बांग्लादेश में चुनाव के बाद अल्पसंख्यकों पर हमले बढ़े: 62 जिलों में 505 घटनाएं दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में फरवरी 2026 के आम चुनावों के बाद से धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों — विशेष रूप से हिंदू और ईसाई समुदायों — के विरुद्ध हिंसा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, देश के सभी आठ प्रशासनिक प्रभागों के 62 जिलों में कुल 505 घटनाएं जनवरी से अप्रैल के बीच सामने आई हैं।
मुख्य घटनाक्रम
फ्रांस स्थित मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश फ्रांस (JMBF) ने बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों के लिए मानवाधिकार कांग्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए इन घटनाओं पर गहरी चिंता जताई है। रिपोर्ट के अनुसार दर्ज घटनाओं में हत्या, संदिग्ध मौतें, शारीरिक हमले, अपहरण, यौन हिंसा, मंदिरों और धार्मिक संस्थानों पर हमले, भूमि कब्जा, आगजनी, लूटपाट, धमकी और ईशनिंदा से जुड़े उत्पीड़न के मामले शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 43 जिलों में मंदिरों और धार्मिक मूर्तियों पर हमलों की 95 घटनाएं दर्ज की गईं। 23 जिलों में बलात्कार और सामूहिक दुष्कर्म सहित यौन हिंसा के 28 मामले सामने आए, जबकि 6 जिलों में ईशनिंदा से जुड़े 6 मामले भी दर्ज किए गए।
चुनाव परिणाम और पृष्ठभूमि
यह चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद आयोजित हुआ था। बताया गया है कि इसमें बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को जीत मिली, जबकि जमात-ए-इस्लामी को करीब एक-तिहाई मत प्राप्त हुए। समुदाय के नेताओं का कहना है कि जमात-ए-इस्लामी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में हिंसा की घटनाएं अधिक देखने को मिली हैं।
उत्पीड़ित ईसाइयों के समर्थन के लिए काम करने वाले संगठन ओपन डोर्स यूके और आयरलैंड ने कहा है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पहले से बढ़ रही थी, लेकिन चुनाव के बाद इसमें और तेजी आई है। विशेष रूप से इस्लाम से धर्म परिवर्तन कर ईसाई बने लोगों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं।
विशिष्ट हमलों का उल्लेख
रिपोर्ट में ढाका स्थित सेंट यूजीन डी माजेनोड चर्च में एक कैथोलिक पादरी से पासपोर्ट और नकदी लूटे जाने तथा उनके साथ मारपीट किए जाने का विशेष उल्लेख किया गया है। फरवरी के चुनावों के बाद से अब तक कथित तौर पर 50 से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
मार्च में हिंदू और ईसाई नेताओं ने ढाका में प्रदर्शन कर BNP सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
JMBF के संस्थापक और अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा कि ये घटनाएं बांग्लादेश में बढ़ती असहिष्णुता, भेदभाव और संस्थागत विफलता को दर्शाती हैं, जो मानवाधिकारों, समानता, धर्मनिरपेक्षता और कानून के शासन के लिए गंभीर चुनौती है।
मांगें और आगे की राह
JMBF ने बांग्लादेश सरकार से मांग की है कि सभी घटनाओं की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक आयोग गठित किया जाए, दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाए और पीड़ितों को सुरक्षा, मुआवजा तथा पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। संगठन ने धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अल्पसंख्यक संरक्षण कानून और एक स्वतंत्र अल्पसंख्यक आयोग के गठन की भी अपील की है। यह देखना अहम होगा कि BNP सरकार इन मांगों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देती है।