अमेरिकी सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर का भारत दौरा, रणनीतिक साझेदारी और हिंद-प्रशांत एजेंडे पर होगी चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर 5 अगस्त से 12 अगस्त 2025 तक भारत, उज्बेकिस्तान, किर्गिज गणराज्य और कजाकिस्तान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस दौरे का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और दक्षिण एवं मध्य एशिया में अमेरिकी विदेश नीति को नई गति देना है।
भारत यात्रा: प्रमुख मुद्दे
भारत में कपूर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। विदेश विभाग के अनुसार, चर्चा का केंद्र अमेरिका-भारत व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी, मुक्त एवं समावेशी हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण, उभरती प्रौद्योगिकियाँ, रक्षा सहयोग और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना रहेगा। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दोनों देशों के बीच व्यापार और प्रौद्योगिकी साझेदारी पर नई बातचीत जारी है।
मध्य एशिया: ऊर्जा, खनिज और सुरक्षा
भारत के बाद कपूर उज्बेकिस्तान, किर्गिज गणराज्य और कजाकिस्तान की यात्रा करेंगे। इन देशों के साथ अमेरिका ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), आतंकवाद-रोधी सहयोग, सीमा सुरक्षा, डिजिटल एवं भौतिक संपर्क परियोजनाओं और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दों पर सहयोग विस्तार चाहता है। गौरतलब है कि मध्य एशिया में चीन और रूस दोनों की गहरी रणनीतिक पकड़ है, जिसके मद्देनजर अमेरिका अपनी उपस्थिति को नए सिरे से सुदृढ़ करने में जुटा है।
कौन हैं एस. पॉल कपूर
एस. पॉल कपूर भारतीय मूल के अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञ हैं, जिनका जन्म नई दिल्ली में हुआ था। उन्होंने दक्षिण एशिया, परमाणु सुरक्षा, भारत-अमेरिका संबंधों और हिंद-प्रशांत रणनीति पर व्यापक शोध किया है। इससे पहले वे अमेरिकी विदेश विभाग के नीति नियोजन प्रकोष्ठ में कार्यरत रहे हैं। कपूर यह स्पष्ट करते रहे हैं कि अमेरिका एक मजबूत और स्वतंत्र भारत को हिंद-प्रशांत में संतुलन बनाए रखने और किसी एक शक्ति के प्रभुत्व को रोकने के लिए अहम साझेदार मानता है।
व्यापक रणनीतिक संदर्भ
यह दौरा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका दक्षिण और मध्य एशिया दोनों क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक मौजूदगी को विस्तार देने की कोशिश कर रहा है। चीन और रूस के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव के बीच अमेरिका साझेदार देशों के साथ संपर्क, ऊर्जा और सुरक्षा के क्षेत्रों में नए अवसर तलाश रहा है। यह यात्रा इस बात का संकेत है कि वाशिंगटन इस भू-राजनीतिक समीकरण में अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखना चाहता है।
आगे क्या
कपूर की 12 अगस्त तक चलने वाली इस यात्रा के नतीजे आने वाले हफ्तों में द्विपक्षीय संवाद और संभावित समझौतों के रूप में सामने आ सकते हैं। भारत के साथ रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग के नए आयाम तथा मध्य एशियाई देशों के साथ ऊर्जा और खनिज क्षेत्र में साझेदारी की रूपरेखा इस दौरे के प्रमुख संभावित परिणाम माने जा रहे हैं।