अमेरिकी न्याय विभाग की भारतीय मूल के नरेंद्र सिंह और पाकिस्तानी जिया भट्टी की नागरिकता रद्द करने की मांग, कोर्ट में मामला दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी न्याय विभाग ने 4 अगस्त 2026 को भारतीय मूल के 65 वर्षीय नरेंद्र सिंह और पाकिस्तानी नागरिक 59 वर्षीय जिया मुराद भट्टी की अमेरिकी नागरिकता रद्द कराने के लिए अदालत में शिकायत दर्ज कराई है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी पहचान और झूठे दस्तावेजों के ज़रिये अमेरिकी नागरिकता हासिल की। यह मामला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े नागरिकता निरस्तीकरण अभियान का हिस्सा है।
जिया मुराद भट्टी का मामला
न्याय विभाग ने डेलावेयर राज्य की एक अदालत में जिया मुराद भट्टी की नागरिकता समाप्त करने का अनुरोध किया है। आरोपों के अनुसार, भट्टी ने 1992 में 'रजा मुराद' नाम का इस्तेमाल कर अवैध रूप से अमेरिका में प्रवेश किया था। उस समय उन्हें देश छोड़ने का आदेश भी दिया गया था, परंतु कथित तौर पर उन्होंने फर्जी पहचान और दस्तावेजों के बल पर बाद में अमेरिकी नागरिकता प्राप्त कर ली।
अदालती शिकायत में भट्टी पर झूठी गवाही, तथ्यों को छिपाने, जानबूझकर गलत जानकारी देने और फर्जी बयान देने के आरोप लगाए गए हैं। भट्टी उन 25 लोगों में शामिल हैं जिनकी नागरिकता रद्द कराने की माँग सरकार ने की है — इनमें से कई पर हत्या के प्रयास और नाबालिग के यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आपराधिक आरोप भी हैं।
नरेंद्र सिंह पर क्या आरोप हैं
एक अलग मामले में न्याय विभाग ने भारतीय मूल के 65 वर्षीय नरेंद्र सिंह की नागरिकता रद्द करने की माँग की है। आरोप है कि उन्होंने 1996 से अमेरिका में प्रवेश और प्रवास के दौरान दो अलग-अलग पहचान का उपयोग किया और 2008 में अमेरिकी नागरिकता हासिल कर ली।
अदालत में दायर शिकायत के अनुसार, नरेंद्र सिंह ने कई मौकों पर गलत जानकारी दी और ऐसे गैरकानूनी कार्य किए जो उनके 'नैतिक चरित्र' पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। न्याय विभाग का कहना है कि यही आधार उनकी नागरिकता समाप्त करने के लिए पर्याप्त है।
मुर्तजा अली का पूर्व मामला और बड़ा अभियान
इससे पहले जुलाई में पाकिस्तान मूल के 65 वर्षीय मुर्तजा अली पर भी अमेरिका में आव्रजन लाभ प्राप्त करने के लिए कई अलग-अलग पहचान का उपयोग करने का आरोप लगाया गया था। अदालती शिकायत के अनुसार, मुर्तजा अली ने अलग-अलग नामों से कई आव्रजन आवेदन दाखिल किए और 2009 में 'मोहम्मद इकबाल' नाम से अमेरिकी नागरिकता प्राप्त की। संघीय अधिकारियों ने बताया कि बाद में की गई फिंगरप्रिंट जाँच में यह पता चला कि विभिन्न पहचान के तहत जमा किए गए सभी आवेदन एक ही व्यक्ति से जुड़े थे।
गौरतलब है कि मुर्तजा अली उन 10 प्राकृतिक नागरिकों में शामिल हैं जिनकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई ट्रंप प्रशासन कर रहा है।
कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल का बयान
कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने कहा, 'आज दायर किए गए मामले न्याय विभाग के इतिहास में नागरिकता रद्द करने के लिए सबसे बड़े समन्वित प्रयास का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन यह केवल शुरुआत है।' यह बयान इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन का व्यापक आव्रजन रुख
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आव्रजन नीति में अवैध प्रवासियों और अपराधियों को निर्वासित करने को प्रमुख प्राथमिकता बनाया है। न्याय विभाग के अनुसार, ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत 20 जनवरी 2025 से होने के बाद से विभाग ने नागरिकता रद्द करने से जुड़े 123 दीवानी मामले दायर किए हैं — जो विभाग के रिकॉर्ड में अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। यह अभियान दर्शाता है कि ट्रंप प्रशासन आव्रजन धोखाधड़ी पर अभूतपूर्व कठोरता से कार्रवाई कर रहा है।