आईएईए की मध्यस्थता से जापोरिज्झिया परमाणु संयंत्र में बिजली लाइन मरम्मत शुरू, 23 जून तक युद्धविराम
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की मध्यस्थता से हुए एक सीमित क्षेत्रीय युद्धविराम के बाद 5 जून 2026 को जापोरिज्झिया परमाणु ऊर्जा संयंत्र की महत्वपूर्ण बाहरी बिजली लाइन की मरम्मत का काम शुरू हो गया। रूस के नियंत्रण वाले यूरोप के सबसे बड़े परमाणु संयंत्र में यह कदम संभावित परमाणु दुर्घटना के जोखिम को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
मरम्मत कार्य का विवरण
मरम्मत का काम 750 किलोवोल्ट क्षमता वाली 'डनिप्रोव्स्का' ट्रांसमिशन लाइन पर किया जा रहा है, जो 24 मार्च से बंद पड़ी थी। संयंत्र संचालक के अनुसार, यह लाइन बाहरी बिजली आपूर्ति प्रणाली का अहम हिस्सा है और इसकी बहाली से बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा परमाणु एवं विकिरण सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।
आईएईए के अनुसार, मरम्मत कार्य की तैयारी इसलिए चुनौतीपूर्ण रही क्योंकि बिजली लाइन को नुकसान नियंत्रण रेखा के निकट डनिप्रो नदी के ऊपर स्थित ऊँचे बिजली टावरों पर हुआ था।
युद्धविराम की पृष्ठभूमि
आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने रूस और यूक्रेन के बीच यह सीमित क्षेत्रीय युद्धविराम कराया है। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम के महानिदेशक एलेक्सी लिखाचेव ने बताया कि यह युद्धविराम 23 जून तक प्रभावी रहेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष के अंत से अब तक यह छठा अस्थायी युद्धविराम है जिसकी मध्यस्थता ग्रॉसी ने कराई है — सभी का उद्देश्य संयंत्र की सुरक्षित बिजली आपूर्ति और परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ड्रोन हमले और सुरक्षा चिंताएँ
30 मई को कथित तौर पर एक यूक्रेनी ड्रोन ने जापोरिज्झिया परमाणु संयंत्र की यूनिट-6 के टर्बाइन हॉल को निशाना बनाया था, जिसके बाद आईएईए विशेषज्ञों ने प्रभावित स्थल का निरीक्षण किया। लिखाचेव ने दावा किया है कि इस हमले में संयंत्र में तीन लोग घायल हुए हैं।
महानिदेशक ग्रॉसी ने ड्रोन हमले पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा था कि परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करना 'आग से खेलने' जैसा है और इससे बड़े हादसे का खतरा पैदा हो सकता है।
जापोरिज्झिया का वैश्विक महत्व
जापोरिज्झिया परमाणु संयंत्र यूरोप का सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र है। रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इसकी सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चिंता जताई जाती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब संघर्ष क्षेत्र में परमाणु सुरक्षा के मुद्दे पर वैश्विक दबाव लगातार बढ़ रहा है।
आगे की राह
मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद बिजली लाइन की बहाली से संयंत्र की परिचालन स्थिरता में सुधार अपेक्षित है। हालाँकि, 23 जून के बाद युद्धविराम की स्थिति और संयंत्र की दीर्घकालिक सुरक्षा पर अनिश्चितता बनी रहेगी।