क्वींसलैंड में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी डिवाइस का प्रतिबंध
सारांश
Key Takeaways
- नए कानूनों में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी डिवाइस का प्रतिबंध है।
- सरकार ने सभी 28 सिफारिशों को स्वीकार किया है।
- ई-बाइक और ई-स्कूटर चलाने के लिए लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस आवश्यक होगा।
- पुलिस को अवैध डिवाइस जब्त करने के अधिकार मिलेंगे।
- बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
सिडनी, २४ मार्च (राष्ट्रीय प्रेस)। ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य में नए सुरक्षा नियमों के अनुसार 16 साल से कम उम्र के बच्चों को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी डिवाइस (जैसे ई-बाइक और ई-स्कूटर) चलाने की अनुमति नहीं होगी। यह निर्णय मंगलवार को सार्वजनिक किया गया।
राज्य सरकार ने कहा कि ई-मोबिलिटी सुरक्षा पर बनी संसदीय समिति की सभी २८ सिफारिशों को पूर्णतः या सैद्धांतिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है। इनमें 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर प्रतिबंध भी शामिल है।
क्वींसलैंड के परिवहन मंत्री ब्रेंट मिकेलबर्ग ने बताया कि सरकार जल्द ही इन सिफारिशों को कानून में बदलने के लिए संसद में पेश करेगी।
नए नियमों के अनुसार, ई-बाइक और ई-स्कूटर चलाने के लिए क्वींसलैंड का लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य होगा। यह लाइसेंस 16 साल की उम्र में प्राप्त किया जा सकता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि चलाने वाले को ट्रैफिक नियमों की जानकारी हो।
जांच से पता चला है कि साल 2025 में क्वींसलैंड में ई-मोबिलिटी से जुड़े हादसों में १२ लोगों की मौत हुई और ६,३०० लोग घायल हुए।
मिकेलबर्ग ने कहा, "हम 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर इन डिवाइस के उपयोग पर रोक लगा रहे हैं, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है।"
समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, नए कानूनों के तहत फुटपाथों पर ई-मोबिलिटी डिवाइस के लिए 10 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा निर्धारित की जाएगी। इसके अलावा, पुलिस को अवैध डिवाइस को जब्त करने और नष्ट करने के लिए अतिरिक्त अधिकार दिए जाएंगे, और वे चालकों का अचानक 'ब्रीथ टेस्ट' (सांस की जांच) भी कर सकेंगे।
पिछले वर्ष, ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर दुनिया का पहला प्रतिबंध लागू किया गया था। इसके अंतर्गत फेसबुक, यूट्यूब, टिकटॉक और एक्स जैसे बड़े प्लेटफार्मों को ऐसे बच्चों के अकाउंट बनाने से रोकना होगा।
प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि यह कदम उन बच्चों की मदद के लिए उठाया गया है, जो एल्गोरिदम, लगातार चलने वाली सोशल मीडिया फ़ीड और उसके दबाव के बीच बड़े हो रहे हैं। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि वे छुट्टियों का सही उपयोग करें और पूरा समय मोबाइल पर न बिताएं।
ऑस्ट्रेलिया के इस निर्णय में कई देशों की रुचि देखी गई है। डेनमार्क, मलेशिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड जैसे देश भी ऐसे कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं।