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मुँह के छाले और कान का दर्द: 'रेफर्ड पेन' का विज्ञान और राहत के उपाय

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मुँह के छाले और कान का दर्द: 'रेफर्ड पेन' का विज्ञान और राहत के उपाय

सारांश

मुँह का छाला और कान का दर्द — दोनों एक-दूसरे से जुड़े हो सकते हैं। जीभ या गले के पास छाला होने पर 'रेफर्ड पेन' के ज़रिये दर्द कान तक पहुँचता है। जानें यह विज्ञान क्या कहता है, कब डॉक्टर ज़रूरी है और घर पर कैसे मिले राहत।

मुख्य बातें

मुँह के जीभ के पीछे या गले के पास छाला होने पर कान में दर्द महसूस हो सकता है।
इसे चिकित्सा विज्ञान में 'रेफर्ड पेन' कहते हैं — मुँह, गले और कान की तंत्रिकाएँ आपस में जुड़ी होती हैं।
छाला ठीक होने पर यदि कान का दर्द भी कम हो, तो दोनों का संबंध संभव है; लगातार कान दर्द पर अलग जाँच ज़रूरी है।
तीखा, खट्टा, बहुत गर्म खाना छाले की जलन बढ़ाता है — नरम भोजन और गुनगुने नमक-पानी से कुल्ला राहत दे सकता है।
बार-बार छाले होने पर तनाव, विटामिन B12 या आयरन की कमी भी ज़िम्मेदार हो सकती है — डॉक्टर या डेंटिस्ट से परामर्श लें।

मुँह में छाला होना एक सामान्य समस्या मानी जाती है, लेकिन जब यह छाला जीभ के पिछले हिस्से, मुँह की भीतरी दीवार या गले के निकट होता है, तो खाने-पीने और बोलने के साथ-साथ कान में भी तीव्र दर्द महसूस हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस अनुभव का कारण कान का कोई स्वतंत्र संक्रमण नहीं, बल्कि तंत्रिका-तंत्र की एक विशेष प्रक्रिया होती है।

रेफर्ड पेन: दर्द का वैज्ञानिक कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, मुँह, गले और कान के आसपास की तंत्रिकाएँ (नर्व्स) आपस में गहराई से जुड़ी होती हैं। जब मुँह के किसी हिस्से में छाला, सूजन या जलन होती है, तो उस स्थान से उठने वाले दर्द के संकेत इन साझा तंत्रिका मार्गों के ज़रिये कान तक पहुँच जाते हैं। चिकित्सा विज्ञान में इसे 'रेफर्ड पेन' कहा जाता है — अर्थात् वह दर्द जो उत्पत्ति-स्थल से दूर किसी अन्य अंग में महसूस होता है।

गौरतलब है कि यह स्थिति विशेष रूप से तब उभरती है जब छाला जीभ के पीछे, मुँह के पिछले भाग या गले के समीप हो। इस क्षेत्र में मौजूद तंत्रिकाएँ सीधे कान से जुड़ी होती हैं, जिससे दर्द का भ्रम पैदा होता है।

कब समझें कि दर्द छाले से है, कब नहीं

यदि कान का दर्द छाले के प्रकट होने के साथ शुरू हुआ हो और छाला ठीक होने पर धीरे-धीरे कम होने लगे, तो यह 'रेफर्ड पेन' की संभावना को इंगित करता है। हालाँकि, यदि कान में लगातार और तीव्र दर्द बना रहे, तो केवल छाले को कारण मान लेना उचित नहीं होगा।

कान के दर्द के अन्य कारणों में कान का संक्रमण, दाँत की समस्या, मसूड़ों की सूजन और गले में दर्द भी शामिल हो सकते हैं। यदि कान से पानी या पस निकले, सुनाई कम दे, बुखार आए या कान के आसपास सूजन हो, तो ये संकेत स्वतंत्र कान-रोग की ओर इशारा करते हैं और तुरंत चिकित्सक से परामर्श आवश्यक है।

