सूडान में अकाल का संकट: 1.95 करोड़ लोग खाद्य असुरक्षा में, अमेरिका और सहयोगी देशों ने जारी की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय आयोग सहित कई देशों ने सूडान में अकाल के गहराते खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए एक संयुक्त चेतावनी जारी की है। अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा आकलन के आंकड़ों के अनुसार, सूडान की 41 प्रतिशत आबादी यानी लगभग 1.95 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा की चपेट में हैं। सभी साझेदार देशों ने युद्धरत पक्षों से मानवीय सहायता के मार्ग को तत्काल खोलने की माँग की है।
संकट का पैमाना और आंकड़े
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा 23 अक्टूबर को जारी किए गए इस संयुक्त बयान में बताया गया कि 50 लाख लोग पहले से ही आपातकालीन खाद्य संकट में जी रहे हैं। सरकारों ने चेतावनी दी कि अगर आने वाले महीनों में स्थिति नहीं सुधरी, तो गंभीर कुपोषण से पीड़ित बच्चों की संख्या अनुमानित 8,25,000 के आँकड़े को भी पार कर सकती है। इसके साथ ही, गंभीर खाद्य असुरक्षा वाले इलाकों की संख्या, जिसका प्रारंभिक अनुमान 14 था, दोगुनी हो सकती है।
संघर्ष और प्राकृतिक आपदा — दोहरी मार
बयान में अप्रैल 2023 से जारी सशस्त्र संघर्ष को सूडान के खाद्य संकट का मुख्य कारण बताया गया है। इस लड़ाई ने देश के बड़े हिस्सों को तबाह कर दिया है — आवश्यक बुनियादी ढाँचा नष्ट हुआ है, स्वास्थ्य सेवाएँ चरमरा गई हैं, कृषि उत्पादन बाधित हुआ है और स्थानीय खाद्य वितरण नेटवर्क टूट गए हैं। इसके अतिरिक्त, 'अल नीनो' के प्रभाव से देश के आधे से अधिक हिस्से में सामान्य से कम वर्षा हुई है, जिससे सूखे जैसे हालात बन गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मानवीय सहायता पर पहले से ही कड़ी पाबंदियाँ लागू हैं।
दारफुर पर विशेष ध्यान
साझेदार देशों ने विशेष रूप से दारफुर क्षेत्र तक हवाई पहुँच की माँग की है, जहाँ असुरक्षा और लॉजिस्टिक पाबंदियों के कारण राहत कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। गौरतलब है कि दारफुर वर्षों से हिंसा, विस्थापन और मानवाधिकार उल्लंघन का केंद्र रहा है। बयान में कहा गया कि हवाई पहुँच मिलने से राहत संगठन न केवल आपातकालीन सामग्री तेज़ी से पहुँचा सकेंगे, बल्कि घायल सहायता कर्मियों को भी सुरक्षित बाहर निकाल सकेंगे।
प्रशासनिक बाधाएँ और माँगें
संयुक्त बयान में उन प्रशासनिक अड़चनों को हटाने का आग्रह किया गया है जो राहत कार्यों में देरी का कारण बनती हैं — इनमें लंबी वीज़ा प्रक्रियाएँ, कस्टम क्लीयरेंस में देरी, अतिरिक्त यात्रा परमिट और कर संबंधी आवश्यकताएँ शामिल हैं। सरकारों ने वीज़ा वैधता बढ़ाने और यात्रा अनुमतियों को सरल बनाने की भी माँग की। सशस्त्र समूहों से विशेष रूप से अपील की गई कि वे कृषि केंद्रों और खाद्य उत्पादन प्रणालियों पर हमले बंद करें।
आगे की राह और वित्तीय अपील
साझेदार सरकारों ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता निधि में तत्काल वृद्धि की माँग की है और विकास बैंकों व वित्तीय संस्थानों से आग्रह किया है कि वे बिगड़ती खाद्य सुरक्षा स्थिति से निपटने के लिए अपने कार्यक्रमों में बदलाव लाएँ। सर्दियों की फसल के मौसम को समर्थन देने पर विशेष ज़ोर दिया गया, जिससे कृषि उत्पादन को पुनर्जीवित किया जा सके और आपातकालीन खाद्य सहायता पर निर्भरता घटाई जा सके। बयान में सीधे शब्दों में कहा गया — 'लोगों की जान बचाने और अकाल रोकने के लिए अब एक पल भी बर्बाद करने का समय नहीं है।' अगर युद्धरत पक्षों ने मानवीय मार्ग नहीं खोले, तो सूडान दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकटों में से एक बन सकता है।