29 सितंबर 2026
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यूएनजीए 2026: सिबी जॉर्ज की मिगुएल मोराटिनोस से मुलाकात, भारत-यूएनएओसी सहयोग को नई दिशा

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यूएनजीए 2026: सिबी जॉर्ज की मिगुएल मोराटिनोस से मुलाकात, भारत-यूएनएओसी सहयोग को नई दिशा

सारांश

यूएनजीए 2026 के हाई-लेवल सेशन में भारत ने बहुआयामी कूटनीतिक सक्रियता दिखाई — सिबी जॉर्ज ने यूएनएओसी प्रमुख मोराटिनोस से नई दिल्ली यात्रा के बाद सहयोग को आगे बढ़ाने पर बात की, डरबन घोषणा की 25वीं वर्षगांठ पर भारत का पक्ष रखा और डब्ल्यूएफपी के साथ वैश्विक मानवीय चुनौतियों पर चर्चा की।

मुख्य बातें

सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में यूएनएओसी उच्च प्रतिनिधि मिगुएल मोराटिनोस से मुलाकात की।
दोनों पक्षों ने अप्रैल 2026 में मोराटिनोस की नई दिल्ली यात्रा के अनुभव और भविष्य के सहयोग पर चर्चा की।
जॉर्ज ने डरबन घोषणा और कार्ययोजना (डीडीपीए) की 25वीं वर्षगांठ पर उच्चस्तरीय बैठक में नस्लवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
रविवार को विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यवाहक निदेशक कार्ल स्काउ से अलग बैठक में वैश्विक मानवीय संकट और बढ़ती चुनौतियों पर विमर्श हुआ।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर जानकारी साझा की।

विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के हाई-लेवल सेशन के दौरान संयुक्त राष्ट्र सभ्यताओं के गठबंधन (यूएनएओसी) के उच्च प्रतिनिधि मिगुएल मोराटिनोस से मुलाकात की। इस बैठक में अप्रैल 2026 में मोराटिनोस की नई दिल्ली यात्रा के बाद दोनों पक्षों के बीच सहयोग को और सुदृढ़ करने पर विचार-विमर्श हुआ।

मुख्य घटनाक्रम

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि दोनों नेताओं ने मोराटिनोस की नई दिल्ली यात्रा के अनुभव और फीडबैक पर चर्चा की। साथ ही भविष्य में भारत और यूएनएओसी के बीच संभावित सहयोग की रूपरेखा पर भी बातचीत हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक बहुपक्षीय मंचों पर अपनी उपस्थिति और सक्रियता को निरंतर बढ़ा रहा है।

डरबन घोषणा पर भारत का पक्ष

इसी यूएनजीए सत्र के दौरान सिबी जॉर्ज ने डरबन घोषणा और कार्ययोजना (डीडीपीए) को अपनाए जाने के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में भारत का आधिकारिक बयान दिया। उन्होंने नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव, विदेशियों के प्रति नफरत और उससे जुड़े भेदभाव के खिलाफ लड़ाई में भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सभी लोगों के लिए समानता और सम्मान सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की साझा जिम्मेदारी है।

भारत ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि डीडीपीए को पूर्ण एवं प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। इन प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर समन्वय की भी दरकार है।

विश्व खाद्य कार्यक्रम से मुलाकात

यूएनजीए सत्र से इतर रविवार को सिबी जॉर्ज ने विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ से अलग बैठक की। विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों ने बदलते वैश्विक हालात और मानवीय सहायता के क्षेत्र में आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। खासतौर पर दुनिया के कई हिस्सों में एक साथ उभरती आपात स्थितियों के कारण मानवीय सहायता एजेंसियों पर बढ़ते दबाव का मुद्दा इस बातचीत के केंद्र में रहा।

गौरतलब है कि भारत और डब्ल्यूएफपी के बीच दीर्घकालिक साझेदारी रही है और यह बैठक उस सहयोग को वैश्विक मानवीय संकट के संदर्भ में और अधिक प्रासंगिक बनाती है।

