1 अगस्त 2026
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पश्चिमी यूरोप वैश्विक औसत से तेज़ गर्म हो रहा है, स्पेन में 1.80 लाख हेक्टेयर जली: जलवायु विशेषज्ञ

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पश्चिमी यूरोप वैश्विक औसत से तेज़ गर्म हो रहा है, स्पेन में 1.80 लाख हेक्टेयर जली: जलवायु विशेषज्ञ

सारांश

स्पेन की मौसम एजेंसी एईएमईटी के विशेषज्ञ रूबेन डेल कैंपो की चेतावनी — पश्चिमी यूरोप वैश्विक औसत से तेज़ गर्म हो रहा है और भूमध्यसागरीय देश सबसे अधिक संवेदनशील हैं। स्पेन में इस गर्मी 1.80 लाख हेक्टेयर जल चुकी है — 2025 के मुकाबले छह गुना अधिक — और 2 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।

मुख्य बातें

जलवायु विशेषज्ञ रूबेन डेल कैंपो के अनुसार पश्चिमी यूरोप वैश्विक औसत से अधिक तेज़ी से गर्म हो रहा है; भूमध्यसागरीय देश सर्वाधिक संवेदनशील हैं।
जून 2026 स्पेन के इतिहास का दूसरा सबसे गर्म और तीसरा सबसे शुष्क जून रहा (रिकॉर्ड 1961 से)।
जुलाई अंत तक स्पेन में वनाग्नि ने 1 लाख 80 हज़ार हेक्टेयर जलाई — 2025 की इसी अवधि के 29,817 हेक्टेयर से लगभग छह गुना अधिक।
स्पेन और दक्षिणी फ्रांस में वनाग्नि के कारण लगभग 2 लाख लोग विस्थापित हुए।
विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार 1976 के बाद से यूरोप का औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।
वनाग्नि का खतरा पूरे अगस्त बने रहने की आशंका है।

पश्चिमी यूरोप दुनिया के अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक तेज़ गति से गर्म हो रहा है और भूमध्यसागरीय देश हीटवेव के सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हो गए हैं। स्पेन की सरकारी मौसम एजेंसी एईएमईटी (AEMET) के प्रवक्ता एवं जलवायु विशेषज्ञ रूबेन डेल कैंपो ने 1 अगस्त 2026 को बार्सिलोना से यह चेतावनी जारी की। उनके अनुसार, जुलाई के अंत तक स्पेन इस वर्ष की चौथी हीटवेव झेल रहा था और देश के कई हिस्सों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

डेल कैंपो ने कहा, 'कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल सहित पश्चिमी यूरोप दुनिया के कई अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक तेज़ी से गर्म हो रहा है। साथ ही, यह क्षेत्र हीटवेव की घटनाओं के प्रति भी अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।' एईएमईटी के आँकड़ों के अनुसार, जून 2026 स्पेन के इतिहास का दूसरा सबसे गर्म और तीसरा सबसे शुष्क जून महीना रहा — और देश में मौसम संबंधी रिकॉर्ड 1961 से रखे जा रहे हैं। स्पेन के कुछ हिस्सों में मई के अंत तक ही तापमान 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया था।

वनाग्नि का कहर

बढ़ती गर्मी के साथ-साथ जंगलों में आग की घटनाएँ भी विकराल रूप ले रही हैं। स्पेन के इकोलॉजिकल ट्रांजिशन और डेमोग्राफिक चैलेंज मंत्रालय के अनुसार, जुलाई के अंत तक स्पेन में वनाग्नि ने लगभग 1 लाख 80 हज़ार हेक्टेयर भूमि को अपनी चपेट में ले लिया था — जो 2025 की इसी अवधि में दर्ज 29,817 हेक्टेयर से लगभग छह गुना अधिक है। इस गर्मी में स्पेन और दक्षिणी फ्रांस में फैली वनाग्नि के कारण लगभग दो लाख लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा। मैड्रिड के निकटवर्ती इलाकों, दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस — विशेषकर बोर्डो के आसपास — और मध्य स्पेन के कुछ हिस्सों में बड़ी आग की घटनाएँ दर्ज की गई हैं।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

डेल कैंपो ने समझाया कि शुष्क मौसम और जल्दी आने वाली गर्मी मिलकर वनाग्नि के लिए आदर्श परिस्थितियाँ बनाती हैं। उन्होंने कहा, 'गर्मी जल्दी शुरू होती है, और बारिश की कमी का मतलब है कि सूखा भी जल्दी शुरू हो जाता है। इससे जंगल की घास और झाड़ियाँ तेज़ी से सूख जाती हैं। जब आग लगती है, तो यह सूखा जैविक पदार्थ बहुत तेज़ी से जलता है, जिससे शुरुआत से ही आग पर नियंत्रण पाना कठिन हो जाता है।' उन्होंने यह भी कहा कि तापमान अधिक रहने के कारण वनाग्नि का खतरा पूरे अगस्त बना रह सकता है।

