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मुँह के छाले और कान का दर्द: 'रेफर्ड पेन' क्यों होता है और कब डॉक्टर के पास जाएँ

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मुँह के छाले और कान का दर्द: 'रेफर्ड पेन' क्यों होता है और कब डॉक्टर के पास जाएँ

सारांश

मुँह का छाला और कान का दर्द — दोनों अलग नहीं, बल्कि जुड़े हुए हैं। 'रेफर्ड पेन' की वजह से मुँह, गले और कान की साझा तंत्रिकाएँ दर्द को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचा देती हैं। जानिए कब यह सामान्य है और कब यह किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है।

मुख्य बातें

मुँह के छाले और कान के दर्द का संबंध रेफर्ड पेन से होता है — मुँह, गले और कान की तंत्रिकाएँ आपस में जुड़ी होती हैं।
छाला जीभ के पीछे , मुँह के पिछले हिस्से या गले के निकट हो तो कान में दर्द अधिक महसूस होता है।
कान से पानी/पस निकलना , सुनाई कम देना , बुखार या सूजन होने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें।
राहत के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर कुल्ला करें; तीखा, खट्टा और गर्म खाना कुछ दिन टालें।
बार-बार छाले होने पर तनाव और विटामिन की कमी की जाँच कराना ज़रूरी है।

मुँह में छाले होने पर कान में दर्द महसूस होना एक सामान्य लेकिन अक्सर अनदेखी जाने वाली स्थिति है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे रेफर्ड पेन नामक एक शारीरिक प्रक्रिया जिम्मेदार होती है, जिसमें शरीर के एक हिस्से का दर्द किसी दूसरे हिस्से में महसूस होता है। यह स्थिति विशेष रूप से तब उत्पन्न होती है जब छाला जीभ के पीछे, मुँह के पिछले हिस्से या गले के निकट हो।

रेफर्ड पेन क्या है और यह कैसे काम करता है

हमारे मुँह, गले और कान के आसपास की तंत्रिकाएँ (नसें) आपस में गहराई से जुड़ी होती हैं। जब मुँह के किसी हिस्से में छाला, सूजन या जलन होती है, तो उस स्थान से उत्पन्न दर्द का संकेत इन साझा तंत्रिका मार्गों के ज़रिए कान तक पहुँच सकता है। इसी को चिकित्सा भाषा में 'रेफर्ड पेन' कहा जाता है।

यह ऐसे समय में समझना ज़रूरी है जब बहुत से लोग कान के दर्द को सीधे कान का संक्रमण मान लेते हैं और गलत उपचार शुरू कर देते हैं। यदि छाले के ठीक होने के साथ-साथ कान का दर्द भी कम हो जाए, तो यह इस बात का संकेत है कि दोनों का स्रोत एक ही था।

कान के दर्द की अन्य संभावित वजहें

विशेषज्ञों के अनुसार, कान में दर्द केवल मुँह के छालों से नहीं, बल्कि कई अन्य कारणों से भी हो सकता है। कान में संक्रमण, दाँत की समस्या, मसूड़ों की बीमारी और गले में दर्द — ये सभी कान तक दर्द पहुँचाने में सक्षम हैं।

गौरतलब है कि यदि कान के दर्द के साथ दाँत में तेज़ पीड़ा हो, निगलने पर तकलीफ बढ़े, कान से पानी या पस निकले, सुनाई कम दे, बुखार आए या कान के आसपास सूजन दिखे — तो ये लक्षण कान की स्वतंत्र समस्या की ओर इशारा करते हैं और तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना आवश्यक है।

छाले के दौरान खान-पान में सावधानी

छाले के दौरान खाने-पीने की आदतों में बदलाव से दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। तीखा, खट्टा, नमकीन और अत्यधिक गर्म भोजन कुछ दिनों के लिए टालना उचित रहता है, क्योंकि ये छाले में जलन को बढ़ा देते हैं।

इसके बजाय नरम आहार और सामान्य या ठंडे तापमान के पेय लेने की सलाह दी जाती है। मुलायम ब्रश से दाँत साफ करें ताकि छाले पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

