ट्रंप प्रशासन का बड़ा कदम: 10 नागरिकों की अमेरिकी नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई, पाकिस्तानी मूल का व्यक्ति भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 21 जुलाई 2026 को 10 नागरिकों की अमेरिकी नागरिकता रद्द (डीनेचुरलाइजेशन) करने की अब तक की सबसे बड़ी एकसाथ कार्रवाई शुरू की है। इनमें पाकिस्तान में जन्मे 65 वर्षीय मुर्तजा अली भी शामिल हैं, जिन पर आव्रजन लाभ पाने के लिए कई फर्जी पहचान इस्तेमाल करने का आरोप है। ट्रंप सरकार इसे अमेरिकी इतिहास में नागरिकता रद्द करने का सबसे बड़ा अभियान बता रही है।
मुर्तजा अली पर क्या आरोप हैं
संघीय अधिकारियों के अनुसार, मुर्तजा अली ने स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) और बाद में 2009 में अमेरिकी नागरिकता हासिल करने से पहले अलग-अलग नामों से कई आव्रजन आवेदन दाखिल किए। नागरिकता उन्होंने 'मोहम्मद इकबाल' नाम से प्राप्त की थी। बाद में फिंगरप्रिंट जांच से पता चला कि विभिन्न पहचानों से दाखिल सभी आव्रजन आवेदन एक ही व्यक्ति ने किए थे।
2014 में मुर्तजा अली ने अमेरिकी सरकारी एजेंसी को झूठी और भ्रामक जानकारी देने का दोष स्वीकार किया था। उन्होंने माना था कि उन्होंने तीन अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर तीन अलग-अलग आव्रजन लाभ संबंधी आवेदन दाखिल किए थे। अमेरिका ने टेक्सास के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट में 14 जुलाई को चार-काउंट नागरिकता रद्द करने की कार्रवाई दर्ज की।
सरकार की प्रतिक्रिया और अधिकारियों के बयान
कार्रवाई की घोषणा करते हुए डीएचएस सचिव मार्कवेन मुलिन ने कहा, 'जब आप नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया के दौरान धांधली करते हैं, तो आप अपनी अमेरिकी नागरिकता रखने का अधिकार खो देते हैं। इन अपराधियों ने वह अधिकार खो दिया और हमारे इमिग्रेशन सिस्टम का फायदा उठाया।'
कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने कहा, 'इन दस व्यक्तियों — जिनमें बच्चों का यौन शोषण करने वाले, लगभग 9 लाख डॉलर का मेडिकेयर फ्रॉड करने वाला और एक कोकीन तस्कर शामिल हैं — ने झूठ बोलकर अमेरिका की नागरिकता हासिल की। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में यह अभियान और तेज होगा।'
असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने कहा, 'इस सरकार के तहत, अगर आपने नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया में धोखाधड़ी की, तो आपको न्याय विभाग की पूरी ताकत का सामना करना पड़ेगा। हमने अभी तो बस शुरुआत की है।'
अन्य मामलों में क्या आरोप हैं
गौरतलब है कि शेष मामलों में क्यूबा, मेक्सिको, पेरू और पोलैंड में जन्मे लोग शामिल हैं। आरोपों में मेडिकेयर फ्रॉड, बच्चों का यौन शोषण, पहचान धोखाधड़ी, वायर फ्रॉड और कोकेन तस्करी जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। शिकायतें देशभर के संघीय जिला न्यायालयों में दाखिल की गई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन आव्रजन नीति पर कड़ा रुख अपना रहा है और डीएचएस तथा न्याय विभाग ने पिछले 30 दिनों में नागरिकता रद्द करने के कई मामले एकसाथ शुरू किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये दावे अभी आरोप ही हैं और न्यायालय में जिम्मेदारी अभी तय होनी बाकी है।
आगे क्या होगा
असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल शुमेट के अनुसार, आने वाले समय में और भी शिकायतें दाखिल होने की संभावना है। यह अभियान ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति का केंद्रीय स्तंभ बनता जा रहा है, और विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश में नागरिकता प्रक्रिया की पारदर्शिता और कड़ाई पर बड़ी बहस छिड़ सकती है।