सीबीडीसी व्यक्तिगत आजादी के लिए खतरा: ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने डिजिटल डॉलर को किया खारिज
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 29 मई 2026 को व्हाइट हाउस की प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन किसी भी स्थिति में सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) को अमेरिका में लागू नहीं करेगा। उनके अनुसार, सरकार द्वारा जारी डिजिटल मुद्रा नागरिकों के वित्तीय लेनदेन पर निगरानी का औजार बन सकती है, जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए सीधा खतरा है।
प्रशासन का रुख: सीबीडीसी नहीं, स्टेबलकॉइन को बढ़ावा
बेसेंट ने ब्रीफिंग में कहा, 'इस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कोई सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी नहीं होगी।' उन्होंने सीबीडीसी को सरकारी निगरानी का 'पहला कदम' बताते हुए कहा कि यह ट्रैकिंग की दिशा में जाने वाला रास्ता है। इसके विपरीत, प्रशासन निजी क्षेत्र के डिजिटल एसेट्स और स्टेबलकॉइन को एक सुव्यवस्थित नियामक ढाँचे के भीतर प्रोत्साहित करने की नीति पर चल रहा है।
संसद में दोदलीय समर्थन वाले विधेयक
बेसेंट ने बताया कि स्टेबलकॉइन से जुड़ा कानून दोनों प्रमुख दलों के समर्थन से पारित हो चुका है। इसके अलावा 'क्लैरिटी एक्ट' भी संसद में विचाराधीन है, जिसे भी द्विदलीय समर्थन मिल रहा है। उनका तर्क है कि डिजिटल एसेट उद्योग को अमेरिकी नियमों के दायरे में लाने से उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षा मिलेगी, बजाय इसके कि यह उद्योग विदेशी, कम-नियंत्रित बाजारों में पनपता रहे।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य: अमेरिका अलग राह पर
गौरतलब है कि जहाँ चीन, यूरोपीय केंद्रीय बैंक और कई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ अपनी-अपनी सीबीडीसी परियोजनाओं पर सक्रिय रूप से काम कर रही हैं या उनका परीक्षण कर रही हैं, वहीं अमेरिका इस वैश्विक रुझान से स्पष्ट दूरी बना रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब डिजिटल मुद्रा की संप्रभुता और वित्तीय निगरानी को लेकर अंतरराष्ट्रीय बहस तेज हो रही है।
डिजिटल एसेट्स को अमेरिका का 'घर' बनाने की मंशा
बेसेंट ने कहा, 'सबसे जरूरी बात यह है कि हम डिजिटल एसेट्स को अमेरिका के अंदर लाएँ और अमेरिका को इसका घर बनाएँ। हमारे नियम और हमारी बेहतर प्रैक्टिस ही अच्छे स्टैंडर्ड तय करेंगे।' उन्होंने विदेशी डिजिटल एसेट बाजारों की आलोचना करते हुए उन्हें अपर्याप्त रूप से नियंत्रित बताया।
आगे क्या होगा
ट्रेजरी सचिव ने कांग्रेस से आग्रह किया कि डिजिटल एसेट्स के लिए स्पष्ट और मजबूत कानून बनाए जाएँ, ताकि उद्योग को दिशा मिले और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। 'क्लैरिटी एक्ट' के पारित होने के बाद अमेरिका में क्रिप्टो और स्टेबलकॉइन विनियमन की रूपरेखा और स्पष्ट होगी।