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आईएईए पर राजनीतिक दबाव का आरोप, ईरान बोला — कूटनीतिक समाधान तभी संभव जब एजेंसी निष्पक्ष रहे

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आईएईए पर राजनीतिक दबाव का आरोप, ईरान बोला — कूटनीतिक समाधान तभी संभव जब एजेंसी निष्पक्ष रहे

सारांश

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने आईएईए पर सीधा आरोप लगाया — एजेंसी तकनीकी रिपोर्टें नहीं, राजनीतिक हथियार चला रही है। अमेरिका-इज़रायल के हमलों के परिणामों को ईरान की 'अनिश्चितता' बताना और 60% यूरेनियम संवर्धन को बिना कानूनी संदर्भ के उठाना — तेहरान इसे कूटनीति नहीं, दबाव की रणनीति मानता है।

मुख्य बातें

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने 6 जून 2026 को आईएईए पर राजनीतिक पूर्वाग्रह का आरोप लगाया।
गरीबाबादी ने कहा कि आईएईए प्रमुख राफेल ग्रोसी ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कमी के लिए अमेरिका और इज़रायल के हमलों को ज़िम्मेदार नहीं मानते।
आईएईए रिपोर्टों में 60% यूरेनियम संवर्धन का उल्लेख बिना स्पष्ट कानूनी संदर्भ के राजनीतिक कदम बताया गया।
एनपीटी में यूरेनियम संवर्धन की कोई प्रतिशत सीमा नहीं; सैन्य उपयोग न होना ही मुख्य मानदंड — ईरान का तर्क।
ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह शांतिपूर्ण बताया और कूटनीतिक समाधान के लिए आईएईए की निष्पक्षता को अनिवार्य शर्त बताया।

ईरान के विदेश मंत्रालय में कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने 6 जून 2026 को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) पर राजनीतिक पूर्वाग्रह का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि एजेंसी परमाणु विवाद के कूटनीतिक समाधान में सहभागी बनना चाहती है, तो उसे अपनी तकनीकी रिपोर्टों को 'राजनीतिक दबाव के हथियार' के रूप में इस्तेमाल करना बंद करना होगा।

मुख्य आरोप और तर्क

गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि निरीक्षण और सुरक्षा व्यवस्थाओं को तब तक सुदृढ़ नहीं किया जा सकता, जब तक निष्पक्षता, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन, देशों की संप्रभुता का सम्मान और निगरानी में शामिल परमाणु सुविधाओं पर हमलों की स्पष्ट निंदा सुनिश्चित न हो।

उन्होंने आईएईए प्रमुख राफेल ग्रोसी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कमी और अस्पष्टता की बात करते हैं, लेकिन यह स्वीकार नहीं करते कि इसकी मूल वजह अमेरिका और इज़रायल के हमले हैं।

हमलों के परिणामों को 'अनिश्चितता' बताने पर आपत्ति

गरीबाबादी ने तर्क दिया कि जिन परमाणु केंद्रों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी का दायित्व है, उन पर बमबारी करना, निरीक्षण की पहुँच और सुरक्षा को नष्ट करना, और फिर उन्हीं हमलों के परिणामों को 'अनिश्चितता' के रूप में ईरान के विरुद्ध प्रस्तुत करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।

उनके अनुसार, केवल सैन्य कार्रवाई, धमकियाँ और प्रस्ताव पारित करने से परमाणु सुरक्षा मज़बूत नहीं होती — असली मज़बूती तभी आती है जब सभी पक्ष निष्पक्ष रहें और नियमों का सम्मान किया जाए।

यूरेनियम संवर्धन और एनपीटी का कानूनी पक्ष

गरीबाबादी ने कहा कि आईएईए की रिपोर्टों में बार-बार 60 प्रतिशत यूरेनियम संवर्धन का उल्लेख करना और संभावित हथियार संबंधी परिदृश्य प्रस्तुत करना, बिना स्पष्ट कानूनी संदर्भ के, तकनीकी से अधिक राजनीतिक कदम प्रतीत होता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अप्रसार संधि (एनपीटी) में यूरेनियम संवर्धन के प्रतिशत की कोई निश्चित सीमा निर्धारित नहीं है। कानूनी दृष्टि से मुख्य मानदंड यह है कि परमाणु सामग्री और गतिविधियों का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए न किया जाए।