छाले के दौरान खान-पान में सावधानी

छाले की अवस्था में तीखा, खट्टा, अत्यधिक नमकीन और बहुत गर्म भोजन कुछ दिनों के लिए टालना बेहतर रहता है, क्योंकि ये पदार्थ छाले में जलन को और बढ़ा सकते हैं। इसके बजाय नरम खाना और सामान्य तापमान के पेय पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है। दाँत साफ करते समय मुलायम ब्रश का उपयोग करें ताकि छाले पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

घरेलू उपाय और राहत के तरीके

घर पर राहत के लिए एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक घोलकर कुल्ला करना लाभदायक हो सकता है। पानी को मुँह में अच्छी तरह घुमाकर बाहर निकाल दें। यह प्रक्रिया छाले की वजह से होने वाली तकलीफ को कुछ हद तक कम करने में सहायक मानी जाती है।

यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये उपाय केवल हल्के और सामान्य छालों के लिए हैं। गंभीर या बार-बार होने वाले छालों में चिकित्सीय सलाह अनिवार्य है।

बार-बार छाले होने के कारण और आगे क्या करें

यदि किसी व्यक्ति को बार-बार छाले होते हैं, तो इसका कारण केवल मसालेदार भोजन नहीं होता। तनाव, शरीर में विटामिन B12, आयरन या अन्य पोषक तत्वों की कमी भी इस समस्या से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर या दंत चिकित्सक (डेंटिस्ट) से परामर्श लेकर मूल कारण की जाँच करवाना उचित है, ताकि दीर्घकालिक समाधान मिल सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिससे वे अनावश्यक रूप से कान के इलाज पर ध्यान केंद्रित कर देते हैं। 'रेफर्ड पेन' की अवधारणा को लेकर आम जागरूकता बेहद कम है, और यही कारण है कि लोग गलत दिशा में उपचार खोजते हैं। इस विषय में स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाना ज़रूरी है — विशेषकर यह समझाना कि शरीर के एक हिस्से का दर्द दूसरे हिस्से में क्यों महसूस हो सकता है। साथ ही, बार-बार होने वाले छालों को 'सामान्य' मानकर नज़रअंदाज़ करना उचित नहीं, क्योंकि ये पोषण-संबंधी कमियों या तनाव के संकेत हो सकते हैं।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुँह के छाले होने पर कान में दर्द क्यों होता है?
मुँह, गले और कान की तंत्रिकाएँ आपस में जुड़ी होती हैं, इसलिए छाले से उठने वाला दर्द का संकेत कान तक पहुँच सकता है — इसे 'रेफर्ड पेन' कहते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से तब होती है जब छाला जीभ के पीछे, मुँह के पिछले हिस्से या गले के पास हो।
रेफर्ड पेन क्या होता है?
'रेफर्ड पेन' वह दर्द है जो शरीर के एक हिस्से में उत्पन्न होता है, लेकिन किसी दूसरे हिस्से में महसूस होता है। मुँह और कान के मामले में साझा तंत्रिका मार्गों के कारण छाले का दर्द कान में अनुभव हो सकता है।
कान के दर्द के लिए डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि कान से पानी या पस निकले, सुनाई कम हो, बुखार आए, कान के आसपास सूजन हो या छाला ठीक होने के बाद भी कान का दर्द बना रहे, तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। ऐसे लक्षण स्वतंत्र कान-रोग की ओर संकेत करते हैं।
छाले के दर्द में घर पर क्या राहत मिल सकती है?
एक गिलास गुनगुने पानी में आधा चम्मच नमक घोलकर कुल्ला करने से छाले की तकलीफ में राहत मिल सकती है। साथ ही तीखा, खट्टा, बहुत गर्म और नमकीन खाना कुछ दिनों के लिए छोड़ दें और नरम भोजन लें।
बार-बार मुँह में छाले होने का क्या कारण हो सकता है?
बार-बार छाले होने का कारण केवल मसालेदार भोजन नहीं होता — तनाव, विटामिन B12, आयरन या अन्य पोषक तत्वों की कमी भी इससे जुड़ी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर या दंत चिकित्सक से परामर्श लेकर मूल कारण की जाँच करवाना उचित है।
राष्ट्र प्रेस
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