भारत की बहुपक्षीय कूटनीति का व्यापक संदर्भ

यूएनजीए के इस हाई-लेवल सेशन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की सक्रिय भागीदारी यह दर्शाती है कि नई दिल्ली बहुपक्षीय मंचों पर अपनी भूमिका को व्यापक और विविध आयाम देने में जुटी है। सभ्यताओं के संवाद से लेकर वैश्विक खाद्य सुरक्षा तक, भारत विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंडों में सक्रिय योगदान दे रहा है।

आगे क्या

भारत और यूएनएओसी के बीच सहयोग के ठोस स्वरूप पर आने वाले महीनों में और स्पष्टता आने की उम्मीद है। डब्ल्यूएफपी के साथ हुई बातचीत के परिणाम वैश्विक मानवीय सहायता के समन्वय में भारत की भूमिका को परिभाषित करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

डीडीपीए और डब्ल्यूएफपी — यह संकेत देती है कि भारत केवल द्विपक्षीय कूटनीति तक सीमित नहीं रहना चाहता। हालांकि इन बैठकों के ठोस परिणाम अभी सामने नहीं आए हैं, और 'सहयोग पर चर्चा' जैसे वाक्यांश प्रायः राजनयिक शिष्टाचार तक सिमटे रहते हैं। असली कसौटी यह होगी कि मोराटिनोस की नई दिल्ली यात्रा और इन बातचीतों के बाद कोई ठोस साझा कार्यक्रम या पहल सामने आती है या नहीं — वरना यह केवल सुर्खियों में दर्ज एक और कूटनीतिक भेंट बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिबी जॉर्ज और मिगुएल मोराटिनोस की बैठक में क्या हुआ?
29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में यूएनजीए हाई-लेवल सेशन के दौरान सिबी जॉर्ज और यूएनएओसी उच्च प्रतिनिधि मिगुएल मोराटिनोस ने अप्रैल 2026 में नई दिल्ली यात्रा के फीडबैक और भविष्य के सहयोग पर चर्चा की। यह बैठक भारत-यूएनएओसी साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में हुई।
यूएनएओसी क्या है और भारत का इससे क्या संबंध है?
यूएनएओसी (संयुक्त राष्ट्र सभ्यताओं का गठबंधन) एक संयुक्त राष्ट्र पहल है जो विभिन्न संस्कृतियों और सभ्यताओं के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा देती है। भारत इस मंच पर सांस्कृतिक विविधता और अंतर-सभ्यता सहयोग के एक सक्रिय पैरोकार के रूप में जुड़ा है।
डरबन घोषणा की 25वीं वर्षगांठ पर भारत ने क्या कहा?
सिबी जॉर्ज ने उच्चस्तरीय बैठक में नस्लवाद, नस्लीय भेदभाव और विदेशियों के प्रति नफरत के खिलाफ भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई। भारत ने डीडीपीए को पूरी तरह और प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
सिबी जॉर्ज की विश्व खाद्य कार्यक्रम से बैठक में क्या चर्चा हुई?
सिबी जॉर्ज ने डब्ल्यूएफपी के कार्यवाहक कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ से मुलाकात में बदलते वैश्विक हालात और मानवीय सहायता एजेंसियों के सामने आ रही चुनौतियों पर बातचीत की। दुनिया के कई हिस्सों में एक साथ उभरती आपात स्थितियों से इन संगठनों पर बढ़ते दबाव का मुद्दा प्रमुखता से उठा।
इन बैठकों से भारत की विदेश नीति पर क्या असर पड़ेगा?
ये बैठकें भारत की उस रणनीति का हिस्सा हैं जिसमें वह बहुपक्षीय मंचों पर अपनी उपस्थिति और प्रभाव को व्यापक बना रहा है। यूएनएओसी, डब्ल्यूएफपी और डीडीपीए जैसे विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी नई दिल्ली की वैश्विक साख और कूटनीतिक विविधता को दर्शाती है।
राष्ट्र प्रेस
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