साउथ वजीरिस्तान में 10 दिनों से मोबाइल-इंटरनेट ठप, सरवेकी-बरवंद में सड़कों पर उतरे आदिवासी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान के अपर साउथ वजीरिस्तान जिले के सरवेकी और बरवंद इलाकों में 10 दिनों से अधिक समय से मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं, जिसके विरोध में स्थानीय आदिवासी, युवा और व्यापारी सोमवार, 26 मई 2025 को सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने संचार सुविधाओं की तत्काल बहाली की माँग की, यह कहते हुए कि यह बंदी उनके दैनिक जीवन, व्यापार और आपातकालीन सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, स्रारोगा अहमदवाम टावर — जो इस क्षेत्र में संचालित तीनों मोबाइल टावरों का मुख्य लिंक है — में तकनीकी खराबी आ गई, जिसके कारण पूरे इलाके में नेटवर्क और इंटरनेट सेवाएं ठप हो गईं। इस एकल तकनीकी विफलता ने सरवेकी और बरवंद दोनों इलाकों को एक साथ डिजिटल अलगाव में धकेल दिया।
पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय आदिवासी समुदाय के सदस्य, युवा और व्यापारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ईद-उल-अजहा से ठीक पहले इस बंदी को विशेष रूप से पीड़ादायक बताया, क्योंकि लोग देश-विदेश में रहने वाले अपने परिजनों से भी संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
आम जनता पर असर
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि इस बंदी से जीवन के हर क्षेत्र पर असर पड़ा है। छात्र ऑनलाइन पाठ्य सामग्री और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। व्यापारियों को इंटरनेट-आधारित लेन-देन बंद होने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर है — मरीज और आपात स्थितियों में फँसे लोग अस्पतालों, रेस्क्यू सेवाओं या परिजनों से समय पर संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के कई सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों में पहले से ही बुनियादी डिजिटल ढाँचे की कमी है।
बलूचिस्तान में भी इसी तरह का विरोध
गौरतलब है कि साउथ वजीरिस्तान की यह घटना अकेली नहीं है। पिछले सप्ताह पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मस्तुंग जिले में बलूचिस्तान विश्वविद्यालय के सब-कैंपस के छात्रों ने भी विरोध प्रदर्शन किया था।
रिपोर्टों के अनुसार, छात्र मस्तुंग डिग्री कॉलेज के बाहर एकत्र हुए और राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया। उनकी दो प्रमुख माँगें थीं — प्रधानमंत्री युथ लैपटॉप योजना के तहत कई महीनों से रुके लैपटॉप वितरण को पूरा किया जाए, और मस्तुंग तथा आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से जारी इंटरनेट बंदी समाप्त की जाए। छात्रों ने चेतावनी दी कि माँगें न मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान के जनजातीय और सीमावर्ती इलाकों में इंटरनेट बंदी एक बार-बार उठने वाला मुद्दा बन चुकी है। आलोचकों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से लगाई जाने वाली ये बंदियाँ अक्सर बिना स्पष्ट समय-सीमा के लंबी खिंच जाती हैं, जिसका खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है। साउथ वजीरिस्तान के मामले में, कथित तौर पर यह बंदी सुरक्षा कारणों से नहीं बल्कि तकनीकी खराबी के कारण है, जो इसे और भी गंभीर प्रशासनिक विफलता का उदाहरण बनाती है।
क्या होगा आगे
अभी तक पाकिस्तानी सरकार या दूरसंचार अधिकारियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सेवाएं बहाल नहीं होतीं, उनका विरोध जारी रहेगा। ईद-उल-अजहा नज़दीक होने के कारण दबाव और बढ़ने की आशंका है।