संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील: नस्लवाद मिटाने के लिए विश्व को एकजुट होना चाहिए
सारांश
Key Takeaways
- एकता और ठोस कार्रवाई नस्लवाद का समाधान है।
- सोशल मीडिया पर नफरत तेजी से फैल रही है।
- हर व्यक्ति को मानवाधिकार मिलना चाहिए।
- ‘डरबन घोषणा’ नस्लवाद के खिलाफ ठोस कदम सुझाती है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1966 में इस दिवस की शुरुआत की।
संयुक्त राष्ट्र, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते नस्लवाद पर चिंता व्यक्त की है और इसे समाप्त करने के लिए सभी देशों से एकजुट होकर कार्य करने की अपील की है। उन्होंने बताया कि नस्लवाद एक पुरानी समस्या है, जो आज भी प्रत्येक समाज, देश और क्षेत्र में व्याप्त है।
हर वर्ष 21 मार्च को मनाए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस’ के अवसर पर, गुटेरेस ने कहा कि नस्लवाद की जड़ें उपनिवेशवाद, गुलामी और दमन के इतिहास में हैं। इसीलिए आज भी दुनिया में आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक असमानता, भेदभावपूर्ण नीतियां और विभिन्न संघर्ष देखने को मिलते हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि आज के डिजिटल युग में, नफरत तेजी से फैल रही है। सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर नफरत भरी भाषा, गलत सूचनाएं और पूर्वाग्रह फैलते हैं, जो कई बार वास्तविक हिंसा और दुर्व्यवहार का कारण बनते हैं।
गुटेरेस ने कहा कि इसका सबसे प्रभावी समाधान एकता और ठोस कार्यवाही है। उन्होंने सभी सरकारों, संस्थाओं, कंपनियों और समाज के सभी वर्गों से मिलकर कार्य करने की अपील की, ताकि प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, न्याय, समानता और मानवाधिकार मिल सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि सभी देशों को नस्लीय भेदभाव समाप्त करने से संबंधित अंतरराष्ट्रीय समझौतों को पूर्ण रूप से लागू करना चाहिए और ‘डरबन घोषणा और कार्य योजना’ के सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। यह योजना नस्लवाद के खिलाफ ठोस कदम उठाने का मार्गदर्शन करती है। अब इसे 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
गुटेरेस ने अंत में कहा कि हमें हर दिन नस्लवाद के खिलाफ खड़ा होना होगा। हमें विश्व के प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा करनी है और इस बुराई को जड़ से समाप्त करना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1966 में इस दिवस की शुरुआत की थी, ताकि नस्लीय भेदभाव के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई जा सके और वैश्विक स्तर पर इसके खिलाफ कार्रवाई को प्रोत्साहित किया जा सके।