ह्वांगयेन द्वीप विवाद: चीनी कोस्ट गार्ड ने फिलीपींस के दो जहाज़ों को खदेड़ा, संप्रभुता का दावा दोहराया
सारांश
मुख्य बातें
चीन तट रक्षक बल (CCG) ने 23 जुलाई 2026 को दावा किया कि उसने ह्वांगयेन द्वीप के निकट जलक्षेत्र में घुसे फिलीपींस के दो सरकारी जहाज़ों — 3012 और 3018 — को कानूनी प्रक्रिया के तहत खदेड़ दिया। चीन के अनुसार, इन जहाज़ों ने बार-बार दी गई चेतावनियों की अनदेखी करते हुए उसके दावे वाले जलक्षेत्र में प्रवेश किया।
मुख्य घटनाक्रम
चीन तट रक्षक बल के प्रवक्ता च्यांग ल्वुए ने कहा कि फिलीपींस के जहाज़ों ने चीन की चेतावनियों और निर्देशों को नज़रअंदाज़ किया और ह्वांगयेन द्वीप पर चीन के दावे वाले जलक्षेत्र में घुसने पर अड़े रहे। उनके अनुसार, चीनी कोस्ट गार्ड ने निगरानी, घेराबंदी और नियंत्रण जैसे कदम उठाते हुए फिलीपीनी जहाज़ों को वापस खदेड़ा। प्रवक्ता ने इस अभियान को 'पेशेवर, मानक और कानूनी' बताया।
इसी दिन सीसीजीएस हेंग्शा के नेतृत्व में चीन तट रक्षक बल के एक कार्य समूह ने त्याओयु द्वीप और उससे संबद्ध द्वीपों के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में भी अधिकार संरक्षण गश्त की। चीन ने इसे भी अपने कानूनी अधिकारों के तहत किया गया अभियान बताया।
चीन का रुख
प्रवक्ता च्यांग ल्वुए ने दोहराया कि ह्वांगयेन द्वीप चीन के क्षेत्र का अभिन्न अंग है। उन्होंने फिलीपींस से अपील की कि वह तत्काल अपनी 'उल्लंघनकारी और उकसावे वाली' गतिविधियाँ बंद करे। चीन ने स्पष्ट किया कि उसका तट रक्षक बल इस क्षेत्र में कानून प्रवर्तन जारी रखेगा और चीन की 'संप्रभुता, प्रादेशिक अखंडता तथा समुद्री अधिकारों' की पूरी तरह रक्षा करेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण चीन सागर में चीन और फिलीपींस के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ह्वांगयेन द्वीप — जिसे फिलीपींस स्कारबोरो शोल के नाम से जानता है — दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है। 2016 में अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण ने इस क्षेत्र पर चीन के दावों को खारिज किया था, जिसे बीजिंग ने मानने से इनकार कर दिया था। गौरतलब है कि यह इस वर्ष ऐसी कई घटनाओं में से एक है जिसमें चीनी कोस्ट गार्ड ने फिलीपीनी जहाज़ों के साथ टकराव की स्थिति बनाई है।
आगे क्या
चीन ने संकेत दिया है कि वह ह्वांगयेन द्वीप और त्याओयु द्वीप के आसपास अपनी गश्त जारी रखेगा। फिलीपींस की ओर से अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दक्षिण चीन सागर में इस प्रकार के टकराव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बने हुए हैं।