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पर्वतासन के चमत्कारी फायदे: हड्डियां मजबूत, मन शांत और पाचन दुरुस्त — जानें सही तरीका

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पर्वतासन के चमत्कारी फायदे: हड्डियां मजबूत, मन शांत और पाचन दुरुस्त — जानें सही तरीका

सारांश

पर्वतासन एक प्राचीन भारतीय योगासन है जो हड्डियां मजबूत करता है, पाचन सुधारता है और मानसिक तनाव घटाता है। आयुष मंत्रालय ने इसे सरल व प्रभावी बताया है। रोज 5-10 मिनट का अभ्यास शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखता है।

मुख्य बातें

पर्वतासन एक प्राचीन भारतीय योगासन है जो शरीर को पहाड़ जैसी मजबूत और स्थिर मुद्रा में रखता है।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने इसे सरल, प्रभावी और शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए उपयुक्त योगासन घोषित किया है।
नियमित अभ्यास से पैरों, जांघों, पीठ, कंधों की मांसपेशियां और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
यह आसन पाचन तंत्र को सक्रिय करता है और शरीर की मुद्रा (Posture) सुधारता है।
मानसिक रूप से यह एकाग्रता बढ़ाता है और तनाव-चिंता को कम करता है — छात्रों व कामकाजी लोगों के लिए विशेष लाभकारी।
गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या या हालिया सर्जरी की स्थिति में इस आसन से बचना चाहिए।

नई दिल्ली, 21 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पर्वतासन — योग का वह सरल किंतु शक्तिशाली आसन है जो हड्डियों की मजबूती, मानसिक शांति और बेहतर पाचन तीनों एक साथ देता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इसे विशेष रूप से प्रभावी और शुरुआती अभ्यासकर्ताओं के लिए उपयुक्त योगासन के रूप में मान्यता दी है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जब हर दूसरा व्यक्ति थकान, तनाव और पीठ दर्द से जूझ रहा है, तब यह प्राचीन भारतीय आसन एक प्राकृतिक और निःशुल्क समाधान बनकर उभरा है।

क्या है पर्वतासन और इसका अर्थ

पर्वतासन दो संस्कृत शब्दों से बना है — 'पर्वत' अर्थात पहाड़ और 'आसन' अर्थात मुद्रा। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति एक ऊंचे, स्थिर और मजबूत पहाड़ जैसी हो जाती है। यही स्थिरता इस आसन की पहचान और शक्ति दोनों है।

यह आसन उन लोगों के लिए आदर्श है जो योग की दुनिया में अभी-अभी कदम रख रहे हैं। रोजाना केवल 5 से 10 मिनट के अभ्यास से इसके सकारात्मक परिणाम महसूस किए जा सकते हैं।

शारीरिक लाभ: मांसपेशियों से लेकर रीढ़ तक

आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पर्वतासन के नियमित अभ्यास से पैरों, जांघों, पीठ और कंधों की मांसपेशियां सुदृढ़ होती हैं। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा और लचीला बनाए रखने में विशेष रूप से सहायक है।

इस आसन के दौरान पेट की मांसपेशियों पर प्राकृतिक दबाव पड़ता है, जिससे वे सक्रिय होती हैं और पाचन तंत्र में उल्लेखनीय सुधार आता है। नियमित अभ्यास से शरीर की मुद्रा (Posture) सुधरती है और व्यक्ति की लंबाई भी दिखने में अधिक लगती है।

गौरतलब है कि आधुनिक जीवनशैली में स्क्रीन टाइम और लंबे समय तक बैठे रहने की आदत के कारण रीढ़ संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में पर्वतासन एक निवारक उपाय के रूप में अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर

पर्वतासन केवल शरीर तक सीमित नहीं है — यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही लाभकारी है। इसके नियमित अभ्यास से एकाग्रता बढ़ती है और तनाव व चिंता में कमी आती है।

मन को स्थिरता मिलने से निर्णय लेने की क्षमता भी मजबूत होती है। यही कारण है कि छात्रों और कामकाजी पेशेवरों के लिए यह आसन विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार भारत में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पर्वतासन जैसे सरल योगाभ्यास को दैनिक दिनचर्या में शामिल करना एक सस्ता और टिकाऊ समाधान हो सकता है।

कैसे करें पर्वतासन — सही विधि

पर्वतासन करने के लिए सबसे पहले सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएं। इसके बाद दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाकर सांस भरते हुए हाथों को सिर के ऊपर सीधा उठाएं। हथेलियां ऊपर की ओर रहें और रीढ़ बिल्कुल सीधी।

इस स्थिति में 30 से 60 सेकंड तक रहें और सामान्य रूप से सांस लेते रहें। फिर धीरे-धीरे हाथ नीचे लाएं। इस क्रिया को 3 से 5 बार दोहराएं।

सावधानियां: किसे नहीं करना चाहिए

जिन लोगों को गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या या हाल ही में किसी प्रकार की सर्जरी हुई हो, उन्हें इस आसन से दूरी बनाए रखनी चाहिए। किसी भी नए योगाभ्यास को शुरू करने से पहले प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित है।

आने वाले समय में 21 जून — अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय पर्वतासन सहित कई सरल आसनों के व्यापक प्रचार-प्रसार की योजना बना रहा है, जिससे अधिक से अधिक भारतीय इसका लाभ उठा सकें।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब पर्वतासन जैसे निःशुल्क उपाय केवल वैकल्पिक नहीं बल्कि अनिवार्य बन जाते हैं। आयुष मंत्रालय का इस दिशा में काम सराहनीय है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार इसे स्कूलों, कार्यस्थलों और सरकारी योजनाओं में अनिवार्य रूप से शामिल करने की इच्छाशक्ति दिखाएगी? योग को सिर्फ 21 जून तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पर्वतासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
पर्वतासन एक योग मुद्रा है जिसमें सुखासन में बैठकर दोनों हाथों को सिर के ऊपर सीधा उठाया जाता है, जिससे शरीर पहाड़ जैसा दिखता है। इसे 30 से 60 सेकंड तक करें और 3-5 बार दोहराएं।
पर्वतासन के क्या फायदे हैं?
पर्वतासन से हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं, रीढ़ सीधी रहती है, पाचन सुधरता है और मानसिक तनाव कम होता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार यह शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी है।
क्या पर्वतासन रोज करना सुरक्षित है?
हां, स्वस्थ व्यक्तियों के लिए पर्वतासन रोजाना 5-10 मिनट करना पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि गंभीर पीठ दर्द, घुटने की समस्या या हालिया सर्जरी वाले लोगों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
पर्वतासन और ताड़ासन में क्या अंतर है?
ताड़ासन खड़े होकर किया जाता है जबकि पर्वतासन बैठकर किया जाता है। दोनों रीढ़ को सीधा रखने में मदद करते हैं, लेकिन पर्वतासन बैठने की स्थिति में अधिक एकाग्रता और मानसिक शांति देता है।
पर्वतासन छात्रों के लिए क्यों उपयोगी है?
पर्वतासन एकाग्रता बढ़ाता है और तनाव कम करता है, जिससे पढ़ाई में ध्यान लगाना आसान होता है। परीक्षा के दौरान मानसिक दबाव कम करने के लिए यह आसन विशेष रूप से फायदेमंद है।
राष्ट्र प्रेस
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