शी चिनफिंग ने कोलंबिया के नए राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला को दी बधाई, रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 29 जून 2025 को एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला को कोलंबिया का नया राष्ट्रपति बनने पर औपचारिक बधाई संदेश भेजा। इस संदेश में शी ने दोनों देशों के बीच 46 वर्षों की राजनयिक साझेदारी को रेखांकित करते हुए द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊँचाई पर ले जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
बधाई संदेश में क्या कहा शी ने
शी चिनफिंग ने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि चीन और कोलंबिया रणनीतिक साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि राजनयिक संबंधों की स्थापना के बाद से बीते 46 वर्षों में दोनों देशों के संबंध बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों की कसौटी पर खरे उतरे हैं और विकास की सकारात्मक गति बनाए रखी है।
शी ने कहा, 'मैं चीन-कोलंबिया संबंधों के विकास को बहुत महत्व देता हूँ और नवनिर्वाचित राष्ट्रपति एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला के साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच आदान-प्रदान और सहयोग को और गहरा करने, चीन-कोलंबिया रणनीतिक साझेदारी को एक नए स्तर पर ले जाने और दोनों देशों के लोगों को बेहतर लाभ पहुँचाने के लिए काम करने को तैयार हूँ।'
बेल्ट एंड रोड पहल में सहयोग की चर्चा
शी चिनफिंग ने विशेष रूप से 'बेल्ट एंड रोड' पहल के तहत संयुक्त निर्माण में हुई प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पहल में उच्च गुणवत्ता वाले सहयोग ने नई उपलब्धियाँ हासिल की हैं और दोनों देशों के लोगों के बीच मित्रता गहरी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब चीन लैटिन अमेरिका में अपनी कूटनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को व्यापक बना रहा है।
चीनी उप राष्ट्रपति ने भी भेजी बधाई
उसी दिन, 29 जून को, चीनी उप राष्ट्रपति हान चंग ने कोलंबिया के नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति जोसे मैनुअल रेस्ट्रेपो को बधाई संदेश भेजा। इससे स्पष्ट होता है कि बीजिंग ने कोलंबिया के नए नेतृत्व के साथ संबंधों को प्राथमिकता देने का संकेत दिया है।
आगे की राह
गौरतलब है कि कोलंबिया लैटिन अमेरिका के उन प्रमुख देशों में से एक है जिसके साथ चीन ने पिछले एक दशक में व्यापार और निवेश संबंधों को तेज़ी से विस्तार दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, नए राष्ट्रपति के कार्यकाल में बेल्ट एंड रोड पहल के तहत बुनियादी ढाँचे और व्यापार परियोजनाओं में और तेज़ी आने की संभावना है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक पारस्परिक विश्वास के इस नए अध्याय की शुरुआत भविष्य के द्विपक्षीय सहयोग की दिशा तय करेगी।