ईरान का पक्ष — शांतिपूर्ण कार्यक्रम का दावा

गरीबाबादी ने दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है और देश ने सदैव अपनी कानूनी प्रतिबद्धताओं के दायरे में काम किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आईएईए प्रमुख अमेरिका और पश्चिमी देशों के प्रभाव में कार्य कर रहे हैं, जिससे एजेंसी की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगता है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी शक्तियों के बीच परमाणु वार्ता पहले से ही गतिरोध में है। गरीबाबादी का यह बयान संकेत देता है कि तेहरान किसी भी कूटनीतिक प्रक्रिया में आईएईए की भूमिका को तब तक स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं, जब तक एजेंसी अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता नहीं लाती।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित कानूनी-कूटनीतिक तर्क है जो आईएईए की संस्थागत विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। विडंबना यह है कि एजेंसी जिन परमाणु सुविधाओं की निगरानी करती है, उन पर हुए हमलों की जवाबदेही को लेकर उसकी चुप्पी वास्तव में उसकी निष्पक्षता पर संदेह को बल देती है। 60% संवर्धन को बार-बार उठाना तकनीकी रूप से एनपीटी का उल्लंघन नहीं है — यह बात पश्चिमी मीडिया में प्रायः अनदेखी रह जाती है। असली प्रश्न यह है कि क्या आईएईए किसी भी संभावित परमाणु समझौते में विश्वसनीय मध्यस्थ की भूमिका निभा सकती है, जब एक प्रमुख पक्ष उसकी निष्पक्षता को ही चुनौती दे रहा हो।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरान ने आईएईए पर क्या आरोप लगाए हैं?
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने आरोप लगाया है कि आईएईए अपनी तकनीकी रिपोर्टों को राजनीतिक दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है और अमेरिका व पश्चिमी देशों के प्रभाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एजेंसी ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कमी के लिए अमेरिका-इज़रायल के हमलों को ज़िम्मेदार नहीं मानती।
ईरान 60% यूरेनियम संवर्धन को गैरकानूनी क्यों नहीं मानता?
गरीबाबादी के अनुसार, अप्रसार संधि (एनपीटी) में यूरेनियम संवर्धन के प्रतिशत की कोई निश्चित सीमा निर्धारित नहीं है। कानूनी दृष्टि से मुख्य मानदंड केवल यह है कि परमाणु सामग्री और गतिविधियों का उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए न किया जाए।
ईरान कूटनीतिक समाधान के लिए क्या शर्त रख रहा है?
ईरान ने स्पष्ट किया है कि कूटनीतिक समाधान तभी संभव है जब आईएईए निष्पक्ष रहे, अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करे, देशों की संप्रभुता का सम्मान करे और परमाणु सुविधाओं पर हुए हमलों की स्पष्ट निंदा करे।
आईएईए प्रमुख राफेल ग्रोसी पर ईरान की क्या आपत्ति है?
गरीबाबादी ने आरोप लगाया कि ग्रोसी ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कमी और अस्पष्टता की बात करते हैं, लेकिन यह नहीं बताते कि इसका कारण अमेरिका और इज़रायल के हमले हैं। ईरान का कहना है कि एजेंसी हमलों के परिणामों को 'अनिश्चितता' बताकर ईरान पर दोष मढ़ रही है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम किस स्थिति में है?
ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और देश ने हमेशा अपनी कानूनी प्रतिबद्धताओं के दायरे में काम किया है। हालाँकि, आईएईए की रिपोर्टों में 60% यूरेनियम संवर्धन और कार्यक्रम में कमी का उल्लेख किया जाता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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