स्कारबोरो शोल विवाद: फिलीपींस के यूएन नक्शे के बाद ताइवान ने दोहराया दक्षिण चीन सागर पर दावा
सारांश
मुख्य बातें
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने रविवार, 2 अगस्त को दक्षिण चीन सागर में स्थित द्वीपों पर अपनी संप्रभुता के दावे को एक बार फिर दोहराया। यह बयान उस समय आया जब फिलीपींस ने स्कारबोरो शोल का आधिकारिक समुद्री नक्शा संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को सौंपा, जिससे इस विवादित एटोल पर तीन देशों के बीच का तनाव एक बार फिर उभर आया।
ताइवान का रुख और बहुपक्षीय भागीदारी की माँग
ताइवान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री कानून के ढाँचे के भीतर शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ऐसे बहुपक्षीय विवाद-समाधान तंत्रों में ताइवान को भी शामिल किया जाना चाहिए — एक ऐसी माँग जो क्षेत्रीय कूटनीति में ताइपे की लंबे समय से चली आ रही चिंता को दर्शाती है।
गौरतलब है कि स्कारबोरो शोल को फिलीपींस में 'बाजो डे मासिनलोक', ताइवान में 'डेमोक्रेसी रीफ' और चीन में 'हुआंगयान दाओ' कहा जाता है। तीनों देश इस पर अपना-अपना दावा करते हैं।
फिलीपींस का यूएन को नक्शा सौंपना
फिलीपींस के विदेश विभाग ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के अनुच्छेद 16 के तहत स्कारबोरो शोल का आधिकारिक समुद्री नक्शा यूएन को सौंपा। विभाग के अनुसार, समुद्री कानून के तहत तटीय देशों को उन आधिकारिक नक्शों को सार्वजनिक करना अनिवार्य है जिनमें वे बेसलाइन दर्शाई जाती हैं जिनसे उनके क्षेत्रीय समुद्र की चौड़ाई मापी जाती है। मनीला का यह कदम उस एटोल पर अपनी स्थिति को औपचारिक रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
चीन की तीखी प्रतिक्रिया
31 जुलाई को चीन के विदेश मंत्रालय ने फिलीपींस के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे 'गैरकानूनी, अमान्य और निरर्थक' करार दिया। मंत्रालय ने कहा, "हुआंगयान दाओ चीन का अभिन्न हिस्सा है। इस द्वीप और इसके आसपास के जलक्षेत्र पर चीन का निर्विवाद अधिकार है।"
चीन ने तर्क दिया कि फिलीपींस की सीमाएं कई अंतरराष्ट्रीय संधियों के ज़रिए तय की गई हैं और हुआंगयान दाओ कभी भी उसका हिस्सा नहीं रहा। बीजिंग ने फिलीपींस की ओर से एकतरफा शुरू की गई 'साउथ चाइना सी आर्बिट्रेशन' को भी पैक्टा संट सर्वंडा और एस्टॉपेल जैसे अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन बताया। चीन के अनुसार, यह कदम यूएनसीएलओएस, दोनों देशों के बीच हुए द्विपक्षीय समझौतों तथा दक्षिण चीन सागर में पक्षों के आचरण संबंधी घोषणा (डीओसी) के भी विरुद्ध है।
क्या होगा आगे
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय दावों को लेकर तनाव पहले से ही उच्च स्तर पर है। फिलीपींस का यूएन को नक्शा सौंपना और ताइवान का अपने दावे को दोहराना — दोनों मिलकर इस बहुपक्षीय विवाद को एक नई कूटनीतिक परत देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कोई बाध्यकारी बहुपक्षीय ढाँचा नहीं बनता, तब तक यह विवाद और जटिल होता रहेगा।