7 अक्टूबर 2026
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श्रीलंका की पूर्व प्रथम महिला शिरंती राजपक्षे गिरफ्तार, CIABOC ने रिश्वत मामले में की कार्रवाई

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श्रीलंका की पूर्व प्रथम महिला शिरंती राजपक्षे गिरफ्तार, CIABOC ने रिश्वत मामले में की कार्रवाई

सारांश

श्रीलंका की पूर्व प्रथम महिला शिरंती राजपक्षे की गिरफ्तारी देश के सबसे शक्तिशाली रहे राजपक्षे परिवार पर कसते शिकंजे की ताज़ा कड़ी है। 2022 के आर्थिक संकट के बाद जवाबदेही की माँग अब कानूनी कार्रवाई का रूप ले रही है — 'सिरिलिया सविया' संगठन से जुड़ा यह मामला उस बड़े बदलाव का संकेत है।

मुख्य बातें

पूर्व प्रथम महिला शिरंती राजपक्षे ( 73 वर्ष ) को 7 अक्टूबर 2026 को कोलंबो में गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी CIABOC (रिश्वत एवं भ्रष्टाचार जाँच आयोग) के अधिकारियों ने उनके आवास पर पूछताछ के बाद की।
मामला 'सिरिलिया सविया' संगठन के कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़ा बताया जा रहा है।
शिरंती 5 अक्टूबर को सिंगापुर से चिकित्सा उपचार के बाद लौटी थीं; लौटने के बाद जमानत अर्जी भी दाखिल की गई थी।
मालिगाकांडा मजिस्ट्रेट अदालत में 12 अक्टूबर को सुनवाई निर्धारित है; अदालत से अब तक कोई दोषसिद्धि नहीं।

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की पत्नी और पूर्व प्रथम महिला शिरंती राजपक्षे (73 वर्ष) को बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर लिया गया। रिश्वत एवं भ्रष्टाचार की जाँच करने वाले आयोग (सीआईएबीओसी / CIABOC) के अधिकारियों ने कोलंबो स्थित उनके आवास पर पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह गिरफ्तारी 'सिरिलिया सविया' संगठन से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जाँच के सिलसिले में हुई है।

गिरफ्तारी का घटनाक्रम

श्रीलंकाई दैनिक डेली मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार सुबह CIABOC के अधिकारियों ने शिरंती राजपक्षे के कोलंबो स्थित आवास पर पहुँचकर उनसे विस्तृत पूछताछ की। इसके बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। गौरतलब है कि शिरंती राजपक्षे को 13 अक्टूबर को पुलिस की वित्तीय अपराध जाँच इकाई (एफसीआईडी / FCID) के समक्ष बयान दर्ज कराने के लिए उपस्थित होना था, लेकिन उससे पहले ही CIABOC ने यह कदम उठाया।

यह कार्रवाई उनकी सिंगापुर यात्रा के लौटने के महज दो दिन बाद हुई। वे सितंबर में चिकित्सा उपचार के लिए सिंगापुर गई थीं और 5 अक्टूबर को श्रीलंका वापस लौटी थीं।

जमानत अर्जी और अदालती कार्यवाही

शिरंती के लौटने के बाद उनकी ओर से मालिगाकांडा मजिस्ट्रेट अदालत में गिरफ्तारी-पूर्व जमानत की अर्जी दाखिल की गई थी। अदालत ने मंगलवार को FCID के अधिकारी को 12 अक्टूबर को पेश होकर इस अर्जी पर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया था। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अदालती सुनवाई से पहले ही CIABOC की कार्रवाई हो गई।

'सिरिलिया सविया' संगठन से जुड़ा मामला

शिरंती राजपक्षे के विरुद्ध चल रही जाँच का केंद्र 'सिरिलिया सविया' संगठन के वित्तीय लेन-देन से जुड़ा बताया जा रहा है, जिससे वे कथित तौर पर जुड़ी रही हैं। इससे पहले सितंबर में FCID ने उन्हें इसी मामले में बयान दर्ज कराने के लिए समन भेजा था। यह पहली बार नहीं है जब राजपक्षे परिवार के किसी सदस्य को इस तरह की जाँच का सामना करना पड़ा हो — पिछले कुछ वर्षों में इस परिवार के विभिन्न सदस्यों पर भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं।

