ट्रंप का खुलासा: शी जिनपिंग से मुलाकात में चीन को हथियार बेचने की कोई बात नहीं हुई
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 29 सितंबर 2026 को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्पष्ट किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई बैठक में चीन को अमेरिकी सैन्य उपकरण बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया और न ही इस विषय पर कोई चर्चा हुई। यह बयान तब आया जब एक पत्रकार ने चीन में अमेरिकी राजदूत डेविड परड्यू के फॉक्स न्यूज़ संडे पर दिए गए बयानों का हवाला देते हुए ट्रंप से सवाल किया।
क्या था विवाद का केंद्र
पत्रकार ने ट्रंप से पूछा कि क्या उन्होंने राष्ट्रपति शी को चीन को अमेरिकी सैन्य उपकरण बेचने का सुझाव दिया था — यह सवाल राजदूत परड्यू के टेलीविज़न साक्षात्कार पर आधारित था। ट्रंप ने पहले चौंकते हुए पूछा, 'चीन को?' और जब पत्रकार ने पुष्टि की, तो उन्होंने पलटकर कहा, 'आपका मतलब ताइवान से है?' पत्रकार ने दोहराया कि परड्यू ने चीन का उल्लेख किया था।
इस पर ट्रंप ने कहा, 'मैंने इसके बारे में कभी नहीं सुना। मुझे उनसे पूछना होगा।' उनकी इस प्रतिक्रिया ने राजदूत के बयान और राष्ट्रपति की जानकारी के बीच की खाई को उजागर किया।
ट्रंप के शब्दों में अमेरिकी श्रेष्ठता का भाव
ट्रंप ने यह ज़रूर जोड़ा कि 'वे शायद इसे खरीदना चाहेंगे, क्योंकि हम उनसे बेहतर उपकरण बनाते हैं, इसलिए शायद यह एक अच्छा विचार है, लेकिन हमने इस पर चर्चा नहीं की।' यह टिप्पणी अनौपचारिक थी और किसी नीतिगत प्रस्ताव का संकेत नहीं देती। ट्रंप ने यह भी कहा कि संभव है परड्यू ताइवान के बारे में बात कर रहे हों।
गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच सैन्य उपकरणों की बिक्री न केवल कूटनीतिक रूप से संवेदनशील है, बल्कि मौजूदा अमेरिकी कानूनों के तहत भी अत्यंत जटिल प्रक्रिया है। ऐसे में किसी भी वास्तविक प्रस्ताव की संभावना को विशेषज्ञ बेहद कम मानते हैं।
व्हाइट हाउस कार्यक्रम का व्यापक संदर्भ
यह विवाद उस कार्यक्रम के दौरान उठा जिसमें ट्रंप ने रुइया परिवार से जुड़ी एक कंपनी द्वारा आयोवा में प्रस्तावित स्टील निवेश की घोषणा की। उन्होंने इस मंच का उपयोग अमेरिकी औद्योगिक आत्मनिर्भरता का तर्क देने के लिए किया और विमानों तथा टैंकों के उदाहरण दिए। ट्रंप ने सवाल उठाया कि क्या टैंक निर्माण के लिए स्टील के मामले में वॉशिंगटन चीन पर निर्भर रह सकता है।
इसी संदर्भ में उन्होंने शी के साथ अपनी बैठक को 'सकारात्मक' बताया और अमेरिका-चीन संबंधों को 'अच्छा' करार दिया। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर तनाव बना हुआ है।
राजदूत परड्यू के बयान पर अस्पष्टता
ट्रंप की प्रतिक्रिया से राजदूत डेविड परड्यू के सटीक शब्दों के बारे में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई। ट्रंप ने न तो परड्यू के बयान की पुष्टि की और न ही उसे सिरे से नकारा — उन्होंने केवल यह कहा कि शी के साथ हुई बातचीत में इस विषय पर कोई चर्चा नहीं हुई थी।
बाद में कनाडा के साथ व्यापार पर बातचीत के दौरान ट्रंप ने सैन्य उपकरणों का विषय दोबारा नहीं उठाया और न ही शी के साथ हुई मुलाकात के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी दी।
आगे क्या होगा
इस पूरे प्रसंग ने अमेरिकी प्रशासन के भीतर संचार की स्पष्टता पर सवाल खड़े किए हैं। राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार, राजदूत और राष्ट्रपति के बयानों के बीच यह अंतर अमेरिका-चीन संबंधों की जटिलता और संवेदनशीलता को रेखांकित करता है। व्हाइट हाउस की ओर से परड्यू के बयान पर आधिकारिक स्पष्टीकरण अभी तक नहीं आया है।