रूसी ऊर्जा पर भारत-चीन को टैरिफ: अमेरिका को यूरोप का साथ नहीं मिला — बेसेंट
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 19 अक्टूबर 2026 को खुलासा किया कि वाशिंगटन ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों — विशेषकर भारत और चीन — पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने के लिए यूरोपीय सहयोगियों से समर्थन माँगा था, लेकिन यूरोप ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। एनबीसी के कार्यक्रम 'मीट द प्रेस' में दिए साक्षात्कार में बेसेंट ने ट्रंप प्रशासन की उस नीति का भी बचाव किया, जिसमें रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर नए प्रतिबंधों को फिलहाल स्थगित रखा गया है।
यूरोप पर बेसेंट का सीधा आरोप
बेसेंट ने कहा कि वसंत ऋतु में उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों से चीन और भारत पर सेकेंडरी टैरिफ लगाने में साथ देने का अनुरोध किया था, जिसे यूरोप ने ठुकरा दिया। उनका तर्क था, 'तो फिर इसका पूरा बोझ केवल अमेरिका ही क्यों उठाए?' उन्होंने आरोप लगाया कि यूरोपीय देश एक ओर रूस की आलोचना करते हैं और दूसरी ओर उससे ऊर्जा खरीदकर उसे आर्थिक रूप से मज़बूत कर रहे हैं।
यामल परियोजना के आँकड़े: यूरोप खरीद रहा है रूसी ऊर्जा
बेसेंट ने रूस की यामल ऊर्जा परियोजना का उदाहरण देते हुए बताया कि इस वर्ष के पहले छह महीनों में वहाँ से कुल 140 ऊर्जा खेप भेजी गईं, जिनमें से 136 खेप यूरोपीय देशों को गईं। इन खेपों की कुल अनुमानित कीमत 8 अरब डॉलर से अधिक बताई गई। इनके प्रमुख खरीदारों में बेल्जियम, स्पेन, फ्रांस और नीदरलैंड्स शामिल थे।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। गौरतलब है कि यूरोप ने 2022 के बाद रूसी ऊर्जा पर निर्भरता कम करने के दावे किए थे, लेकिन ये आँकड़े उस दावे पर सवाल उठाते हैं।
लिंडसे ग्राहम एक्ट: प्रतिबंध स्थगित, समाप्त नहीं
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सीएनएन के कार्यक्रम 'स्टेट ऑफ द यूनियन' में स्पष्ट किया कि लिंडसे ग्राहम एक्ट रूस पर सीधे प्रतिबंध लगाने के बारे में नहीं, बल्कि रूस के साथ व्यापार जारी रखने वाले देशों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने से संबंधित है। उन्होंने कहा, 'ऐसे देशों में सबसे महत्वपूर्ण दो नाम भारत और चीन हैं।' राइट ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन प्रतिबंधों को समाप्त नहीं किया है, केवल फिलहाल उन्हें लागू होने से रोका है।
बेसेंट ने जोर देकर कहा, 'शुक्रवार को कोई भी प्रतिबंध नहीं हटाया गया। बिल्कुल कोई प्रतिबंध नहीं हटाया गया।' उन्होंने स्पष्ट किया कि नए प्रतिबंधों को स्थगित करना और रूसी डीजल निर्यात पर कुछ राहत देना दो अलग-अलग कदम हैं। कानून में 60 दिनों की समीक्षा अवधि दी गई है।
रूसी डीजल पर राहत और चीन से बातचीत
ऊर्जा मंत्री राइट ने रूसी डीजल निर्यात को लेकर उठाए गए कदम का बचाव करते हुए कहा कि रूस को इसका लाभ तभी मिलेगा जब वह अपने सैन्य अभियान कम करेगा। उनके अनुसार, रूसी कच्चे तेल पर मौजूदा प्रतिबंध अभी भी लागू हैं और डीजल से जुड़ा निर्णय यूक्रेन युद्ध समाप्त करने की दिशा में प्रगति को प्रोत्साहित करने के लिए उठाया गया है। राइट ने यह भी बताया कि वाशिंगटन यूक्रेन युद्ध और दीर्घकालिक व्यापारिक संबंधों को लेकर बीजिंग के साथ बातचीत कर रहा है।
भारत और चीन पर असर: आगे क्या
भारत और चीन — जो रूसी ऊर्जा के प्रमुख खरीदार हैं — लिंडसे ग्राहम एक्ट के तहत संभावित प्रतिबंधों की जद में आ सकते हैं, यदि 60 दिनों की समीक्षा अवधि के बाद ट्रंप प्रशासन इन्हें लागू करने का फैसला करता है। विश्लेषकों के अनुसार, यूरोप के असहयोग और अमेरिका की आंतरिक राजनीतिक जटिलताओं के बीच इस नीति का भविष्य अनिश्चित है। भारत की ऊर्जा आयात नीति और रूस के साथ उसके संबंध अगले कुछ हफ्तों में राजनयिक दबाव का केंद्र बन सकते हैं।