ट्रंप का दावा: शी जिनपिंग और पुतिन ने ईरान को हथियार न देने का वचन दिया
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 24 जुलाई 2026 को दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से भरोसा दिलाया है कि वे ईरान को किसी भी परिस्थिति में हथियार नहीं देंगे और न ही बेचेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सशस्त्र संघर्ष लगातार 13वीं रात भी जारी रहा।
ट्रंप ने क्या कहा
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, 'हाल ही में बीजिंग में हुई हमारी मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति शी ने मुझसे कहा कि वे किसी भी हालत में ईरान को हथियार न देंगे और न ही बेचेंगे। उन्होंने साफ कहा कि इसमें चीनी कंपनियाँ भी शामिल हैं। हमारे रिश्ते को देखते हुए मैं उनकी बात पर भरोसा करता हूँ।' ट्रंप ने आगे कहा कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने भी उन्हें यही आश्वासन दिया है। उन्होंने चेतावनी के लहजे में जोड़ा कि अगर इन दोनों देशों ने ऐसा किया, तो 'यह निश्चित रूप से उनके हित में नहीं होगा।'
यूक्रेन को हथियार आपूर्ति पर सफाई
ट्रंप ने यूक्रेन को होने वाली हथियार आपूर्ति पर भी अपना पक्ष स्पष्ट किया। उनका कहना था कि अमेरिका सीधे यूक्रेन को नहीं, बल्कि नाटो सदस्य देशों को हथियार बेचता है, जो उनकी पूरी कीमत चुकाते हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद उन हथियारों का उपयोग या वितरण कैसे होता है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं होती।
अमेरिका-ईरान संघर्ष की स्थिति
संघर्ष विराम समझौता टूटने के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने लगातार 13वीं रात ईरान पर हमले जारी रखे। अमेरिकी सेना के अनुसार, ईस्टर्न टाइम के अनुसार शाम 6:45 बजे शुरू हुए इन हमलों का उद्देश्य इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) द्वारा कमर्शियल शिपिंग को होने वाले खतरों को कम करना था।
ईरान का जवाबी हमला
आईआरजीसी ने भी पलटवार करते हुए कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों और संसाधनों पर जवाबी हमले किए। आईआरजीसी के आधिकारिक समाचार माध्यम सेपा न्यूज के अनुसार, ये हमले अमेरिका की ओर से ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाइयों के जवाब में किए गए। यह ऐसे समय में है जब क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर है और कूटनीतिक समाधान की संभावनाएँ सिकुड़ती दिख रही हैं।
आगे क्या होगा
ट्रंप के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि चीन और रूस दोनों ने सार्वजनिक रूप से इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच इन आश्वासनों की विश्वसनीयता और उनके व्यावहारिक प्रभाव पर कड़ी नज़र रखी जाएगी।