24 जुलाई 2026
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सूडान गृहयुद्ध: अमेरिका समेत 10 देशों-संगठनों ने नागरिक नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन किया

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सूडान गृहयुद्ध: अमेरिका समेत 10 देशों-संगठनों ने नागरिक नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन किया

सारांश

अमेरिका और दस से अधिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने अदीस अबाबा बैठक के बाद स्पष्ट संदेश दिया — सूडान का संकट सैन्य बल से नहीं, नागरिक नेतृत्व वाले संवाद से सुलझेगा। छह महीने में संक्रमण पूरा करने का लक्ष्य और प्रक्रिया विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी इस बयान को महज कूटनीतिक औपचारिकता से अलग करती है।

मुख्य बातें

अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, अफ्रीकी संघ, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने 8 जून 2026 को सूडान में नागरिक नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन किया।
संयुक्त बयान में कहा गया कि सूडान संकट का 'कोई सैन्य समाधान नहीं' — केवल समावेशी नागरिक संवाद से स्थिरता संभव।
बयान 3 से 5 जून के बीच अदीस अबाबा में हुई बहुपक्षीय बैठक के बाद जारी; 'क्विंटेट' समूह ने सूडानी राजनीतिक पक्षों से चर्चा की।
नागरिक संवाद प्रक्रिया आदर्श रूप से छह महीने में पूरी होने की उम्मीद; राजनीतिक दल, महिला संगठन, युवा समूह शामिल होंगे।
15 अप्रैल के बर्लिन सम्मेलन में अपनाए गए 'बर्लिन प्रिंसिपल्स फॉर सूडान' का स्वागत; प्रक्रिया विरोधियों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की चेतावनी।

अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, अफ्रीकी संघ, यूरोपीय संघ, संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय साझेदारों ने 8 जून 2026 को एक संयुक्त बयान जारी कर सूडान में नागरिकों के नेतृत्व में राजनीतिक संवाद शुरू करने का समर्थन किया। इन देशों और संगठनों का स्पष्ट मत है कि सूडान के विनाशकारी गृहयुद्ध का कोई सैन्य समाधान नहीं है और केवल समावेशी नागरिक नेतृत्व वाली सत्ता परिवर्तन प्रक्रिया ही स्थायी स्थिरता बहाल कर सकती है। यह बयान 3 से 5 जून के बीच इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में हुई बहुपक्षीय बैठक के बाद सामने आया।

अदीस अबाबा बैठक: मुख्य घटनाक्रम

इस बैठक में 'क्विंटेट' समूह के सदस्य — अफ्रीकी संघ, इंटरगवर्नमेंटल अथॉरिटी ऑन डेवलपमेंट (IGAD), लीग ऑफ़ अरब स्टेट्स, यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र — शामिल हुए। इन संगठनों ने सूडान के विभिन्न राजनीतिक पक्षों के साथ विस्तृत चर्चा की। संयुक्त बयान में सभी पक्षों ने सूडान के लिए 'शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और स्थिर भविष्य' के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और देश की संप्रभुता, एकता तथा क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने पर जोर दिया।

मानवीय संकट की गंभीर तस्वीर

संयुक्त बयान में सूडान की बिगड़ती मानवीय स्थिति पर गहरी चिंता जताई गई। जारी संघर्ष के कारण लाखों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं, गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं और बुनियादी सेवाओं तक उनकी पहुँच सीमित हो गई है। नागरिकों और बुनियादी ढाँचे पर हमले लगातार जारी हैं। बयान में कहा गया कि नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए और तत्काल मानवीय युद्धविराम लागू कर स्थायी संघर्षविराम की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए।

बर्लिन सम्मेलन के निष्कर्षों का स्वागत

समूह ने 15 अप्रैल को आयोजित सूडान पर बर्लिन सम्मेलन के निष्कर्षों का स्वागत किया। उस सम्मेलन में 'बर्लिन प्रिंसिपल्स फॉर सूडान' को अपनाया गया था, जिसमें नागरिक संगठनों ने युद्ध समाप्त करने और सूडानी नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की माँग की थी। बयान के अनुसार इन पहलों से अंतरराष्ट्रीय समन्वय मजबूत हुआ है।

