छेंगा पहाड़: उड़ीसा का प्राचीन प्राकृतिक मेहराब, जो डायनासोर के समय से है
सारांश
Key Takeaways
- छेंगा पहाड़ का प्राकृतिक मेहराब डायनासोर के समय का है।
- यह मेहराब लगभग १६ करोड़ वर्ष पुराना है।
- इसकी आकृति अनोखी और दुर्लभ है।
- यह स्थान भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण द्वारा खोजा गया है।
- यहाँ पहुँचने के लिए ट्रैकिंग जरूरी है।
नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उड़ीसा एक अद्भुत राज्य है, जहाँ नीलम नीला सागर, हरी-भरी पहाड़ियाँ और गोवा जैसे समुद्र तटों का आनंद लिया जा सकता है। लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते कि यहाँ एक प्राचीन खजाना छिपा हुआ है।
हम बात कर रहे हैं छेंगा पहाड़ की, जहाँ एक अद्भुत प्राकृतिक मेहराब है। हर साल लाखों पर्यटक इस मेहराब को देखने के लिए यहाँ आते हैं और हरे-भरे नजारों का आनंद लेते हैं।
छेंगा पहाड़ अपने स्वाभाविक मेहराब के लिए मशहूर है, जिसकी आकृति अनोखी है। माना जाता है कि यहाँ की चट्टानें लगभग १६ करोड़ वर्ष पुरानी हैं, जो डायनासोर के समय से संबंधित हैं। समय के बदलावों के बावजूद, यह चट्टान आज भी अपनी अद्वितीय आकृति बनाए हुए है। यह मेहराब वन प्रभाग के कनिका पर्वतमाला में स्थित है और इसे भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने खोजा था, साथ ही इसे भू-विरासत का दर्जा भी दिया गया है।
भूवैज्ञानिकों के अनुसार, इस अंडाकार मेहराब की आधार लंबाई ३० मीटर और ऊंचाई १२ मीटर है। प्राकृतिक मेहराब के आले की अधिकतम ऊंचाई ७ मीटर और चौड़ाई १५ मीटर है, जो इसे अन्य चट्टानों से अलग बनाती है। यह मेहराब न केवल अपने निर्माण के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसके साथ हमारे पुराणों का भी संबंध है।
कहा जाता है कि भगवान राम ने स्वर्ण हिरण के शिकार के दौरान जो बाण चलाया, उसने इस चट्टान में एक छिद्र बना दिया, जिसे मेहराब के रूप में देखा जाता है। छेंगा पहाड़ का यह मेहराब सुंदरगढ़ जिले के हेमगिर में स्थित है, जहाँ पहुँचने के लिए ट्रैकिंग करनी पड़ती है और आसपास कोई सुविधा नहीं होती।
अगर आप इस पहाड़ी क्षेत्र का दौरा करना चाहते हैं, तो अपनी आवश्यक सामग्री साथ लेकर जाएं। यहाँ ट्रैकिंग करने के साथ-साथ आपको प्रकृति के अद्भुत दृश्य भी देखने को मिलेंगे। हालाँकि, बारिश के मौसम में यहाँ न आने की सलाह दी जाती है और अकेले जाने से भी बचें।