अरविंदा डी सिल्वा और पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, एयरबस मामले में कोलंबो कोर्ट का आदेश
सारांश
मुख्य बातें
श्रीलंका के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज अरविंदा डी सिल्वा और उनकी पत्नी प्रियंगा अनुष्का विजेनायके के खिलाफ कोलंबो फोर्ट मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बुधवार, 16 सितंबर को गिरफ्तारी वारंट जारी किया। यह कदम एक एयरबस लेन-देन से जुड़े मामले में दोनों के जमानतदार के रूप में कोर्ट में अनुपस्थित रहने के कारण उठाया गया। मजिस्ट्रेट पासन अमरसेना ने यह आदेश तब सुनाया जब मामले की सुनवाई के दौरान न तो मुख्य संदिग्ध और न ही जमानतदार कोर्ट में उपस्थित हुए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण कपिला चंद्रसेना और उनकी पत्नी से जुड़े एयरबस ट्रांजेक्शन से संबंधित है। कपिला चंद्रसेना, जिन्हें इस मामले में संदिग्ध के रूप में नामजद किया गया था, अब जीवित नहीं हैं। उनकी पत्नी को जमानत पर रिहा किया जा चुका है और वे इस समय विदेश में हैं। अरविंदा डी सिल्वा और उनकी पत्नी इस मामले में जमानतदार की भूमिका में थे।
कोर्ट में क्या हुआ
सुनवाई के दिन मुख्य संदिग्ध कोर्ट में अनुपस्थित रहे और जमानतदार भी पेश नहीं हुए, जिसके बाद मजिस्ट्रेट ने वारंट जारी करने का आदेश दिया। जमानतदारों की ओर से पेश हुए वकील ने कोर्ट को सूचित किया कि अरविंदा डी सिल्वा की माँ का निधन हो गया है और उनका अंतिम संस्कार उसी दिन यानी बुधवार को निर्धारित था, इसलिए वे उपस्थित नहीं हो सके।
मजिस्ट्रेट पासन अमरसेना ने निर्देश दिया कि मामले से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएं और जब वारंट वापस लेने की अर्जी दी जाए, तब परिस्थितियों को कोर्ट के संज्ञान में लाया जाए।
अरविंदा डी सिल्वा: क्रिकेट करियर पर एक नज़र
60 वर्षीय अरविंदा डी सिल्वा श्रीलंका क्रिकेट के सर्वकालिक महान बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। वे 1996 वनडे विश्व कप के नायक रहे, जब श्रीलंका ने पहली बार यह खिताब जीता था। उन्होंने श्रीलंका के लिए 93 टेस्ट और 308 वनडे मैच खेले।
टेस्ट क्रिकेट में 159 पारियों में 20 शतक और 22 अर्धशतक की बदौलत उन्होंने 6,361 रन बनाए और 29 विकेट भी लिए। वनडे फॉर्मेट में 296 पारियों में 11 शतक और 64 अर्धशतक सहित 9,284 रन और 106 विकेट उनके नाम दर्ज हैं।
आगे क्या होगा
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वारंट वापस लेने के लिए समुचित दस्तावेज और परिस्थितियों का विवरण प्रस्तुत करना होगा। यह देखना होगा कि अरविंदा डी सिल्वा का पक्ष कोर्ट को कितनी जल्दी संतुष्ट कर पाता है और क्या मजिस्ट्रेट माँ के निधन की परिस्थिति को पर्याप्त कारण मानते हुए वारंट वापस लेते हैं।