ट्रंप प्रशासन का बड़ा बदलाव: ईरान को सीमित मिसाइलें रखने की मिल सकती है अनुमति
सारांश
मुख्य बातें
ट्रंप प्रशासन ने 21 जून को संकेत दिया कि किसी भावी परमाणु समझौते के तहत ईरान को सीमित संख्या में मिसाइलें रखने की अनुमति दी जा सकती है — जो अमेरिका के पहले के उस कड़े रुख से स्पष्ट पीछे हटना है, जिसमें ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करने की माँग की जाती थी। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक संपर्क नए सिरे से शुरू होने की तैयारी है।
नरम रुख की पृष्ठभूमि
यह बयान एबीसी के कार्यक्रम 'दिस वीक' में अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट की उस टिप्पणी के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का लक्ष्य अब ईरान की समूची मिसाइल क्षमता को नष्ट करना नहीं है। यह उल्लेखनीय है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कह चुके थे कि अमेरिका ईरान की मिसाइलों को नष्ट कर देगा और उसके मिसाइल उद्योग को पूरी तरह मिटा दिया जाएगा।
गौरतलब है कि यह बदलाव खाड़ी क्षेत्र में कई महीनों तक चले सैन्य तनाव के बाद दोनों पक्षों के बीच हुए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) को आगे बढ़ाने की कोशिशों के बीच आया है।
ट्रंप का बदला बयान
ट्रंप ने हाल ही में अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते हुए कहा, 'अगर सऊदी अरब, कतर और दूसरे देशों के पास कुछ मिसाइलें हैं, तो मेरा मानना है कि उसी अनुपात में ईरान के पास भी कुछ होना ठीक है।' यह टिप्पणी उनकी पूर्व घोषणाओं से सीधे उलट है और कूटनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा का विषय बनी है।
अमेरिकी दावे: 90% क्षमता हुई कम
ऊर्जा मंत्री राइट ने दावा किया कि प्रशासन अपने सैन्य उद्देश्यों का बड़ा हिस्सा पहले ही हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा, 'हमने शायद ईरान की मिसाइल बनाने की क्षमता को 90 प्रतिशत तक कम कर दिया है। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है — आप इसे उनके मिसाइल निर्माण उद्योग का लगभग पूरी तरह खत्म हो जाना कह सकते हैं।' हालाँकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राइट ने यह भी कहा कि ईरान दशकों तक अपने अधिकांश पड़ोसी देशों की तुलना में कहीं अधिक हथियारों से लैस रहा था, लेकिन अब उसकी यह ताकत काफी हद तक कम हो चुकी है।
वेंस की वार्ता और आगे की राह
यह संकेत ऐसे समय आए हैं जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरानी अधिकारियों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करने की तैयारी में हैं। दोनों देश एमओयू के आधार पर एक व्यापक समझौते की रूपरेखा तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, मिसाइल मुद्दे पर लचीलापन दिखाना वार्ता की मेज पर ईरान को बनाए रखने के लिए एक कूटनीतिक कदम हो सकता है।