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डच क्रूज शिप पर हंटावायरस के दो मामलों की WHO ने पुष्टि की, 27 अप्रैल को डच महिला की मौत

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डच क्रूज शिप पर हंटावायरस के दो मामलों की WHO ने पुष्टि की, 27 अप्रैल को डच महिला की मौत

सारांश

अटलांटिक महासागर में एक डच क्रूज जहाज पर हंटावायरस का कहर जारी है — WHO ने दूसरे मामले की पुष्टि की है, एक डच महिला की 27 अप्रैल को मौत हो चुकी है, दो क्रू सदस्य गंभीर हालत में हैं और एक ब्रिटिश नागरिक जोहानेसबर्ग के आईसीयू में भर्ती है। जहाज पर अभी भी करीब 150 लोग सवार हैं।

मुख्य बातें

WHO ने अटलांटिक महासागर में ओशनवाइड एक्सपीडिशंस के डच क्रूज जहाज पर हंटावायरस के दूसरे मामले की पुष्टि की।
नया मामला एक डच महिला यात्री का है, जिनकी 27 अप्रैल को मृत्यु हो गई; इससे पहले एक डच दंपत्ति और एक जर्मन नागरिक की भी मौत हो चुकी है।
जहाज के दो क्रू सदस्य ( ब्रिटेन और नीदरलैंड के नागरिक) सांस की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।
एक ब्रिटिश नागरिक यात्री जोहानेसबर्ग के आईसीयू में इलाज करा रहा है।
जहाज पर अभी भी करीब 150 लोग मौजूद हैं; किसी अन्य में अभी तक लक्षण नहीं मिले हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पुष्टि की है कि अटलांटिक महासागर में एक डच क्रूज जहाज पर हंटावायरस संक्रमण का दूसरा मामला सामने आया है, जिससे जहाज पर कुल संक्रमित यात्रियों की संख्या दो हो गई है। डच क्रूज़ शिप ऑपरेटर ओशनवाइड एक्सपीडिशंस ने एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी। नया मामला एक डच महिला यात्री का है, जिनकी 27 अप्रैल को मृत्यु हो गई।

मृत्यु और संक्रमण का विवरण

कंपनी के बयान के अनुसार, इससे पहले एक डच दंपत्ति और एक जर्मन नागरिक की भी मौत हो चुकी है। जहाज पर अभी भी करीब 150 लोग मौजूद हैं। एक अन्य संक्रमित यात्री, जो ब्रिटेन का नागरिक है, जहाज छोड़कर दक्षिण अफ्रीका के जोहानेसबर्ग में आईसीयू में इलाज करा रहा है।

क्रू सदस्यों की स्थिति

सिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, जहाज के दो क्रू सदस्य अभी भी सांस से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनमें एक की हालत अपेक्षाकृत हल्की बताई गई है, जबकि दूसरे की स्थिति अधिक गंभीर है और दोनों को तत्काल चिकित्सा की आवश्यकता है। ये दोनों क्रू सदस्य ब्रिटेन और नीदरलैंड के नागरिक हैं। कंपनी ने बताया कि अभी तक किसी अन्य व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं।

हंटावायरस क्या है और कैसे फैलता है

हंटावायरस वायरसों का एक समूह है, जो आमतौर पर चूहों जैसे रोडेन्ट्स में पाया जाता है और इंसानों में गंभीर बीमारी उत्पन्न कर सकता है। यह संक्रमण मुख्यतः संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार के सीधे संपर्क में आने अथवा उनसे दूषित सतह को छूने से फैलता है। गौरतलब है कि इंसान से इंसान में इसका प्रसार बेहद दुर्लभ माना जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों, जंगलों, खेतों और फार्म जैसे स्थानों पर यह बीमारी अधिक देखी जाती है, क्योंकि वहाँ चूहों की संख्या अधिक होती है।

लक्षण और इन्क्यूबेशन अवधि

हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम (HPS) में शुरुआती लक्षणों में सिरदर्द, चक्कर आना, ठंड लगना, बुखार और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं। इसके साथ उल्टी, दस्त, जी मिचलाना और पेट दर्द जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं। बाद के चरण में अचानक सांस लेने में कठिनाई और रक्तचाप में गिरावट जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 2 से 4 सप्ताह बाद प्रकट होते हैं, हालाँकि कुछ मामलों में यह एक सप्ताह के भीतर या 8 सप्ताह बाद तक भी सामने आ सकते हैं।

आगे की स्थिति

फिलहाल जहाज पर स्वास्थ्य निगरानी जारी है और WHO की ओर से स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्री यात्राओं के दौरान इस तरह के संक्रमण की घटनाएँ असामान्य हैं और इसके स्रोत की जाँच अभी जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह वायरस आमतौर पर रोडेन्ट-संपर्क वाले स्थलीय वातावरण में पाया जाता है। जहाज पर संक्रमण के स्रोत की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है, जो इस मामले को और अधिक चिंताजनक बनाता है। गौरतलब है कि इंसान से इंसान में हंटावायरस का प्रसार दुर्लभ माना जाता है, फिर भी एक ही जहाज पर एकाधिक मामलों का सामने आना अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए गहन जाँच की माँग करता है। WHO और संबंधित देशों की स्वास्थ्य एजेंसियों को पारदर्शी तरीके से संक्रमण के स्रोत और प्रसार-मार्ग की जानकारी साझा करनी चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डच क्रूज शिप पर हंटावायरस के मामले कैसे सामने आए?
डच क्रूज़ शिप ऑपरेटर ओशनवाइड एक्सपीडिशंस के जहाज पर अटलांटिक महासागर में यात्रा के दौरान यात्रियों और क्रू सदस्यों में हंटावायरस संक्रमण के लक्षण पाए गए। WHO ने दूसरे मामले की पुष्टि की है और अब तक कई मौतें हो चुकी हैं।
हंटावायरस क्या है और यह इंसानों में कैसे फैलता है?
हंटावायरस वायरसों का एक समूह है जो मुख्यतः चूहों जैसे रोडेन्ट्स में पाया जाता है। यह संक्रमित चूहों के पेशाब, मल या लार के संपर्क में आने से इंसानों में फैलता है; इंसान से इंसान में इसका प्रसार बेहद दुर्लभ है।
हंटावायरस पल्मोनरी सिंड्रोम के लक्षण क्या हैं?
शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, ठंड लगना, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और पेट दर्द शामिल हैं। गंभीर अवस्था में सांस लेने में अचानक कठिनाई और रक्तचाप में गिरावट हो सकती है, जो जानलेवा हो सकती है।
जहाज पर अभी कितने लोग हैं और उनकी स्थिति क्या है?
जहाज पर अभी भी करीब 150 लोग मौजूद हैं। दो क्रू सदस्य सांस की गंभीर समस्याओं से पीड़ित हैं, जबकि एक ब्रिटिश नागरिक यात्री जोहानेसबर्ग के आईसीयू में इलाज करा रहा है। कंपनी के अनुसार अभी तक किसी अन्य में संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं।
हंटावायरस के लक्षण संपर्क के कितने दिन बाद दिखते हैं?
आमतौर पर हंटावायरस के लक्षण संपर्क में आने के 2 से 4 सप्ताह बाद प्रकट होते हैं। कुछ मामलों में यह एक सप्ताह के भीतर भी आ सकते हैं, जबकि कभी-कभी 8 सप्ताह बाद तक भी सामने आ सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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