आईएईए प्रमुख ग्रोसी का बड़ा बयान: ईरान के परमाणु स्थलों का निरीक्षण तय, अंतरिम समझौते में स्पष्ट उल्लेख
सारांश
मुख्य बातें
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक राफेल मारियानो ग्रोसी ने 24 जून को टोक्यो में स्पष्ट किया कि आईएईए के निरीक्षक ईरान के परमाणु संवर्धन स्थलों का दौरा करेंगे। यह अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते का अनिवार्य हिस्सा है। ग्रोसी ने जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु ऊर्जा संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बयान दिया, जो अब तक का सबसे सीधा और स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
समझौते में क्या है
ग्रोसी ने पत्रकारों को बताया, 'मैं राजनीतिक बयानों को समझ सकता हूं, वे वास्तविकता का हिस्सा हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।' उन्होंने आगे कहा कि इस समझौते में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि परमाणु सामग्री से जुड़े सभी कार्य आईएईए की निगरानी में किए जाएंगे।
ग्रोसी ने निरीक्षण की समय-सीमा को लेकर कहा, 'यह परसों हो या एक सप्ताह बाद या दस दिनों में, यह महत्वपूर्ण है, लेकिन अनिवार्य नहीं। यह प्रक्रिया निश्चित रूप से होगी।'
परस्पर विरोधी बयानों के बीच ग्रोसी की स्थिति
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने दावा किया है कि ईरान ने आईएईए निरीक्षकों को पुनः देश में आमंत्रित करने पर सहमति दी है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान की ग्रोसी के साथ कोई बैठक नहीं हुई और निरीक्षण के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा तय नहीं है। हालांकि ईरान ने भविष्य में ऐसी संभावना से इनकार नहीं किया है। ग्रोसी का बयान इन्हीं परस्पर विरोधी दावों के बीच एक महत्वपूर्ण संतुलन बिंदु के रूप में देखा जा रहा है।
पृष्ठभूमि: पिछले जून से बंद है निरीक्षण
गौरतलब है कि पिछले जून में हुए युद्ध के बाद से तेहरान ने आईएईए को उन संवर्धन स्थलों का निरीक्षण करने से रोक रखा था, जहां कथित तौर पर इतना उच्च स्तर का समृद्ध यूरेनियम जमा है कि लगभग 10 परमाणु हथियार बनाए जा सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था पर गंभीर दबाव है। हालांकि, ईरान लंबे समय से यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है।
आईएईए की भूमिका क्यों अहम है
आईएईए संयुक्त राष्ट्र की वह एजेंसी है जो ईरान के परमाणु भंडार की वास्तविक स्थिति निर्धारित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है। किसी भी दीर्घकालिक परमाणु समझौते की विश्वसनीयता आईएईए की स्वतंत्र निगरानी पर ही टिकी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि निरीक्षण की अनुमति मिलना किसी भी स्थायी कूटनीतिक समाधान की दिशा में पहला और अनिवार्य कदम है।
आगे क्या होगा
ग्रोसी के बयान के अनुसार निरीक्षण की प्रक्रिया निश्चित रूप से होगी, भले ही सटीक तारीख अभी तय नहीं है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों द्वारा हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन इस प्रक्रिया का कानूनी आधार बनता है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि ईरान कब और किन शर्तों पर आईएईए टीम को अपने संवर्धन स्थलों तक पहुंचने देता है।