घरेलू उपाय और राहत के तरीके

घर पर राहत के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर कुल्ला करना एक प्रभावी उपाय माना जाता है। पानी को मुँह में अच्छी तरह घुमाकर बाहर निकाल दें — यह छाले की सूजन और जलन को कम करने में सहायक हो सकता है।

हालाँकि, ये उपाय अस्थायी राहत के लिए हैं। यदि छाला एक से दो सप्ताह में ठीक न हो तो किसी डॉक्टर या डेंटिस्ट से मिलना ज़रूरी है।

बार-बार छाले होने के कारण और आगे की राह

बार-बार छाले होने की वजह केवल मसालेदार खाना नहीं होती। तनाव, शरीर में विटामिन और अन्य पोषक तत्वों की कमी भी इसके पीछे हो सकती है। ऐसे में किसी योग्य चिकित्सक से जाँच कराकर मूल कारण जानना दीर्घकालिक समाधान की दिशा में पहला कदम है।

यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब स्व-चिकित्सा (self-medication) की प्रवृत्ति बढ़ रही है और लोग बिना सही निदान के दवाइयाँ लेने लगते हैं। सही जानकारी और समय पर चिकित्सीय परामर्श ही इस समस्या का स्थायी हल है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'रेफर्ड पेन' की अवधारणा यह स्पष्ट करती है कि शरीर के विभिन्न अंग तंत्रिका तंत्र के ज़रिए कितनी गहराई से जुड़े हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि स्व-चिकित्सा की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण लोग कान के दर्द को सीधे कान का संक्रमण मान लेते हैं और बिना जाँच के एंटीबायोटिक लेने लगते हैं। बार-बार छाले होने को केवल 'खान-पान की गड़बड़ी' बताकर टाल देना भी सही नहीं — इसके पीछे पोषण की कमी या तनाव जैसी गहरी वजहें हो सकती हैं जिन पर ध्यान देना ज़रूरी है। सटीक निदान के बिना उपचार न केवल अप्रभावी है, बल्कि कभी-कभी नुकसानदेह भी हो सकता है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुँह में छाले होने पर कान में दर्द क्यों होता है?
मुँह, गले और कान की तंत्रिकाएँ आपस में जुड़ी होती हैं, इसलिए छाले का दर्द इन साझा तंत्रिका मार्गों के ज़रिए कान तक पहुँच सकता है — इसे चिकित्सा भाषा में 'रेफर्ड पेन' कहते हैं। यह विशेष रूप से तब होता है जब छाला जीभ के पीछे, मुँह के पिछले हिस्से या गले के निकट हो।
कैसे पता चलेगा कि कान का दर्द छाले की वजह से है या कान के संक्रमण से?
यदि कान का दर्द छाले के साथ शुरू हुआ हो और छाले के ठीक होने पर कम हो जाए, तो यह रेफर्ड पेन की संभावना है। लेकिन अगर कान से पानी या पस निकले, सुनाई कम दे, बुखार आए या कान के आसपास सूजन हो, तो यह कान की अलग समस्या हो सकती है और तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए।
मुँह के छाले में घर पर क्या करें?
एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक मिलाकर कुल्ला करने से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही तीखा, खट्टा, नमकीन और अत्यधिक गर्म खाना कुछ दिनों के लिए टालें और मुलायम ब्रश से दाँत साफ करें।
बार-बार मुँह में छाले क्यों होते हैं?
बार-बार छाले होने की वजह केवल मसालेदार खाना नहीं होती — तनाव और शरीर में विटामिन व अन्य पोषक तत्वों की कमी भी इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं। ऐसे में किसी डॉक्टर या डेंटिस्ट से जाँच कराकर मूल कारण जानना ज़रूरी है।
छाले होने पर कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए?
यदि छाला एक से दो सप्ताह में ठीक न हो, कान में लगातार दर्द बना रहे, बुखार आए, निगलने में तकलीफ हो या कान से असामान्य स्राव हो, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। इन स्थितियों में स्व-चिकित्सा से बचना ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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