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यूनामा रिपोर्ट: अप्रैल-जून में पाकिस्तानी हमलों से 57 अफगान नागरिक मारे गए, 342 घायल

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यूनामा रिपोर्ट: अप्रैल-जून में पाकिस्तानी हमलों से 57 अफगान नागरिक मारे गए, 342 घायल

सारांश

यूनामा ने तीन महीनों के भीतर अफगानिस्तान में 57 नागरिकों की मौत और 342 के घायल होने की पुष्टि की है — और इन सभी हताहतों के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया है। पीड़ितों में 112 बच्चे और 40 महिलाएं शामिल हैं। ह्यूमन राइट्स वॉच ने संभावित युद्ध अपराधों की स्वतंत्र जांच की माँग की है।

मुख्य बातें

यूनामा ने 1 अप्रैल से 30 जून 2026 के बीच अफगानिस्तान में सीमा पार हिंसा में 57 नागरिकों की मौत और 342 के घायल होने की पुष्टि की।
रिपोर्ट के अनुसार, इस अवधि के सभी नागरिक हताहतों के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल जिम्मेदार थे।
हताहतों में 112 बच्चे (26 मृत, 86 घायल) और 40 महिलाएं (6 मृत, 34 घायल) शामिल।
सबसे बड़ा हमला 28 जून को पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी हवाई हमलों में हुआ।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने 15 जुलाई को संभावित युद्ध अपराधों की निष्पक्ष जांच की माँग की।

संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन इन अफगानिस्तान (यूनामा) ने 28 जुलाई को जारी अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि 1 अप्रैल से 30 जून 2026 के बीच अफगानिस्तान में सीमा पार सशस्त्र हिंसा में 57 नागरिकों की मौत हुई और 342 लोग घायल हुए। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस अवधि में दर्ज सभी नागरिक हताहतों के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बल जिम्मेदार थे।

हमलों का विवरण और सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्र

यूनामा के अनुसार, हवाई हमले और जमीनी गोलीबारी नागरिक हताहतों की सबसे बड़ी वजह रहे। सबसे भीषण नुकसान 28 जून को हुआ, जब पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के हवाई हमलों में बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए। इसके अलावा 27 से 29 अप्रैल के बीच कुनार प्रांत में हुई गोलाबारी में भी कई लोग प्रभावित हुए।

बच्चे और महिलाएं सर्वाधिक प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, हताहतों में 112 बच्चे शामिल थे — जिनमें 26 की मौत हुई और 86 घायल हुए। इसके साथ ही 40 महिलाएं भी प्रभावित हुईं, जिनमें 6 की मृत्यु हुई और 34 घायल हुईं। ये आँकड़े इस संघर्ष के मानवीय संकट की गंभीरता को उजागर करते हैं।

मानवाधिकार संगठन की जांच की मांग

15 जुलाई को अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने पाकिस्तान के हालिया हमलों के संदर्भ में संभावित युद्ध अपराधों की निष्पक्ष जांच की माँग की। संगठन ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की मौत मात्र से युद्ध कानूनों का उल्लंघन सिद्ध नहीं होता, लेकिन ये मौतें स्वतंत्र जांच की अनिवार्यता को रेखांकित करती हैं।

HRW ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का हवाला देते हुए कहा, 'लड़ाई में शामिल सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे आम लोगों को कम से कम नुकसान पहुँचे, इसके लिए हर संभव सावधानी बरतें। हमला करने वाले पक्ष को हमेशा यह स्पष्ट पहचान करनी चाहिए कि कौन आम नागरिक हैं और कौन लड़ाके — हमला सिर्फ सैन्य ठिकानों पर होना चाहिए।'

पाक-अफगान तनाव की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ा है। दोनों देशों के बीच कई बार गोलीबारी हो चुकी है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता गहरी हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान पहले से ही मानवीय संकट से जूझ रहा है।

आगे क्या होगा

HRW ने यह भी रेखांकित किया कि बचाव करने वाले पक्ष की भी जिम्मेदारी है कि वह अपने नियंत्रण वाले इलाकों में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और सैन्य ठिकानों को घनी आबादी से दूर रखे। संगठन ने स्पष्ट किया कि एक पक्ष के नियम उल्लंघन से दूसरे पक्ष की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस पर हैं कि क्या कोई स्वतंत्र जांच तंत्र स्थापित होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें बच्चे और महिलाएं असंगत रूप से निशाना बन रहे हैं। ध्यान देने योग्य है कि यह जवाबदेही संयुक्त राष्ट्र की ओर से आई है, न कि किसी पक्षपाती स्रोत से — जो पाकिस्तान के लिए कूटनीतिक दबाव को और तीव्र करती है। HRW की जांच की माँग सही दिशा में है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय — विशेषकर वे देश जो पाकिस्तान को सहायता देते हैं — इन रिपोर्टों को महज दर्ज करेंगे या जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूनामा की रिपोर्ट में अफगानिस्तान में कितने नागरिक हताहत हुए?
यूनामा के अनुसार, 1 अप्रैल से 30 जून 2026 के बीच सीमा पार हिंसा में 57 अफगान नागरिकों की मौत हुई और 342 घायल हुए। रिपोर्ट में इन सभी हताहतों के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
पाकिस्तान के किन हमलों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ?
सबसे अधिक नागरिक हताहत 28 जून को पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के हवाई हमलों में हुए। इसके अलावा 27 से 29 अप्रैल के बीच कुनार प्रांत में हुई गोलाबारी में भी कई लोग प्रभावित हुए।
क्या इन हमलों में बच्चे और महिलाएं भी प्रभावित हुईं?
हाँ, यूनामा की रिपोर्ट के अनुसार हताहतों में 112 बच्चे शामिल थे जिनमें 26 की मौत हुई और 86 घायल हुए। इसके साथ 40 महिलाएं भी प्रभावित हुईं, जिनमें 6 की मृत्यु हुई और 34 घायल हुईं।
ह्यूमन राइट्स वॉच ने क्या माँग की है?
ह्यूमन राइट्स वॉच ने 15 जुलाई को पाकिस्तान के हमलों के संदर्भ में संभावित युद्ध अपराधों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की माँग की। संगठन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत हमला करने वाले और बचाव करने वाले दोनों पक्षों की जिम्मेदारी है कि नागरिकों को कम से कम नुकसान हो।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की क्या पृष्ठभूमि है?
पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव लगातार बढ़ा है और कई बार गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता गहरी हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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