जलवायु परिवर्तन की भूमिका

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने जुलाई में कहा था कि 1976 की ऐतिहासिक हीटवेव के बाद से पूरे यूरोप का औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। संगठन का मानना है कि गर्मियों के तापमान में यह निरंतर वृद्धि मुख्यतः जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। डेल कैंपो ने कहा, 'जलवायु परिवर्तन और बढ़ती गर्मी के बीच स्पष्ट संबंध है। औसत तापमान में वृद्धि हमेशा अत्यधिक गर्मी के दौरों में बढ़ोतरी लाती है और वर्तमान में हम ठीक यही स्थिति देख रहे हैं।'

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय देश जलवायु अनुकूलन नीतियों पर पुनर्विचार कर रहे हैं। डेल कैंपो के अनुसार, 'सिर्फ मौसम संबंधी कारणों से, आग प्रबंधन को इन लंबी और अधिक गर्म गर्मियों के अनुसार खुद को ढालना होगा।' गौरतलब है कि भूमध्यसागरीय देशों में हीटवेव और वनाग्नि का यह संयोजन आने वाले दशकों में और तीव्र होने की आशंका है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र दोनों पर दीर्घकालिक दबाव पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि नीतिगत विफलता का संकेत भी है — क्योंकि यूरोपीय देशों ने दशकों से जलवायु अनुकूलन की चेतावनियाँ सुनी हैं पर आग प्रबंधन ढाँचे उसी पुरानी लय में चलते रहे। विश्व मौसम विज्ञान संगठन का 2 डिग्री सेल्सियस का आँकड़ा बताता है कि यह कोई भविष्य का संकट नहीं, बल्कि वर्तमान वास्तविकता है। भूमध्यसागरीय देशों की कृषि, पर्यटन और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दीर्घकालिक आर्थिक प्रभाव की अनदेखी मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर होती है। असली सवाल यह है कि क्या यूरोपीय सरकारें आपदा-प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर संरचनात्मक जलवायु-अनुकूलन में निवेश करेंगी।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिमी यूरोप में हीटवेव की स्थिति 2026 में इतनी गंभीर क्यों है?
जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी यूरोप वैश्विक औसत से तेज़ गति से गर्म हो रहा है, जिससे हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार 1976 के बाद से यूरोप का औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है और जलवायु परिवर्तन इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
स्पेन में 2026 की वनाग्नि 2025 से कितनी अधिक गंभीर है?
स्पेन के इकोलॉजिकल ट्रांजिशन मंत्रालय के अनुसार जुलाई अंत तक 2026 में लगभग 1 लाख 80 हज़ार हेक्टेयर भूमि वनाग्नि की चपेट में आ चुकी थी, जबकि 2025 की इसी अवधि में यह आँकड़ा केवल 29,817 हेक्टेयर था — यानी लगभग छह गुना वृद्धि।
भूमध्यसागरीय देश हीटवेव के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील क्यों हैं?
एईएमईटी के प्रवक्ता रूबेन डेल कैंपो के अनुसार भूमध्य सागर के आसपास स्थित देश नई जलवायु परिस्थितियों में हीटवेव के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं। इन देशों में गर्मी जल्दी शुरू होती है और बारिश कम होती है, जिससे सूखा और वनाग्नि का खतरा बढ़ जाता है।
स्पेन में जून 2026 कितना असाधारण रहा?
एईएमईटी के आँकड़ों के अनुसार जून 2026 स्पेन के इतिहास का दूसरा सबसे गर्म और तीसरा सबसे शुष्क जून महीना रहा। देश में मौसम संबंधी रिकॉर्ड 1961 से रखे जा रहे हैं और जून व जुलाई 2026 दोनों ही असाधारण रूप से गर्म रहे।
वनाग्नि के कारण कितने लोग विस्थापित हुए और कौन-से क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हैं?
इस गर्मी में स्पेन और दक्षिणी फ्रांस में फैली वनाग्नि के कारण लगभग 2 लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। मैड्रिड के निकटवर्ती इलाके, दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस (विशेषकर बोर्डो के आसपास) और मध्य स्पेन के कुछ हिस्से सबसे अधिक प्रभावित रहे।
राष्ट्र प्रेस
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