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WMO की चेतावनी: 2026–2030 में तापमान 1.5°C सीमा पार करने की 75% संभावना, 2027 में नया रिकॉर्ड खतरे में

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WMO की चेतावनी: 2026–2030 में तापमान 1.5°C सीमा पार करने की 75% संभावना, 2027 में नया रिकॉर्ड खतरे में

सारांश

WMO की नई रिपोर्ट सिर्फ आँकड़े नहीं — एक काउंटडाउन है। 2026–2030 के बीच 75% संभावना है कि पेरिस समझौते की 1.5°C सीमा टूटेगी, और 2026 के अंत में अल नीनो की वापसी 2027 को अब तक का सबसे गर्म वर्ष बना सकती है।

मुख्य बातें

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार 2026–2030 में वैश्विक तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.3–1.9°C अधिक रह सकता है।
75% संभावना है कि इन पाँच वर्षों का औसत तापमान 1.5°C की पेरिस समझौते की सीमा पार करेगा।
91% संभावना है कि 2026–2030 में कम से कम एक वर्ष अस्थायी रूप से 1.5°C से ऊपर जाएगा।
2026 के अंत में अल नीनो बनने की संभावना, जिससे 2027 में नया तापमान रिकॉर्ड टूट सकता है।
2015 के बाद से अब तक के सभी 11 सबसे गर्म वर्ष दर्ज हो चुके हैं।
आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत से कई गुना अधिक गर्म होने की आशंका।

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर (1850–1900) से 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, इन पाँच वर्षों का औसत तापमान पेरिस जलवायु समझौते की महत्वपूर्ण 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार करने की लगभग 75 प्रतिशत संभावना है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब 2015 के बाद से अब तक के सभी 11 सबसे गर्म वर्ष दर्ज किए जा चुके हैं।

रिपोर्ट के मुख्य अनुमान

WMO के आँकड़ों के अनुसार, 91 प्रतिशत संभावना है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक वर्ष ऐसा होगा जब तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाएगा। एजेंसी ने यह भी अनुमान लगाया है कि 2031 से पहले एक नया सर्वाधिक गर्म वर्ष दर्ज हो सकता है।

रिपोर्ट में विशेष रूप से आर्कटिक क्षेत्र के बारे में आगाह किया गया है, जो वैश्विक औसत से कई गुना अधिक गर्म हो सकता है। इसके साथ ही दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और सूखे के पैटर्न में बड़ा बदलाव आने की आशंका जताई गई है।

अल नीनो का खतरा

WMO की रिपोर्ट में बताया गया है कि 2026 के अंत में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे 2027 में नया तापमान रिकॉर्ड बनने का खतरा और बढ़ सकता है। गौरतलब है कि अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के तापमान और वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करती है। इसी घटना ने 2023 और 2024 को रिकॉर्ड गर्म वर्षों में बदलने में अहम भूमिका निभाई थी।

पेरिस समझौते पर दबाव

विशेषज्ञों का कहना है कि पेरिस जलवायु समझौते के तहत तय 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। हालाँकि, अस्थायी रूप से इस सीमा का उल्लंघन और स्थायी उल्लंघन में अंतर होता है — फिर भी विशेषज्ञ इसे एक गंभीर संकेत मानते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा नीतियों और उत्सर्जन कटौती पर अंतरराष्ट्रीय सहमति अभी भी अधूरी है।

वैश्विक और भारतीय संदर्भ

भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों के लिए यह रिपोर्ट विशेष रूप से चिंताजनक है, जहाँ पहले से ही लू, अनियमित मानसून और बाढ़ की घटनाएँ बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन की यह गति ऊर्जा नीति, कृषि और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक दबाव डालेगी।

WMO की यह रिपोर्ट वैश्विक नेताओं और नीति-निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि जलवायु कार्रवाई में और देरी भविष्य की पीढ़ियों के लिए बड़ी कीमत चुकाने का कारण बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन '1.5°C का अस्थायी उल्लंघन' और 'स्थायी उल्लंघन' के बीच की बारीक रेखा अक्सर सार्वजनिक चर्चा में धुंधली हो जाती है — जिससे या तो अनावश्यक घबराहट फैलती है या खतरे को कम करके आँका जाता है। असली सवाल यह है कि क्या वैश्विक नेता इन अनुमानों को नीतिगत आपात-कार्रवाई में बदल पाएँगे, या ये भी पिछले जलवायु सम्मेलनों की तरह 'चिंता व्यक्त करने' तक सीमित रहेंगे। भारत के लिए, जहाँ करोड़ों लोग कृषि और मौसम-निर्भर आजीविका पर टिके हैं, यह रिपोर्ट केवल वैज्ञानिक दस्तावेज़ नहीं — एक नीतिगत अलार्म है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

WMO की जलवायु रिपोर्ट 2025 में क्या कहा गया है?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 से 2030 के बीच वैश्विक औसत तापमान पूर्व-औद्योगिक स्तर से 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। इन पाँच वर्षों का औसत तापमान 1.5°C की पेरिस समझौते की सीमा पार करने की 75% संभावना बताई गई है।
1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा क्यों महत्वपूर्ण है?
पेरिस जलवायु समझौते के तहत 195 देशों ने वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था, ताकि गंभीर जलवायु प्रभावों — जैसे चरम मौसम, समुद्र स्तर वृद्धि और पारिस्थितिकी तंत्र के नुकसान — को रोका जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार इस सीमा का लगातार उल्लंघन अपरिवर्तनीय क्षति का संकेत होगा।
अल नीनो 2027 के तापमान को कैसे प्रभावित कर सकता है?
WMO की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के अंत में अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना है। अल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान को बढ़ाता है और वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित करता है — इसी कारण 2023 और 2024 रिकॉर्ड गर्म वर्ष बने थे, और 2027 में इसकी पुनरावृत्ति का खतरा है।
आर्कटिक क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन का क्या असर होगा?
WMO की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आर्कटिक क्षेत्र वैश्विक औसत से कई गुना अधिक गर्म हो सकता है। इससे ध्रुवीय बर्फ का पिघलना तेज होगा, जो समुद्र के स्तर में वृद्धि और वैश्विक मौसम पैटर्न में बड़े बदलाव का कारण बनेगा।
भारत पर इस जलवायु चेतावनी का क्या प्रभाव पड़ सकता है?
भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देशों में तापमान वृद्धि से लू, अनियमित मानसून और बाढ़ की घटनाएँ और तीव्र हो सकती हैं। कृषि, जल संसाधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक दबाव बढ़ेगा, जिससे ऊर्जा नीति और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों की तत्काल समीक्षा ज़रूरी हो जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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