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अमेरिकी सेना का एंटी-ड्रोन प्लान: हाई-एनर्जी लेजर और माइक्रोवेव हथियारों का 365 दिन का परीक्षण

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अमेरिकी सेना का एंटी-ड्रोन प्लान: हाई-एनर्जी लेजर और माइक्रोवेव हथियारों का 365 दिन का परीक्षण

सारांश

अमेरिकी सेना का नया दांव — लेजर और माइक्रोवेव से ड्रोन ध्वस्त करना। ब्रिगेडियर जनरल मैट रॉस की अगुवाई में 365 दिन का परिचालन परीक्षण होगा, जो यह तय करेगा कि ये डायरेक्टेड-एनर्जी हथियार वास्तविक सैन्य अभियानों में पारंपरिक तकनीकों की जगह ले सकते हैं या नहीं।

मुख्य बातें

अमेरिकी सेना ने हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव हथियारों का 365 दिन का परिचालन परीक्षण करने की योजना बनाई है।
जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401 के निदेशक ब्रिगेडियर जनरल मैट रॉस इस पायलट परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षणों में दोनों तकनीकें ड्रोन को नष्ट या निष्क्रिय करने में सफल साबित हुई हैं।
लेजर सिस्टम एक समय में एक लक्ष्य को, जबकि माइक्रोवेव सिस्टम एक साथ कई ड्रोन को निष्क्रिय कर सकता है।
परीक्षण में बिजली खपत, रखरखाव लागत, उपलब्धता और संचालन खर्च का भी आकलन किया जाएगा।
यूक्रेन संघर्ष में सस्ते ड्रोन के बढ़ते उपयोग ने वैश्विक स्तर पर एंटी-ड्रोन तकनीकों की माँग को तेज़ किया है।

अमेरिकी सेना ने दुश्मन ड्रोन को मार गिराने के लिए हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव तकनीकों का एक वर्षीय परिचालन परीक्षण शुरू करने की योजना बनाई है। जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401 के निदेशक ब्रिगेडियर जनरल मैट रॉस ने बताया कि इन डायरेक्टेड-एनर्जी प्रणालियों को एक सैन्य ठिकाने पर स्थापित किया जाएगा, जहाँ सैनिक स्वयं इन्हें 365 दिनों तक संचालित और रखरखाव करेंगे। यह परीक्षण यूक्रेन जैसे संघर्षों में सस्ते ड्रोन के बढ़ते खतरे के बीच अमेरिका की रणनीतिक तैयारी का हिस्सा है।

परीक्षण का उद्देश्य और दायरा

इस पायलट परियोजना का मुख्य लक्ष्य यह जाँचना है कि क्या इन डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों को किसी सैन्य ठिकाने के सामान्य कामकाज में बाधा डाले बिना या आसपास के हवाई क्षेत्र को प्रभावित किए बिना भरोसेमंद तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। ब्रिगेडियर जनरल रॉस ने कहा, 'यह एक डायरेक्टेड-एनर्जी पायलट प्रोजेक्ट है।'

परीक्षण के दौरान इन बिंदुओं का मूल्यांकन किया जाएगा: बिजली की आवश्यकता, रखरखाव की लागत, संचालन खर्च, वार्षिक उपलब्धता के दिन और विशेषज्ञ तकनीशियनों की आवश्यकता की आवृत्ति।

दोनों तकनीकों की क्षमता

प्रारंभिक परीक्षणों में यह सिद्ध हो चुका है कि हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव — दोनों तकनीकें ड्रोन को नष्ट या निष्क्रिय करने में सक्षम हैं। तकनीकी अंतर भी महत्त्वपूर्ण है: लेजर सिस्टम एक समय में एक लक्ष्य को निशाना बना सकता है, जबकि हाई-पावर माइक्रोवेव एक साथ कई ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बाधित या निष्क्रिय करने में सक्षम है।

रॉस के अनुसार, 'हमारे पास कई सिस्टम हैं और हमने साबित कर दिया है कि यह तकनीक काम करती है। अब हमें यह समझना है कि इन्हें वास्तविक सैन्य अभियानों में सफलतापूर्वक कैसे इस्तेमाल किया जाए।'

हवाई क्षेत्र और सुरक्षा की चुनौती

सेना के लिए एक अहम चुनौती यह है कि इन हथियारों के उपयोग के दौरान सैन्य ठिकाने के आसपास सामान्य हवाई यातायात बाधित न हो। रॉस ने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि इन प्रणालियों के संचालन के दौरान हवाई क्षेत्र को बंद करना पड़े। इसके लिए विशेष रणनीतियाँ और प्रक्रियाएँ विकसित करनी होंगी।

ड्रोन खतरे का व्यापक संदर्भ

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के अधिकारी स्टीव विलॉबी ने कहा कि ड्रोन अब सार्वजनिक सुरक्षा और सरकारी एजेंसियों के लिए अत्यंत उपयोगी उपकरण बन चुके हैं, किंतु उनका दुरुपयोग भी संभव है। उन्होंने कहा, 'ड्रोन लोगों की सुरक्षा करते हैं, संपत्तियों की रक्षा करते हैं, जान बचाने में मदद करते हैं और कम संसाधनों में अधिक काम करने की सुविधा देते हैं।' साथ ही उन्होंने जोड़ा कि चुनौती यह है कि ड्रोन के अच्छे उपयोग को बढ़ावा दिया जाए और गलत इस्तेमाल को रोका जाए।

गौरतलब है कि यूक्रेन संघर्ष और अन्य युद्ध क्षेत्रों में अपेक्षाकृत सस्ते मानव-रहित विमानों के बढ़ते उपयोग ने दुनिया भर में एंटी-ड्रोन तकनीकों में रुचि को तेज़ी से बढ़ाया है। इस परीक्षण से मिले आँकड़ों के आधार पर सेना यह तुलना कर सकेगी कि पारंपरिक एंटी-ड्रोन तकनीकों की तुलना में डायरेक्टेड-एनर्जी सिस्टम कितने प्रभावी और किफायती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो यूक्रेन में सस्ते ड्रोन की विध्वंसकारी भूमिका देखने के बाद ज़रूरी हो गई। असली सवाल यह नहीं कि लेजर ड्रोन गिरा सकता है — यह सिद्ध हो चुका है — बल्कि यह है कि क्या यह तकनीक वास्तविक परिस्थितियों में बिजली, रखरखाव और उपलब्धता के मोर्चे पर पारंपरिक मिसाइल-आधारित प्रणालियों से सस्ती और विश्वसनीय साबित होगी। हवाई क्षेत्र को बाधित किए बिना संचालन की शर्त इस परीक्षण को और जटिल बनाती है, और यही वह बिंदु है जहाँ अब तक अधिकांश डायरेक्टेड-एनर्जी कार्यक्रम अटके हैं।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी सेना का एंटी-ड्रोन लेजर परीक्षण क्या है?
यह एक वर्षीय पायलट परियोजना है जिसमें हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव हथियारों को एक सैन्य ठिकाने पर स्थापित कर 365 दिनों तक परिचालन परीक्षण किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह जाँचना है कि ये प्रणालियाँ वास्तविक सैन्य अभियानों में भरोसेमंद और किफायती हैं या नहीं।
हाई-एनर्जी लेजर और हाई-पावर माइक्रोवेव में क्या अंतर है?
हाई-एनर्जी लेजर एक समय में केवल एक ड्रोन को निशाना बना सकता है, जबकि हाई-पावर माइक्रोवेव एक साथ कई ड्रोन के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बाधित या निष्क्रिय करने में सक्षम है। दोनों तकनीकें प्रारंभिक परीक्षणों में सफल रही हैं।
इस परीक्षण की ज़िम्मेदारी किसके पास है?
जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401 के निदेशक ब्रिगेडियर जनरल मैट रॉस इस पायलट परियोजना का नेतृत्व कर रहे हैं। परीक्षण के दौरान सैनिक स्वयं इन प्रणालियों को संचालित और रखरखाव करेंगे।
यह परीक्षण क्यों ज़रूरी हो गया है?
यूक्रेन और अन्य संघर्ष क्षेत्रों में अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन के बढ़ते सैन्य उपयोग ने दुनिया भर में एंटी-ड्रोन तकनीकों की माँग को तेज़ी से बढ़ाया है। पारंपरिक मिसाइल-आधारित प्रणालियाँ महँगी होती हैं, इसलिए डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों को एक किफायती विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
क्या इन हथियारों के परीक्षण से आसपास का हवाई क्षेत्र प्रभावित होगा?
यह परीक्षण का एक प्रमुख मूल्यांकन बिंदु है। ब्रिगेडियर जनरल रॉस के अनुसार सेना ऐसी रणनीतियाँ विकसित करेगी जिससे इन हथियारों के संचालन के दौरान सैन्य ठिकाने के आसपास सामान्य हवाई यातायात बाधित न हो और हवाई क्षेत्र बंद न करना पड़े।
राष्ट्र प्रेस
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