दुनिया का सबसे बड़ा अपतटीय कनवर्टर स्टेशन 'हाईफंग चीशिन' चीन के यांगच्यांग पहुंचा, समुद्र में होगी स्थापना
सारांश
मुख्य बातें
चीन के क्वांगतोंग प्रांत के यांगच्यांग शहर स्थित छिंगचो अपतटीय पवन फार्म पर 4 जून को दुनिया का सबसे बड़ा अपतटीय कनवर्टर स्टेशन 'हाईफंग चीशिन' (अर्थात 'अपतटीय पवन का हृदय') पहुंचा। 1,000 से अधिक समुद्री मील की लंबी यात्रा पूरी करने के बाद यह स्टेशन अपने निर्धारित स्थान पर पहुंचा है, जहाँ इसकी अपतटीय बोया स्थापना की जाएगी।
क्या है 'हाईफंग चीशिन' और क्यों है यह खास
रिपोर्टों के अनुसार, 'हाईफंग चीशिन' दुनिया का पहला ±500 केवी/2000 मेगावाट लचीला डीसी अपतटीय कनवर्टर स्टेशन है। इसका समतलीय क्षेत्रफल एक मानक फुटबॉल मैदान के बराबर है, ऊंचाई लगभग 15 मंजिल के समान है और कुल वजन 25,000 टन है। इस विशालकाय संरचना को एक बड़े अर्ध-पनडुब्बी पोत पर लादकर लाया गया, जो एक सप्ताह की नौकायन के बाद छिंगचो समुद्री क्षेत्र में पूर्व निर्धारित स्थापना स्थान के निकट पहुंचा।
स्थापना की तकनीक
अत्यधिक भार को देखते हुए इसकी स्थापना में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उन्नत एकीकृत फ्लोटिंग स्थापना तकनीक का उपयोग किया जाएगा। 'हाईफंग चीशिन' को पाइप रैक पर स्थापित किया जाएगा और यह स्थायी रूप से समुद्र में ही रहेगा — यह इस परियोजना की तकनीकी विशिष्टता है।
बिजली उत्पादन और संचरण पर असर
स्थापना पूर्ण होने के बाद त्रि-घाटी परियोजना के यांगच्यांग छिंगचो में पाँचवें और सातवें चरण के अपतटीय पवन फार्म के 163 विंड टर्बाइन से उत्पन्न बिजली का यहाँ संग्रह, बूस्ट और एसी से डीसी रूपांतरण किया जाएगा। इसके बाद पनडुब्बी केबल के माध्यम से इसे स्थलीय विद्युत ग्रिड में भेजा जाएगा। इस प्रणाली के जरिए हर वर्ष लगभग 6 अरब किलोवाट-घंटे बिजली का संचरण संभव होगा।
वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में महत्व
यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के देश नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की होड़ में हैं। चीन का यह कदम अपतटीय पवन ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित करता है। गौरतलब है कि इस पैमाने का कोई भी लचीला डीसी अपतटीय कनवर्टर स्टेशन अब तक विश्व में स्थापित नहीं हुआ है। आने वाले समय में इस परियोजना की सफलता अन्य देशों के लिए एक मॉडल बन सकती है।