ताइवान नीति पर ट्रंप प्रशासन अडिग, $14 अरब हथियार पैकेज की समीक्षा जारी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका की ट्रंप सरकार ने 26 जून 2026 को एक बार फिर स्पष्ट किया कि ताइवान को लेकर वाशिंगटन की दीर्घकालिक नीति में कोई बदलाव नहीं आया है — भले ही चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच स्वशासित द्वीप के लिए प्रस्तावित $14 अरब के हथियार पैकेज की समीक्षा अभी जारी है। यह स्पष्टीकरण प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की उपसमिति (पूर्वी एशिया और प्रशांत) की सुनवाई में सामने आया, जहाँ दोनों दलों के सांसदों ने ताइवान की सुरक्षा को लेकर तीखे सवाल उठाए।
मुख्य घटनाक्रम
पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के लिए अमेरिकी विदेश मंत्रालय के सहायक विदेश मंत्री माइकल जी. डीसोम्ब्रे ने उपसमिति के समक्ष कहा कि प्रशासन ताइवान संबंध अधिनियम, तीन जॉइंट कम्युनिकेशंस और छह एश्योरेंस के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'ताइवान पर हमारी पुरानी नीति नहीं बदली है। हम ताइवान स्ट्रेट में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं और स्टेटस को में किसी भी एकतरफा बदलाव का विरोध करते हैं।'
सुनवाई की अध्यक्षता करने वाली प्रतिनिधि यंग किम ने कहा कि ट्रंप सरकार और कांग्रेस, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) की रोज़ाना की धमकियों और जबरदस्ती के खिलाफ ताइवान के साथ मजबूती से खड़े हैं।
हथियार पैकेज की स्थिति
यंग किम ने ताइवान के लिए पहले से मंजूर $11 अरब के हथियार पैकेज का स्वागत किया, जिसमें HIMARS रॉकेट सिस्टम, ATACMS मिसाइलें, हॉवित्जर और ड्रोन शामिल हैं। उन्होंने बताया कि विदेश सचिव मार्को रुबियो ने सांसदों को सूचित किया था कि $14 अरब का फॉलो-ऑन पैकेज अभी राष्ट्रपति की समीक्षा में है।
रिपब्लिकन प्रतिनिधि एंडी बार ने प्रशासन के रिकॉर्ड का बचाव करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार ने ताइवान की सुरक्षा के लिए पहले कभी नहीं देखा गया प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि वह अमेरिकी रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत कर ताइवान को पहले से स्वीकृत $32 अरब से अधिक के सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में हो रही देरी दूर करने में मदद करे।
ट्रंप-शी वार्ता पर सवाल
प्रतिनिधि जॉन 'जॉनी ओ' ओल्स्जेव्स्की जूनियर ने पूछा कि क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ताइवान को हथियार बेचने पर चर्चा करने की बात वाशिंगटन की दीर्घकालिक प्रतिबद्धताओं के अनुरूप है। डीसोम्ब्रे ने स्पष्ट किया कि बीजिंग लगभग हर द्विपक्षीय बैठक में ताइवान और वहाँ हथियारों की बिक्री का मुद्दा उठाता है। उन्होंने कहा, 'यह किसी भी तरह से छह वादों से अलग नहीं है।'
ताइवान की रक्षा क्षमता और बजट
यंग किम ने ताइवान से अपने रक्षा बजट में और वृद्धि करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ताइवान की संसद ने $25 अरब के रक्षा पैकेज को मंजूरी दी है, लेकिन ड्रोन जैसी महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं के विकास और खरीद के लिए अभी पर्याप्त धन आवंटित नहीं हुआ है। डीसोम्ब्रे ने बताया कि अमेरिका ताइवान को अतिरिक्त बजटीय सहायता मंजूर कराने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
व्यापक संदर्भ
ताइवान संबंध अधिनियम के तहत अमेरिका ताइवान को रक्षात्मक हथियार उपलब्ध कराता है, जबकि चीनी हमले की स्थिति में सैन्य हस्तक्षेप को लेकर 'रणनीतिक अस्पष्टता' की नीति बनाए रखता है। बीजिंग ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और हाल के वर्षों में द्वीप के आसपास सैन्य गतिविधियाँ तेज़ कर दी हैं। गौरतलब है कि वाशिंगटन ताइपे के बजाय बीजिंग को राजनयिक मान्यता देता है, फिर भी ताइवान का सबसे बड़ा सुरक्षा साझेदार और रक्षा उपकरणों का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। ताइवान का मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में सबसे संवेदनशील बिंदु बना हुआ है और आने वाले समय में इस पर तनाव और बढ़ने की आशंका विशेषज्ञ जता रहे हैं।