यूएई ने गाजा निरस्त्रीकरण समझौते का किया स्वागत, ट्रंप ने बताया ऐतिहासिक
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने 1 अगस्त को गाजा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण को लेकर बनी सहमति का स्वागत किया और इसे संघर्ष समाप्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की बैठक के बाद इस समझौते की घोषणा की थी।
यूएई की आधिकारिक प्रतिक्रिया
यूएई के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में इस समझौते को 'संघर्ष को समाप्त करने, सुरक्षा एवं स्थिरता को मजबूत करने तथा स्थायी शांति की दिशा में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति' करार दिया। मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि यह समझौता आम नागरिकों की पीड़ा कम करने, हिंसा समाप्त करने और गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अनुकूल माहौल बनाने में सहायक सिद्ध होगा।
समझौते की मुख्य शर्तें
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस समझौते में चरणबद्ध तरीके से हमास और अन्य सशस्त्र समूहों का निरस्त्रीकरण, समानांतर रूप से इजरायली सेना की वापसी, एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल की तैनाती और एक नई फिलिस्तीनी पुलिस बल की स्थापना का प्रावधान शामिल है। समझौते के तहत हमास अपने सभी हथियार एक अंतरराष्ट्रीय स्टेबिलाइजेशन फोर्स को सौंपेगा, जिसमें करीब 5,000 सदस्य होंगे और जिसकी निगरानी एक अमेरिकी जनरल करेंगे।
ट्रंप का दावा और हमास की शर्तें
राष्ट्रपति ट्रंप ने बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में दावा किया कि 'हमास के पूर्ण निशस्त्रीकरण और गाजा पट्टी से इजरायली सेना की चरणबद्ध वापसी को लेकर ऐतिहासिक समझौता हुआ है।' ट्रंप के अनुसार, सभी पक्षों की औपचारिक मंजूरी मिलने के 14 दिनों के भीतर इस समझौते को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हमास ने भी इस समझौते पर सहमति जताई है, हालाँकि उसने इसके लिए इजरायल से कुछ शर्तें पूरी करने की बात कही है।
व्यापक संदर्भ
यह घोषणा अमेरिका की मध्यस्थता में हमास और इजरायल के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के कई महीनों बाद सामने आई है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आई है जब गाजा में मानवीय संकट अपने चरम पर है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थायी समाधान की माँग कर रहा है। यूएई जैसे खाड़ी देशों की सक्रिय प्रतिक्रिया इस समझौते को क्षेत्रीय स्वीकृति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे की राह
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सभी पक्ष औपचारिक मंजूरी देते हैं और 14 दिनों की समयसीमा के भीतर क्रियान्वयन शुरू होता है। हमास द्वारा इजरायल से शर्तें पूरी करने की माँग इस प्रक्रिया में एक अहम परीक्षा साबित होगी।