साजीब वाजेद जॉय का आरोप: 2024 में शेख हसीना सरकार गिराने में अमेरिका की भूमिका थी
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पुत्र साजीब वाजेद जॉय ने 20 अक्टूबर 2026 को वाशिंगटन में आरोप लगाया कि अगस्त 2024 में हसीना सरकार को सत्ता से बेदखल करने वाले विरोध-प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका का हाथ था। 'सेंटर फॉर यूएस-बांग्लादेश रिलेशंस' द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जॉय ने दावा किया कि तत्कालीन बाइडेन प्रशासन ने ऐसी गतिविधियों का समर्थन किया जिन्होंने शासन परिवर्तन में योगदान दिया। हालाँकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यूएसएआईडी और लोकतंत्र-संगठनों पर आरोप
जॉय ने कथित तौर पर दावा किया कि 'यूएस एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट' (USAID) ने विरोध-प्रदर्शनों में शामिल समूहों को संगठित करने में सहायता की। उनके अनुसार, 'नेशनल डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट' और 'इंटरनेशनल रिपब्लिकन इंस्टीट्यूट' ने भी उन समूहों को प्रशिक्षित किया जो बाद में अशांति और प्रदर्शनों में सक्रिय हुए। जॉय ने कहा, 'बिल्कुल, बाइडेन प्रशासन इस शासन परिवर्तन में गहराई से शामिल था। USAID ने इसके लिए 5 करोड़ डॉलर की फंडिंग दी थी।' उल्लेखनीय है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जॉय कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके जो यह सिद्ध करे कि अमेरिकी सरकारी धन का उद्देश्य सरकार गिराना था।
मुहम्मद यूनुस और ढाका में अमेरिकी राजदूत की भूमिका पर दावे
जॉय ने आरोप लगाया कि अंतरिम सरकार के पूर्व प्रमुख मुहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की सैन्य नेतृत्व पर अमेरिकी दबाव के बाद सत्ता में लाया गया। उनके अनुसार, ढाका में तैनात अमेरिकी राजदूत ने यूनुस को अंतरिम प्रशासन का प्रमुख बनाने में प्रभाव डाला। ये आरोप ऐसे माहौल में लगाए गए जहाँ कार्यक्रम में हसीना की आवामी लीग के समर्थक और कुछ पूर्व सरकारी अधिकारी भी उपस्थित थे।
क्षेत्रीय सुरक्षा और उग्रवाद को लेकर चिंताएँ
क्षेत्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए जॉय ने दावा किया कि हसीना के बाद सत्ता में आई व्यवस्था ने दोषी करार दिए गए उग्रवादियों को रिहा कर दिया और चरमपंथी संगठनों को पुनः प्रभाव बढ़ाने का अवसर मिला। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कुछ लोग बांग्लादेश में सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई दिए हैं और पाकिस्तान से संबद्ध कुछ उग्रवादी समूहों की गतिविधियाँ बांग्लादेश में बढ़ी हैं। जॉय के अनुसार, ये घटनाक्रम भारत और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं।
चीन और आर्थिक समझौतों पर आरोप
जॉय ने ढाका की मौजूदा व्यवस्था पर चीन के साथ संबंध मजबूत करने और चीनी कंपनियों को फायदा पहुँचाने का आरोप भी लगाया। आर्थिक मामलों पर उन्होंने अमेरिकी ऊर्जा कंपनी एक्सेलरेट एनर्जी और विमान निर्माता बोइंग के साथ हुए समझौतों का जिक्र किया तथा दावा किया कि बांग्लादेश के पास अपने दायित्व पूरे करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है। उन्होंने कहा, 'उन्होंने 29 बोइंग विमानों का अनुबंध किया है, लेकिन बांग्लादेश सरकार के पास उनका भुगतान करने के लिए पैसा नहीं है।' न तो संबंधित कंपनियों और न ही बांग्लादेश सरकार ने उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी।
पूर्व अधिकारी की टिप्पणी और व्यापक संदर्भ
हसीना सरकार में काम कर चुके पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अहमद कैकाउस ने अलग से कहा कि राजनीतिक अस्थिरता और कमज़ोर होती संस्थाएँ निवेशकों के भरोसे को नुकसान पहुँचा रही हैं। उन्होंने अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से आग्रह किया कि वे बांग्लादेश में राजनीतिक विभाजन बढ़ाने के बजाय संवाद, निष्पक्ष कानूनी प्रक्रिया और शांतिपूर्ण राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करें। गौरतलब है कि हसीना सरकार पर सत्ता में रहते हुए राजनीतिक दमन, विवादित चुनावों और प्रदर्शनकारियों से निपटने के तरीके को लेकर भी आलोचना होती रही थी। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश के राजनीतिक और सुरक्षा समीकरण लगातार बदल रहे हैं और इस क्षेत्र में भारत की भूमिका पर भी बहस तेज़ है।