अमेरिकी सीनेटरों की माँग: स्टूडेंट वीजा देरी दूर करे विदेश विभाग, भारतीय छात्रों पर सबसे बड़ा असर
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी सीनेट के एक बड़े समूह ने 12 अगस्त 2026 को विदेश विभाग (State Department) से आग्रह किया कि वह एफ, एम और जे श्रेणी के छात्र व एक्सचेंज विजिटर वीजा की प्रोसेसिंग में हो रही देरी को तत्काल दूर करे। सीनेटरों ने चेतावनी दी कि यदि यह स्थिति नहीं बदली, तो हजारों विदेशी छात्र नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले अमेरिका नहीं पहुँच पाएँगे। इस चेतावनी का सबसे गहरा असर भारतीय छात्रों पर पड़ने की आशंका है, जो अमेरिकी विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों की सबसे बड़ी संख्या में से एक हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सीनेट ज्यूडिशियरी इमिग्रेशन सब-कमेटी के वरिष्ठतम डेमोक्रेट, कैलिफोर्निया के सीनेटर एलेक्स पैडिला ने इस पहल का नेतृत्व किया। उन्होंने सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो को संबोधित एक औपचारिक पत्र में कई अमेरिकी दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों में समय पर अपॉइंटमेंट न मिलने की समस्या उजागर की। इस पत्र पर सीनेट डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन, कोरी बुकर, एलिज़ाबेथ वॉरेन, राफेल वार्नॉक, एमी क्लोबुचर, क्रिस वैन होलेन, एडम शिफ़, जीन शाहीन, टैमी डकवर्थ, क्रिस कून्स, रॉन वाइडेन, एंडी किम और स्वतंत्र सीनेटर एंगस किंग ने भी हस्ताक्षर किए।
सीनेटरों ने पत्र में लिखा, "हम विदेश विभाग से आग्रह करते हैं कि वह एफ, एम और जे छात्र और एक्सचेंज विजिटर नॉन-इमिग्रेंट वीजा की समय पर प्रोसेसिंग सुनिश्चित करे, जैसा कि अतीत में दोनों पार्टियों के प्रशासन ने किया है।"
सीनेटरों की प्रमुख माँगें
पत्र में स्टेट डिपार्टमेंट से कई ठोस कदम उठाने की अपील की गई है। इनमें वीजा इंटरव्यू, निर्णय और प्रोसेसिंग को प्राथमिकता देना, पहले से जाँचे-परखे और वापस आने वाले छात्रों के लिए इंटरव्यू में छूट का विस्तार, कॉन्स्युलर स्टाफ की संख्या बढ़ाना और प्रोसेसिंग समय के बारे में अधिक पारदर्शिता लाना शामिल है। सीनेटरों ने यह भी जानना चाहा कि 2025 के स्प्रिंग और समर के बाद से वीजा प्राथमिकताएँ बदली हैं या नहीं।
पत्र में विभाग से यह भी माँगा गया कि वह उन पाँच स्थानों पर एफ, एम और जे वीजा की प्रोसेसिंग में लगने वाले औसत समय की जानकारी दे, जहाँ सितंबर 2025 से सबसे अधिक आवेदन प्रोसेस किए जा रहे हैं।
कड़ी जाँच-पड़ताल पर सवाल
सीनेटरों ने पिछले साल छात्र और एक्सचेंज विजिटर आवेदकों के लिए शुरू की गई अधिक कड़ी जाँच-पड़ताल — जिसमें आवेदकों की ऑनलाइन मौजूदगी की जाँच भी शामिल है — के बारे में भी जानकारी माँगी। उन्होंने पूछा कि इन प्रक्रियाओं के तहत कितने आवेदन अस्वीकार किए गए और अतिरिक्त जाँच के लिए क्या संसाधन उपलब्ध कराए गए। गौरतलब है कि यह कड़ाई ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियाँ पहले से ही विवाद के केंद्र में हैं।
आम जनता और भारतीय छात्रों पर असर
सीनेटरों ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय छात्र अमेरिका में उच्च शिक्षा लेने वाले छात्रों का केवल 6 प्रतिशत हैं, फिर भी वे स्थानीय समुदायों में सालाना लगभग $43 अरब का योगदान देते हैं और 2024-2025 शैक्षणिक वर्ष में 3,55,000 से अधिक अमेरिकी नौकरियों को सहारा देते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देरी से विश्वविद्यालयों और कुशल कार्यबल की आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
यह चेतावनी भारत से अमेरिका जाने वाले उन छात्रों के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है जो हर साल बड़ी संख्या में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेते हैं। पत्र में किसी विशेष देश या दूतावास का नाम नहीं लिया गया जहाँ अपॉइंटमेंट की कमी है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि दक्षिण एशियाई देशों के छात्र इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक आयाम
सीनेटरों ने अपने पत्र में यह भी तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय छात्र वैश्विक संबंध, सांस्कृतिक समझ और दीर्घकालिक कूटनीतिक संबंध बनाकर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत करते हैं। उनके अनुसार, यदि वीजा प्रक्रिया में देरी जारी रही, तो इन दीर्घकालिक लाभों पर खतरा मंडरा सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और भारत सहित कई देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर नई साझेदारियाँ बन रही हैं।
आगे देखें तो विदेश विभाग की प्रतिक्रिया और संभावित नीतिगत बदलाव ही तय करेंगे कि आने वाले सत्र में कितने अंतरराष्ट्रीय छात्र समय पर अमेरिका पहुँच पाएँगे।