युगांडा के करामोजा में सूखे से खाद्य संकट: 19 मौतें, 15 लाख प्रभावित; सरकार ने 9,400 टन राहत सामग्री बाँटने का अभियान शुरू किया
सारांश
मुख्य बातें
युगांडा के पूर्वी क्षेत्र करामोजा में भीषण सूखे के कारण उत्पन्न खाद्य संकट ने गंभीर रूप ले लिया है — भूख से 19 लोगों की मौत के बाद युगांडा सरकार ने 27 जुलाई 2026 को बड़े पैमाने पर आपातकालीन खाद्य राहत अभियान शुरू किया। मौसम की अपेक्षित वर्षा न होने से फसलें नष्ट हो गई हैं और इस क्षेत्र की करीब 15 लाख की आबादी गंभीर खाद्य कमी तथा बढ़ते कुपोषण की चपेट में है।
संकट की गहराई
खाद्य सुरक्षा पर नज़र रखने वाले वैश्विक नेटवर्क फेमिन अर्ली वार्निंग सिस्टम्स नेटवर्क (FEWS NET) की रिपोर्ट के अनुसार, करामोजा में स्थिति बिगड़कर 'संकट स्तर' तक पहुँच गई है। जून 2026 में जारी एक पोषण रिपोर्ट में पाया गया कि करामोजा के काबोंग और कोटिडो जिलों की लगभग आधी आबादी संकट की स्थिति में है। स्वास्थ्य केंद्रों के अनुसार, सैकड़ों बच्चों का गंभीर कुपोषण के लिए इलाज किया जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब 2022 में युगांडा के मानवाधिकार आयोग के आँकड़ों के अनुसार, करामोजा में भीषण भूख संकट के कारण 2,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी थी। यह क्षेत्र बार-बार खाद्य असुरक्षा की चपेट में आता रहा है।
सरकार का राहत अभियान
आपदा प्रबंधन और शरणार्थी मामलों के मंत्री सैम एंगोला ने बुधवार को काबोंग जिले के लोडिको उप-काउंटी स्थित एक प्राथमिक विद्यालय से राहत वितरण अभियान की शुरुआत की। सरकार ने अगले दो महीनों में 9,400 टन राहत खाद्य सामग्री वितरित करने की योजना बनाई है। इसके लिए संसद द्वारा मंजूर किए गए 45 अरब शिलिंग (लगभग ₹33 करोड़ 29 लाख) के आपातकालीन कोष से सामग्री खरीदी गई है।
मंत्री एंगोला ने कहा, 'राष्ट्रपति करामोजा में किसी भी व्यक्ति की भूख से मौत की खबर नहीं सुनना चाहते। मैं यहाँ इस खाद्य वितरण की निगरानी के लिए आया हूँ, और यह सुनिश्चित करूँगा कि हर व्यक्ति को भोजन मिले। कोई भी पीछे नहीं छूटेगा।'
विदेशी सहायता में कटौती का असर
युगांडा के फूड राइट्स अलायंस (FRA) की कार्यकारी निदेशक एग्नेस किराबो ने कहा कि सरकार का राहत वितरण अभियान अब एक अनिवार्यता बन गया है, क्योंकि मानवीय सहायता का पूरा परिदृश्य तेज़ी से बदल गया है। उन्होंने विशेष रूप से USAID जैसी संस्थाओं से मिलने वाली सहायता में भारी कटौती का उल्लेख किया, जिसके कारण विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) जैसी एजेंसियों को अपने राहत कार्यों में बड़ी कमी करनी पड़ी है।
गौरतलब है कि युगांडा में WFP ने शरणार्थी आबादी के 63 प्रतिशत लोगों के लिए खाद्य सहायता बंद कर दी है, जिससे 10 लाख से अधिक लोग सहायता से वंचित हो गए हैं। सहायता पाने वालों की संख्या घटाकर केवल 6.63 लाख कर दी गई है।
दीर्घकालिक समाधान की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि करामोजा में बार-बार उत्पन्न होने वाली खाद्य असुरक्षा के पीछे जलवायु संकट, वनों की कटाई, गरीबी और कम कृषि उत्पादन जैसी संरचनात्मक समस्याएँ ज़िम्मेदार हैं। करामोजा मामलों के मंत्री जॉन बैपटिस्ट लोकी ने कहा, 'सरकार अगली बुवाई के मौसम से पहले सूखा सहने वाली, रोग प्रतिरोधी और जल्दी तैयार होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध कराएगी।' सरकार ने हाल ही में मंजूर की गई करामोजा क्षेत्रीय विकास योजना के ज़रिए समुदायों को सूखे जैसी परिस्थितियों से निपटने में सक्षम बनाने का संकल्प लिया है।