27 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शशि थरूर ने जेन-जी प्रोटेस्ट पर भारत के लोकतंत्र की तारीफ की, बोले — 'सिस्टम झुका, टूटा नहीं'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शशि थरूर ने जेन-जी प्रोटेस्ट पर भारत के लोकतंत्र की तारीफ की, बोले — 'सिस्टम झुका, टूटा नहीं'

सारांश

शशि थरूर ने दक्षिण एशिया के छह देशों में जेन-जी आंदोलनों की तुलना करते हुए भारत को अलग बताया — जहाँ सिस्टम ने खुद को सुधारा। बांग्लादेश-श्रीलंका में शासक भागे, म्यांमार में तख्तापलट हुआ, लेकिन भारत का लोकतांत्रिक ढाँचा झुका, टूटा नहीं।

मुख्य बातें

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 27 अगस्त को एनडीटीवी वर्ल्ड अन्विका समिट में भारत के लोकतंत्र की सराहना की।
उन्होंने छह दक्षिण एशियाई देशों — म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और भारत — में जेन-जी आंदोलनों की तुलना की।
बांग्लादेश और श्रीलंका में शासकों को सत्ता छोड़कर भागना पड़ा; म्यांमार में पूर्ण सैन्य अधिग्रहण हुआ।
पाकिस्तान में सेना ने हस्तक्षेप कर, थरूर के अनुसार, एक 'कठपुतली सरकार' स्थापित की।
थरूर ने कहा कि भारत की स्व-सुधार तंत्र वाली लोकतांत्रिक व्यवस्था ने जेन-जी प्रदर्शनकारियों की आवाज़ सुनी और सरकार को जवाब देने पर मजबूर किया।

कांग्रेस सांसद और पूर्व राजनयिक शशि थरूर ने 27 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड अन्विका समिट में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि हालिया जेन-जी विरोध प्रदर्शनों के दबाव में भारतीय सिस्टम झुका, लेकिन टूटा नहीं। उन्होंने दक्षिण एशिया के छह देशों में युवा-नेतृत्व वाले आंदोलनों की तुलना करते हुए भारत को एक अलग और मजबूत उदाहरण बताया।

दक्षिण एशिया में जेन-जी का उभार

थरूर ने बताया कि पिछले एक दशक में छह प्रमुख दक्षिण एशियाई देशों में युवा आबादी ने बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतरकर अपनी आवाज़ बुलंद की। उन्होंने कहा, '2012 में म्यांमार विरोध से शुरू होकर, हमने पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और हाल ही में भारत में युवाओं को सड़कों पर उतरते देखा।' उनके अनुसार, ये सभी आंदोलन अलग-अलग रूपों में जेन-जी के गुस्से और बदलाव की चाहत की अभिव्यक्ति थे।

अलग-अलग देशों में अलग-अलग परिणाम

थरूर ने प्रत्येक देश के अनुभव का विश्लेषण करते हुए बताया कि बांग्लादेश और श्रीलंका में मौजूदा शासक युवा विद्रोह को संभाल नहीं पाए और उन्हें सत्ता छोड़कर भागना पड़ा, जिससे नए नेतृत्व का रास्ता खुला। नेपाल में भी सत्ता परिवर्तन हुआ — नए सिरे से चुनाव हुए और नई सरकार ने कार्यभार संभाला, हालाँकि यह प्रक्रिया श्रीलंका और बांग्लादेश से भिन्न रही।

पाकिस्तान में सेना ने हस्तक्षेप किया और, थरूर के शब्दों में, एक 'कठपुतली सरकार' स्थापित हुई। म्यांमार में स्थिति सबसे गंभीर रही — वहाँ पूर्ण सैन्य अधिग्रहण हुआ।

भारत का स्व-सुधार तंत्र

कांग्रेस सांसद ने तर्क दिया कि भारत इन सभी देशों से इसलिए अलग है क्योंकि यहाँ एक कार्यशील और संस्थागत रूप से मजबूत लोकतांत्रिक ढाँचा मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में एक स्व-सुधार तंत्र है, जिसने यह सुनिश्चित किया कि जेन-जी प्रदर्शनकारियों की आवाज़ सुनी जाए और सरकार उनकी माँगों का जवाब देने के लिए मजबूर हुई।

उन्होंने कहा, 'इन विरोध प्रदर्शनों में अंतर इस बात का है कि इन देशों की राजनीतिक व्यवस्थाओं और राजनीतिक प्रतिष्ठान ने उनसे कैसे निपटा।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब दक्षिण एशिया में लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है।

संस्थागत लचीलेपन का संदेश

थरूर की टिप्पणियों का मूल सार यह था कि भारत की संस्थागत लचीलापन और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं ने इसे बिना ढहे दबाव झेलने में सक्षम बनाया — जो पड़ोसी देशों में देखी गई नाटकीय राजनीतिक उथल-पुथल के बिल्कुल विपरीत है। गौरतलब है कि थरूर स्वयं एक पूर्व राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हैं, जो दक्षिण एशियाई राजनीति पर गहरी समझ रखते हैं।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत में जेन-जी आंदोलन से उठी माँगों पर नीति-निर्माण के स्तर पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें एक महत्वपूर्ण सवाल अनुत्तरित रहता है — क्या 'सुनी गई आवाज़' और 'पूरी हुई माँग' एक ही बात है? भारत में जेन-जी प्रदर्शनकारियों की माँगों पर ठोस नीतिगत बदलाव की सीमा अभी तक स्पष्ट नहीं है। लोकतंत्र का लचीलापन तब सार्थक होता है जब वह केवल उथल-पुथल को टाले नहीं, बल्कि बदलाव भी लाए। यह भी ध्यान देने योग्य है कि थरूर खुद विपक्षी दल के सांसद हैं — उनकी सराहना में सत्ता की आलोचना की परत भी है, जो मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशि थरूर ने जेन-जी प्रोटेस्ट पर क्या कहा?
थरूर ने कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक स्व-सुधार तंत्र है, जिसने जेन-जी प्रदर्शनकारियों की आवाज़ सुनी और सरकार को उनकी माँगों का जवाब देने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सिस्टम झुका, लेकिन टूटा नहीं।
थरूर ने किन देशों की तुलना की?
उन्होंने म्यांमार, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल और भारत — इन छह दक्षिण एशियाई देशों में जेन-जी आंदोलनों और उनके राजनीतिक परिणामों की तुलना की। प्रत्येक देश में आंदोलन के बाद की स्थिति अलग रही।
बांग्लादेश और श्रीलंका में जेन-जी प्रोटेस्ट का क्या नतीजा रहा?
थरूर के अनुसार, बांग्लादेश और श्रीलंका में मौजूदा शासक युवा विद्रोह को संभाल नहीं पाए और उन्हें सत्ता छोड़कर भागना पड़ा, जिससे नए नेतृत्व का रास्ता खुला।
म्यांमार और पाकिस्तान में क्या हुआ?
म्यांमार में पूर्ण सैन्य अधिग्रहण हुआ, जबकि पाकिस्तान में सेना ने हस्तक्षेप किया और थरूर के अनुसार एक 'कठपुतली सरकार' स्थापित हुई। दोनों ही मामलों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया कमज़ोर पड़ी।
थरूर ने यह बयान कहाँ और कब दिया?
यह बयान 27 अगस्त को नई दिल्ली में आयोजित एनडीटीवी वर्ल्ड अन्विका समिट में दिया गया। थरूर ने वहाँ पिछले एक दशक में दक्षिण एशिया में युवा-नेतृत्व वाले आंदोलनों पर विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले