एयरबस को यूरोपीय निवेश बैंक का रिकॉर्ड ऋण: अमेरिका ने जताई गहरी चिंता, व्यापार समझौते पर मंडराया संकट
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने सोमवार, 27 अक्टूबर 2026 को यूरोपीय विमान निर्माता एयरबस को यूरोपीय निवेश बैंक (EIB) द्वारा दिए गए रिकॉर्ड स्तर के ऋण पर कड़ी आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि इस वित्तीय सहायता से अमेरिका यूरोपीय संघ के बीच 2021 में हुए विमान सब्सिडी समझौते की बुनियाद हिल सकती है। ग्रीर ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन ने बार बार ब्यौरा माँगने के बावजूद इस ऋण की पूरी जानकारी अभी तक हासिल नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
यूरोपीय निवेश बैंक ने गर्मियों के दौरान एयरबस को अपने इतिहास का सबसे बड़ा ऋण मंजूर किया। यह ऋण फ्रांस, जर्मनी और स्पेन में एयरबस की विभिन्न परियोजनाओं के लिए दिए जाने की बात कही गई है। उल्लेखनीय है कि यह मंजूरी ठीक उस समय दी गई जब यूरोपीय संघ ने विमान सब्सिडी विवाद से जुड़े जवाबी शुल्कों के निलंबन की अवधि बढ़ाई थी।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के अनुसार, ऋण मंजूरी के समय और उससे जुड़ी पारदर्शिता की कमी ने वाशिंगटन की चिंताएँ और बढ़ा दी हैं। ग्रीर ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "मुझे सच में उम्मीद थी कि एयरबस को मिलने वाली और व्यापार को प्रभावित करने वाली यूरोपीय सब्सिडी अब बीते समय की बात हो चुकी होगी।"
अमेरिकी आपत्ति की पृष्ठभूमि
ग्रीर ने आरोप लगाया कि फ्रांस, जर्मनी और स्पेन दशकों से एयरबस का 'आक्रामक तरीके से' समर्थन करते रहे हैं, जिससे अमेरिकी एयरोस्पेस कंपनियों और उनके कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ा है। उनके शब्दों में, "दशकों से इन देशों ने अपने राष्ट्रीय विमान निर्माता एयरबस का आक्रामक तरीके से समर्थन किया है, जिससे उसे अमेरिकी कंपनियों पर अनुचित बढ़त मिली है।"
गौरतलब है कि यह विवाद अमेरिका और यूरोप के बीच चले सबसे पुराने व्यापारिक विवादों में से एक की पृष्ठभूमि में उभरा है, जहाँ दोनों पक्ष वर्षों से एक दूसरे पर अपनी अपनी विमान निर्माण कंपनियों — बोइंग और एयरबस — को अनुचित सरकारी सहायता देने का आरोप लगाते रहे हैं।
2021 के समझौते पर मँडराता सवाल
2021 में अमेरिका और यूरोपीय संघ ने आपसी सहमति से इन विवादों से जुड़े अतिरिक्त शुल्कों को पाँच वर्षों के लिए स्थगित किया था और बड़े नागरिक विमानों के वित्तपोषण के लिए नए नियमों पर बातचीत शुरू की थी। इससे पहले विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने भी दोनों पक्षों को जाँच के बाद जवाबी कदम उठाने की अनुमति दी थी।
समझौते का उद्देश्य व्यापारिक तनाव कम करना और यह सुनिश्चित करना था कि बड़े नागरिक विमानों के निर्माताओं को मिलने वाली फंडिंग व्यावसायिक शर्तों पर दी जाए। अब एयरबस को मिले इस रिकॉर्ड ऋण ने उस प्रतिबद्धता की अनुपालना पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभी तक कोई नया शुल्क नहीं, लेकिन संकेत स्पष्ट
फिलहाल अमेरिका ने न तो कोई नया शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा की है और न ही औपचारिक रूप से यह कहा है कि यूरोपीय संघ ने समझौते का उल्लंघन किया है। लेकिन ग्रीर की तीखी टिप्पणियों से यह स्पष्ट है कि वाशिंगटन इस नए ऋण की अनुपालना को लेकर गंभीर रूप से संदिग्ध है।
ग्रीर ने कहा, "हम लगातार जानकारी माँग रहे हैं, लेकिन अब तक हमें इस ऋण के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं मिली है।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि "यह जरूरी है कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए, ताकि विमानन क्षेत्र में बाज़ार आधारित उत्पादन सुनिश्चित हो सके।"
क्या होगा आगे
यह स्थिति ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच व्यापक व्यापार संबंध पहले से ही नाज़ुक दौर से गुज़र रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि दोनों पक्ष जल्द पारदर्शिता और अनुपालना पर सहमत नहीं हुए तो जवाबी शुल्कों का निलंबन जोखिम में पड़ सकता है, जो वैश्विक एयरोस्पेस आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका यूरोपीय संघ व्यापार वार्ता के अगले दौर पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।