नागरिक संवाद की रूपरेखा और समयसीमा

सभी साझेदारों ने अगले कुछ सप्ताह में व्यापक नागरिक नेतृत्व वाले संवाद की शुरुआत की योजना का समर्थन किया। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों के अलावा नागरिक समाज, महिला संगठनों, युवा समूहों और सूडान के विभिन्न क्षेत्रों तथा समुदायों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। बयान में उम्मीद जताई गई कि यह प्रक्रिया आदर्श रूप से छह महीने के भीतर पूरी हो सकती है, जिससे एक स्वतंत्र, नागरिक नेतृत्व वाली सरकार के गठन का स्पष्ट रास्ता तैयार होगा।

चेतावनी और आगे की राह

संयुक्त बयान में यह चेतावनी भी दी गई कि जो पक्ष नागरिक सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास करेंगे, उनके विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय उचित कदम उठा सकता है। बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि नागरिक संवाद पारदर्शी, विश्वसनीय और किसी भी प्रकार के दबाव से मुक्त होना चाहिए। प्रस्तावित संक्रमण प्रक्रिया की प्रगति का आकलन तय मानकों के आधार पर किया जाएगा, और वैधता, जवाबदेही तथा मानवाधिकारों के सम्मान पर आधारित सरकार का गठन ही सूडान में स्थायी शांति की आधारशिला बताया गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की होगी — सूडान में इससे पहले भी कई युद्धविराम और संवाद प्रक्रियाएँ शुरू होकर बिखर चुकी हैं। 'छह महीने में संक्रमण' का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, जबकि जमीन पर सशस्त्र गुटों का नियंत्रण और मानवीय संकट दोनों गहरे हैं। प्रक्रिया विरोधियों के खिलाफ 'उचित कदम' की चेतावनी तब तक अर्थहीन है जब तक उसे ठोस प्रतिबंधों या जवाबदेही तंत्र से नहीं जोड़ा जाता। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकजुटता दिखती है, पर सूडान के भीतर नागरिक समाज की वास्तविक क्षमता और सशस्त्र पक्षों की सहमति के बिना यह प्रक्रिया कागज पर ही रह सकती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सूडान संकट पर अदीस अबाबा बैठक में क्या निर्णय हुआ?
3 से 5 जून 2026 के बीच अदीस अबाबा में हुई बहुपक्षीय बैठक के बाद अमेरिका समेत प्रमुख देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर सूडान में नागरिक नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया का समर्थन किया। बयान में कहा गया कि सूडान संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं है।
सूडान में प्रस्तावित नागरिक संवाद प्रक्रिया में कौन शामिल होगा?
प्रस्तावित संवाद में राजनीतिक दलों के अलावा नागरिक समाज, महिला संगठन, युवा समूह और सूडान के विभिन्न क्षेत्रों तथा समुदायों के प्रतिनिधि शामिल किए जाएँगे। यह प्रक्रिया पारदर्शी और किसी भी दबाव से मुक्त होनी चाहिए, ऐसा बयान में कहा गया।
सूडान संकट समाधान के लिए कितना समय तय किया गया है?
संयुक्त बयान में उम्मीद जताई गई कि नागरिक नेतृत्व वाली संक्रमण प्रक्रिया आदर्श रूप से छह महीने के भीतर पूरी हो सकती है। इससे एक स्वतंत्र, नागरिक नेतृत्व वाली सरकार के गठन का रास्ता तैयार होगा जो वैधता, जवाबदेही और मानवाधिकारों पर आधारित होगी।
'बर्लिन प्रिंसिपल्स फॉर सूडान' क्या हैं?
15 अप्रैल को बर्लिन में आयोजित सूडान सम्मेलन में 'बर्लिन प्रिंसिपल्स फॉर सूडान' को अपनाया गया था। इसमें नागरिक संगठनों ने युद्ध समाप्त करने और सूडानी नेतृत्व वाली राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करने की माँग रखी थी, जिसे अदीस अबाबा बैठक में भी समर्थन मिला।
प्रक्रिया विरोधियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
संयुक्त बयान में चेतावनी दी गई कि जो पक्ष नागरिक सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया को कमजोर करने का प्रयास करेंगे, उनके विरुद्ध अंतरराष्ट्रीय समुदाय उचित कदम उठा सकता है। हालाँकि बयान में इन कदमों का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया गया।
राष्ट्र प्रेस
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