राजपक्षे परिवार पर जाँच का व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब श्रीलंका में राजपक्षे परिवार के खिलाफ वित्तीय कदाचार से जुड़े कई मामलों की जाँच चल रही है। 2022 के आर्थिक संकट और व्यापक जन-आंदोलन के बाद से देश में सत्ता-परिवर्तन के साथ-साथ पूर्व शासन की जवाबदेही को लेकर सार्वजनिक दबाव भी बढ़ा है। हालाँकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी जाँच या आरोप का होना स्वयं में दोषसिद्धि का प्रमाण नहीं है — शिरंती राजपक्षे के विरुद्ध इन मामलों में अब तक किसी अदालत से दोषसिद्धि की सूचना नहीं है।

आगे की संभावित कार्यवाही

मालिगाकांडा मजिस्ट्रेट अदालत में 12 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई अब अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि गिरफ्तारी के बाद जमानत अर्जी की स्थिति बदल सकती है। शिरंती राजपक्षे को 13 अक्टूबर को FCID के सामने बयान देना था — अब यह प्रक्रिया नए कानूनी संदर्भ में आगे बढ़ेगी। यह मामला श्रीलंका में उच्च-स्तरीय भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाइयों की दिशा तय करने में एक अहम मिसाल साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि श्रीलंका की उस राजनीतिक परियोजना की परीक्षा है जो 2022 के जन-आंदोलन के बाद 'जवाबदेही' के वादे पर टिकी है। राजपक्षे परिवार दशकों तक श्रीलंका की राजनीति और अर्थव्यवस्था का केंद्र रहा — ऐसे में यह कार्रवाई संस्थागत साहस और राजनीतिक इच्छाशक्ति दोनों की कसौटी है। हालाँकि, CIABOC और FCID की जाँच प्रक्रियाओं के बीच समन्वय के अभाव के सवाल भी उठेंगे — अदालती जमानत सुनवाई से ठीक पहले हुई इस गिरफ्तारी पर कानूनी विशेषज्ञ प्रक्रियागत पहलुओं की पड़ताल करेंगे। दोषसिद्धि तक निर्दोषता का सिद्धांत यहाँ भी लागू होता है, लेकिन राजनीतिक संदेश स्पष्ट है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिरंती राजपक्षे को क्यों गिरफ्तार किया गया?
शिरंती राजपक्षे को श्रीलंका के CIABOC (रिश्वत एवं भ्रष्टाचार जाँच आयोग) ने रिश्वतखोरी के आरोपों से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया। यह मामला 'सिरिलिया सविया' संगठन के कथित वित्तीय लेन-देन से संबंधित बताया जा रहा है, जिससे वे जुड़ी रही हैं।
शिरंती राजपक्षे कौन हैं?
शिरंती राजपक्षे श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की पत्नी और देश की पूर्व प्रथम महिला हैं। वे 73 वर्षीया हैं और 'सिरिलिया सविया' संगठन से जुड़ी रही हैं।
'सिरिलिया सविया' संगठन क्या है और इसका मामले से क्या संबंध है?
'सिरिलिया सविया' एक संगठन है जिससे शिरंती राजपक्षे के जुड़े होने की बात कही जाती है। जाँच अधिकारियों के अनुसार, इस संगठन के वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताएँ पाई गई हैं, जो इस मामले का आधार हैं।
शिरंती राजपक्षे के मामले में अदालती कार्यवाही का अगला चरण क्या है?
मालिगाकांडा मजिस्ट्रेट अदालत में 12 अक्टूबर को FCID अधिकारी के पक्ष के साथ जमानत अर्जी पर सुनवाई निर्धारित है। इसके अलावा शिरंती को 13 अक्टूबर को FCID के समक्ष बयान देना था, जो अब नए कानूनी संदर्भ में होगा।
क्या शिरंती राजपक्षे को किसी अदालत ने दोषी ठहराया है?
नहीं, अब तक किसी अदालत ने शिरंती राजपक्षे को इन मामलों में दोषी नहीं ठहराया है। जाँच और गिरफ्तारी अभी कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है; दोषसिद्धि तक वे निर्दोष मानी जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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