16 अगस्त 2026
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सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले: 54 देशों की यात्रा पूरी, फिजी से सैन फ्रांसिस्को तक फहरा तिरंगा

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सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले: 54 देशों की यात्रा पूरी, फिजी से सैन फ्रांसिस्को तक फहरा तिरंगा

सारांश

फिजी के सुवा में पहली सूर्य किरण से शुरू होकर सैन फ्रांसिस्को में सूर्यास्त तक — 'सूर्यपथ तिरंगा' ने 54 देशों में तिरंगे की भावना को जीवंत किया। 80वें स्वतंत्रता दिवस और वंदे मातरम् के 150 वर्षों के उत्सव में यह भारत की वैश्विक सॉफ्ट पावर का नया प्रतीक बना।

मुख्य बातें

सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले पहली बार 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत आयोजित हुई।
रिले ने 54 देशों और कई टाइम जोन को पार किया — फिजी (सुवा) से शुरू होकर सैन फ्रांसिस्को पर समाप्त।
प्रत्येक भारतीय मिशन ने सूर्योदय पर तिरंगा फहराने के बाद एक्स पर पोस्ट के जरिए अगले देश को बारी सौंपी।
रिले में 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव भी मनाया गया।
कई दूतावासों ने 'भारत को जानिए क्विज' के विजेताओं को प्रमाण पत्र वितरित किए।
प्रवासी भारतीय समुदाय की व्यापक भागीदारी ने तिरंगे के प्रति गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाया।

विदेश मंत्रालय ने 15 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि पहली बार आयोजित 'सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले' ने 54 देशों और कई टाइम जोन को पार करते हुए अपनी ऐतिहासिक यात्रा पूरी की — पूर्व में फिजी से शुरू होकर पश्चिम में सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका तक। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस अभूतपूर्व वैश्विक पहल का समापन हुआ, जो 'हर घर तिरंगा' अभियान का अंतरराष्ट्रीय विस्तार था।

रिले की शुरुआत और मार्ग

फिजी स्थित भारतीय उच्चायोग से सूर्योदय के साथ तिरंगा फहराकर इस रिले की शुरुआत हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस पहल में एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिरंगे की भावना को आगे बढ़ाया गया — यानी प्रत्येक देश में भारतीय मिशन ने सुबह ध्वजारोहण के बाद एक्स पर पोस्ट के माध्यम से अगले देश को यह जिम्मेदारी सौंपी।

फिजी के बाद रिले स्पेन, मोरक्को, आइसलैंड, ब्राजील, सूरीनाम, गुयाना, अर्जेंटीना, त्रिनिदाद और टोबैगो, डोमिनिकन गणराज्य, न्यूयॉर्क, कोलंबिया, ओटावा, किंग्स्टन (जमैका), वाशिंगटन डीसी, लीमा (पेरू), टोरंटो और मैक्सिको से होते हुए अंततः सैन फ्रांसिस्को पहुंची।

मुख्य घटनाक्रम और भागीदारी

फिजी स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर लिखा, 'सूरज की पहली किरणों के साथ फिजी के सुवा में सबसे पहले भारतीय ध्वज फहराया गया। इसी के साथ वैश्विक तिरंगा रिले 'सूर्यपथ तिरंगा' की शुरुआत हुई। यह एक प्रतीकात्मक यात्रा है, जो भारत के स्वतंत्रता दिवस की भावना को दुनियाभर में पहुंचा रही है।'

स्पेन में भारतीय दूतावास ने बारी मोरक्को को सौंपते हुए कहा, 'सूर्योदय के समय हमारे तट से तिरंगा फहराया गया। अब सूर्यपथ तिरंगा की इस ऐतिहासिक यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय दूतावास, मोरक्को की बारी है।'

समापन और संदेश

सैन फ्रांसिस्को स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास में तिरंगा फहराए जाने के साथ रिले का प्रेरणादायक समापन हुआ। महावाणिज्य दूतावास ने एक्स पर कहा, 'पूर्व से पश्चिम की ओर उगते सूर्य का अनुसरण करते हुए 'हर घर तिरंगा 2026' के तहत पहली बार आयोजित इस वैश्विक रिले ने भारतीय मिशनों को 150 वर्ष के वंदे मातरम्, हमारी साझा विरासत और हमारे स्थायी राष्ट्रीय गौरव के सामूहिक उत्सव में एक साथ जोड़ा।'

विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस रिले के माध्यम से 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी मनाया गया और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में इसकी स्थायी विरासत को याद किया गया।

प्रवासी भारतीयों की भागीदारी

रिले में प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों की व्यापक भागीदारी देखी गई, जो तिरंगे के साथ उनके गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है। इसके साथ ही, कई भारतीय दूतावासों ने विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित 'भारत को जानिए क्विज' के स्वतंत्रता दिवस विशेष संस्करण में शीर्ष स्कोर करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।

आगे की राह

यह पहली बार आयोजित वैश्विक रिले भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का एक नया अध्याय है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वैश्विक उपस्थिति और प्रवासी समुदाय के साथ संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने में जुटा है। भविष्य में इस तरह की पहलों के और विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें सोशल मीडिया को राजनयिक साधन के रूप में इस्तेमाल किया गया। हालांकि, यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या इस तरह की प्रतीकात्मक पहलें प्रवासी भारतीयों की ठोस समस्याओं — वीज़ा, कांसुलर सेवाएँ, श्रम अधिकार — को संबोधित करने की दिशा में भी उतनी ही ऊर्जा खर्च करती हैं। वंदे मातरम् के 150 वर्षों के साथ इस आयोजन को जोड़ना ऐतिहासिक और भावनात्मक दृष्टि से प्रभावशाली है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह जुड़ाव केवल उत्सव तक सीमित रहेगा या नीतिगत स्तर पर भी दिखेगा।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले क्या है?
यह 'हर घर तिरंगा' अभियान के तहत पहली बार आयोजित एक वैश्विक ध्वजारोहण रिले है, जिसमें 54 देशों के भारतीय मिशनों ने सूर्योदय के क्रम में तिरंगा फहराया। रिले फिजी के सुवा से शुरू होकर सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका में समाप्त हुई।
सूर्यपथ तिरंगा रिले कब और कहाँ से शुरू हुई?
रिले भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस, 15 अगस्त 2026 को फिजी स्थित भारतीय उच्चायोग से सूरज की पहली किरणों के साथ शुरू हुई। इसका समापन सैन फ्रांसिस्को स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास में ध्वजारोहण के साथ हुआ।
इस रिले में किन-किन देशों ने भाग लिया?
रिले ने कुल 54 देशों को कवर किया, जिनमें फिजी, स्पेन, मोरक्को, आइसलैंड, ब्राजील, सूरीनाम, गुयाना, अर्जेंटीना, त्रिनिदाद और टोबैगो, डोमिनिकन गणराज्य, कोलंबिया, जमैका, पेरू, कनाडा, मैक्सिको और अमेरिका प्रमुख हैं।
वंदे मातरम् के 150 वर्षों का इस रिले से क्या संबंध है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस रिले के माध्यम से 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव भी मनाया गया और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में इसकी स्थायी विरासत को याद किया गया। यह आयोजन भारत की सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान के वैश्विक प्रसार का हिस्सा था।
प्रवासी भारतीय समुदाय ने इस रिले में कैसे भाग लिया?
दुनियाभर में प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों ने रिले में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसके अलावा, कई भारतीय दूतावासों ने 'भारत को जानिए क्विज' के स्वतंत्रता दिवस विशेष संस्करण में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।
राष्ट्र प्रेस
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