ईरान का स्पष्ट संदेश: प्रतिबंध हटें, वादे पूरे हों — तभी परमाणु ठिकानों तक पहुँच मिलेगी
सारांश
मुख्य बातें
ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने 24 जून 2026 को साफ कर दिया कि अमेरिका और इज़रायल के हमलों से प्रभावित ईरानी परमाणु ठिकानों तक किसी भी बाहरी पक्ष को पहुँच देने का सवाल तभी उठेगा, जब एक अंतिम समझौता हो और दूसरा पक्ष ठोस व्यावहारिक कदम उठाए — जिसमें सभी प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाना और किए गए वादों को पूरा करना शामिल है। यह बयान ऐसे समय आया है जब कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा था कि ईरान ने परमाणु स्थलों के निरीक्षण पर सहमति दे दी है।
गरीबाबादी का स्पष्ट रुख
काजेम गरीबाबादी, जो ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रभारी उप विदेश मंत्री हैं, ने बुधवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'जिन ठिकानों पर हमला हुआ है या वहाँ मौजूद परमाणु सामग्री तक पहुँच देने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी के साथ स्विट्जरलैंड में कोई बैठक नहीं हुई।
गरीबाबादी ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों पर निर्णय केवल किसी अंतिम समझौते के ढाँचे में लिया जाएगा। इसके लिए दूसरे पक्ष को प्रतिबंध पूरी तरह समाप्त करने और उससे जुड़े सभी वादों को पूरा करने की शर्त पूरी करनी होगी।
मीडिया के ज़रिए 'माहौल बनाने' पर आपत्ति
गरीबाबादी ने मीडिया रिपोर्टों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि 'मीडिया में शोर मचाकर माहौल बनाओ और फिर हालात को अपने हिसाब से तय करो' — यह नीति स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार, राजनीतिक नतीजे मीडिया के ज़रिए दबाव बनाकर नहीं, बल्कि ईमानदार कूटनीतिक प्रक्रिया से ही हासिल हो सकते हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से और IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी के बयानों के आधार पर यह दावा किया गया था कि ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों का दौरा करने की अनुमति देने पर सहमति जता दी है।
पृष्ठभूमि: हमले और परमाणु तनाव
हाल के महीनों में अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए कथित हमलों के बाद से इन स्थलों की स्थिति और वहाँ मौजूद परमाणु सामग्री को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता है। IAEA लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम की निगरानी के लिए निरीक्षण अधिकारों की माँग करती रही है, लेकिन तेहरान ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई भी पहुँच बिना शर्त नहीं दी जाएगी।
यह ऐसे समय में आया है जब ईरान और पश्चिमी देशों के बीच परमाणु वार्ता एक नाज़ुक मोड़ पर है और किसी भी बड़े समझौते की संभावना अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
आगे क्या होगा
ईरान के इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि परमाणु ठिकानों तक पहुँच का रास्ता पहले प्रतिबंधों की समाप्ति और कूटनीतिक वादों की पूर्ति से होकर गुज़रेगा। विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान तेहरान की सौदेबाज़ी की स्थिति को मज़बूत करने का प्रयास है। अब सभी की नज़रें इस बात पर हैं कि क्या अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश ईरान की इन शर्तों पर कोई लचीलापन दिखाने को तैयार होंगे।