सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले: 54 देशों की यात्रा पूरी, फिजी से सैन फ्रांसिस्को तक फहरा तिरंगा
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्रालय ने 15 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि पहली बार आयोजित 'सूर्यपथ तिरंगा ग्लोबल रिले' ने 54 देशों और कई टाइम जोन को पार करते हुए अपनी ऐतिहासिक यात्रा पूरी की — पूर्व में फिजी से शुरू होकर पश्चिम में सैन फ्रांसिस्को, अमेरिका तक। भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस अभूतपूर्व वैश्विक पहल का समापन हुआ, जो 'हर घर तिरंगा' अभियान का अंतरराष्ट्रीय विस्तार था।
रिले की शुरुआत और मार्ग
फिजी स्थित भारतीय उच्चायोग से सूर्योदय के साथ तिरंगा फहराकर इस रिले की शुरुआत हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस पहल में एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिरंगे की भावना को आगे बढ़ाया गया — यानी प्रत्येक देश में भारतीय मिशन ने सुबह ध्वजारोहण के बाद एक्स पर पोस्ट के माध्यम से अगले देश को यह जिम्मेदारी सौंपी।
फिजी के बाद रिले स्पेन, मोरक्को, आइसलैंड, ब्राजील, सूरीनाम, गुयाना, अर्जेंटीना, त्रिनिदाद और टोबैगो, डोमिनिकन गणराज्य, न्यूयॉर्क, कोलंबिया, ओटावा, किंग्स्टन (जमैका), वाशिंगटन डीसी, लीमा (पेरू), टोरंटो और मैक्सिको से होते हुए अंततः सैन फ्रांसिस्को पहुंची।
मुख्य घटनाक्रम और भागीदारी
फिजी स्थित भारतीय उच्चायोग ने एक्स पर लिखा, 'सूरज की पहली किरणों के साथ फिजी के सुवा में सबसे पहले भारतीय ध्वज फहराया गया। इसी के साथ वैश्विक तिरंगा रिले 'सूर्यपथ तिरंगा' की शुरुआत हुई। यह एक प्रतीकात्मक यात्रा है, जो भारत के स्वतंत्रता दिवस की भावना को दुनियाभर में पहुंचा रही है।'
स्पेन में भारतीय दूतावास ने बारी मोरक्को को सौंपते हुए कहा, 'सूर्योदय के समय हमारे तट से तिरंगा फहराया गया। अब सूर्यपथ तिरंगा की इस ऐतिहासिक यात्रा को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय दूतावास, मोरक्को की बारी है।'
समापन और संदेश
सैन फ्रांसिस्को स्थित भारत के महावाणिज्य दूतावास में तिरंगा फहराए जाने के साथ रिले का प्रेरणादायक समापन हुआ। महावाणिज्य दूतावास ने एक्स पर कहा, 'पूर्व से पश्चिम की ओर उगते सूर्य का अनुसरण करते हुए 'हर घर तिरंगा 2026' के तहत पहली बार आयोजित इस वैश्विक रिले ने भारतीय मिशनों को 150 वर्ष के वंदे मातरम्, हमारी साझा विरासत और हमारे स्थायी राष्ट्रीय गौरव के सामूहिक उत्सव में एक साथ जोड़ा।'
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस रिले के माध्यम से 'वंदे मातरम्' के 150 वर्ष पूरे होने का अवसर भी मनाया गया और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में इसकी स्थायी विरासत को याद किया गया।
प्रवासी भारतीयों की भागीदारी
रिले में प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों की व्यापक भागीदारी देखी गई, जो तिरंगे के साथ उनके गहरे भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है। इसके साथ ही, कई भारतीय दूतावासों ने विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित 'भारत को जानिए क्विज' के स्वतंत्रता दिवस विशेष संस्करण में शीर्ष स्कोर करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।
आगे की राह
यह पहली बार आयोजित वैश्विक रिले भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का एक नया अध्याय है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी वैश्विक उपस्थिति और प्रवासी समुदाय के साथ संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने में जुटा है। भविष्य में इस तरह की पहलों के और विस्तार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।