ईरान का साफ इनकार: अंतिम परमाणु समझौते से पहले IAEA निरीक्षण नहीं
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने 24 जून 2025 को स्पष्ट किया कि अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को ईरान के परमाणु स्थलों तक पहुँच केवल अमेरिका के साथ 'अंतिम समझौते' के बाद ही दी जाएगी। तेहरान की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया था कि ईरान ने IAEA निरीक्षकों को आमंत्रित करने पर सहमति जता दी है।
गरीबाबादी का एक्स पर बयान
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि IAEA निरीक्षकों की पहुँच और परमाणु सामग्री से जुड़े मुद्दों को 'केवल अंतिम समझौते के ढाँचे के भीतर ही देखा और सुलझाया जाएगा।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि 'दूसरा पक्ष सभी प्रतिबंधों को समाप्त करने के लिए वास्तविक कदम उठाए।'
गरीबाबादी ने यह भी खुलासा किया कि स्विट्ज़रलैंड में हुई वार्ताओं के दौरान ईरान के किसी भी अधिकारी की IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी से मुलाकात नहीं हुई, जबकि ईरान ने इसके लिए अनुरोध किया था।
IAEA प्रमुख का टोक्यो में बयान
दूसरी ओर, टोक्यो में एक पत्रकार वार्ता के दौरान IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी ने कहा कि ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण 'होकर रहेगा।' उन्होंने कहा, 'यह आज हो, परसों हो, एक हफ्ते या दस दिनों में हो — यह महत्वपूर्ण है, लेकिन अनिवार्य नहीं। यह निश्चित रूप से होगा।' ग्रोसी का यह बयान तेहरान के रुख से सीधे टकराता है।
अमेरिका और ईरान के दावों में विरोधाभास
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया था कि ईरान ने IAEA निरीक्षकों को फिर से देश में आमंत्रित करने पर सहमति जताई है। परंतु ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ग्रोसी के साथ कोई बैठक नहीं हुई है और निरीक्षण के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा भी तय नहीं की गई है। गौरतलब है कि यह परस्पर-विरोधी दावों का सिलसिला कूटनीतिक अनिश्चितता को और गहरा करता है।
पृष्ठभूमि: जून 2025 के संघर्ष के बाद की स्थिति
जून 2025 में हुए सैन्य संघर्ष के बाद से तेहरान ने IAEA को उन संवर्धन स्थलों का निरीक्षण करने से रोक रखा है, जहाँ कथित तौर पर इतना उच्च स्तर का समृद्ध यूरेनियम जमा है कि ईरान चाहे तो लगभग 10 परमाणु हथियार बना सकता है। हालाँकि, ईरान लंबे समय से यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक अमेरिका-ईरान के बीच प्रतिबंधों और परमाणु सीमाओं पर कोई ठोस 'अंतिम समझौता' नहीं होता, तब तक IAEA निरीक्षण की राह आसान नहीं होगी। यह स्थिति वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था के लिए एक गंभीर परीक्षण बनी हुई है, और आने वाले हफ्तों में कूटनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।