।
भारत की समुद्री भूमिका के संदर्भ में चेन्नई से पर्थ तक क्वाड की दूसरी समुद्री पर्यवेक्षक यात्रा उल्लेखनीय रही, जो 25 सितंबर से 7 अक्टूबर तक भारतीय तटरक्षक बल के एक अपतटीय गश्ती पोत पर आयोजित की गई। चारों देश 2027 में 'सी ड्रैगन अभ्यास' के दौरान पहला संयुक्त समुद्री निगरानी अभ्यास करने की तैयारी में हैं।
व्यापार, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा सुरक्षा
आर्थिक सहयोग को व्यावसायिक स्तर तक ले जाने के लिए पहली बार 'क्वाड बिजनेस लीडर्स फोरम' आयोजित करने की घोषणा की गई, जिसमें उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी और नीति विशेषज्ञ शामिल होंगे। आपदा प्रबंधन में भी 26 अगस्त को नेपाल में आई अचानक बाढ़ के दौरान भारत की अग्रणी भूमिका को रेखांकित किया गया — भारत को नेपाल के लिए पहला मदद पहुँचाने वाला देश बताया गया।
ऊर्जा सुरक्षा के लिए सितंबर में पहली बार आयोजित क्वाड फ्यूल सिक्योरिटी फोरम में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार और ईंधन के सुरक्षित स्टॉक को मज़बूत करने पर चर्चा हुई। चारों देश फिजी के सुवा, लाउटोका और रोकोबिली बंदरगाहों के आधुनिकीकरण में भी सहयोग कर रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक प्रभुत्व की होड़ तेज़ हो रही है और क्वाड का एजेंडा अब महज़ सामरिक गठजोड़ से आगे निकल कर व्यापक आर्थिक-तकनीकी साझेदारी की शक्ल ले रहा है।