PM 2.5 कणों से बचाव: सही मास्क कैसे चुनें और बच्चों के लिए क्या हैं ज़रूरी सावधानियाँ
सारांश
मुख्य बातें
सर्दियों की दस्तक के साथ नई दिल्ली समेत उत्तर भारत के तमाम शहरों में पीएम 2.5 कणों का स्तर खतरनाक हद तक बढ़ जाता है, जो फेफड़ों से होते हुए सीधे रक्त प्रवाह में घुस सकते हैं। ईंधन चालित वाहनों और पराली जलाने जैसे कारणों से उत्पन्न स्मॉग में आँखों में जलन और साँस लेने में कठिनाई आम हो जाती है। ऐसे में सही मास्क का चुनाव ही एकमात्र व्यावहारिक ढाल साबित हो सकता है।
पीएम 10 और पीएम 2.5 में क्या फर्क है
हवा में तैरते बारीक कणों को पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) कहते हैं। इनके दो मुख्य प्रकार हैं — पीएम 10 और पीएम 2.5। पीएम 10 वे कण हैं जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर या उससे कम होता है; इनमें धूल, पराग और धुएँ के मोटे कण शामिल हैं जो नाक और गले में खराश व एलर्जी पैदा करते हैं।
पीएम 2.5 कण आकार में 2.5 माइक्रोमीटर से भी छोटे होते हैं और स्वास्थ्य की दृष्टि से कहीं अधिक घातक हैं। ये नाक के बालों को पार करते हुए सीधे फेफड़ों में और वहाँ से रक्त प्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं। अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और हृदय रोगों का एक प्रमुख कारण यही सूक्ष्म कण हैं।
सर्जिकल मास्क की सीमाएँ
अस्पतालों में प्रचलित नीले या हरे रंग का 3-प्लाई सर्जिकल मास्क धूल के बड़े कणों (पीएम 10) और छींक/खाँसी की बूँदों को तो रोक सकता है, लेकिन प्रदूषण के विरुद्ध यह लगभग निष्प्रभावी है। यह मास्क चेहरे के किनारों से खुला रहता है, जिसके कारण पीएम 2.5 जैसे बारीक कण बेरोकटोक अंदर पहुँच जाते हैं। भारी प्रदूषण में इसे पहनना न पहनने के बराबर माना जाता है।
एन95, एन99 और एन100 — कौन सा चुनें
एन95 मास्क प्रदूषण से सुरक्षा के लिए सबसे प्रमाणित और अनुशंसित विकल्प है। यहाँ 'एन' का अर्थ है नॉन-ऑयल (तेल-रहित वातावरण के लिए उपयुक्त) और '95' का अर्थ है कि यह हवा में मौजूद 95 प्रतिशत बारीक कणों को फ़िल्टर करने में सक्षम है। यह चेहरे पर पूरी तरह सील होता है, जिससे प्रदूषित हवा किनारों से भीतर नहीं जा पाती।
एन99 और एन100 मास्क एन95 के अपग्रेडेड संस्करण हैं — एन99 99 प्रतिशत और एन100 99.9 प्रतिशत तक कणों को रोक सकते हैं। हालाँकि इनकी फ़िल्टरिंग क्षमता सर्वाधिक है, साँस लेने में प्रतिरोध अधिक होने से शारीरिक श्रम के दौरान घुटन महसूस हो सकती है। ये केवल अत्यधिक प्रदूषण वाले क्षेत्रों में सीमित समयावधि के लिए उपयुक्त हैं।
मास्क बदलने का सही समय
सर्जिकल मास्क केवल एकल उपयोग के लिए है — 6 से 8 घंटे बाद इसे फेंक देना चाहिए। एन95 या एन99 मास्क को कभी भी पानी से नहीं धोना चाहिए, क्योंकि इससे फ़िल्टर लेयर नष्ट हो जाती है। सामान्यतः यदि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) बहुत खराब हो, तो एक एन95 मास्क को 40 से 50 घंटे तक पहना जा सकता है — यानी प्रतिदिन 4 घंटे पहनने पर लगभग 10 से 12 दिन। यदि मास्क अंदर से गंदा या गीला हो जाए, अथवा साँस लेने में परेशानी होने लगे, तो उसे तुरंत बदल देना चाहिए।
बच्चों के लिए मास्क — ज़रूरी सावधानियाँ
बच्चों के फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं और उनकी साँस लेने की गति वयस्कों की तुलना में तेज होती है, इसलिए प्रदूषण का प्रभाव उन पर सबसे अधिक पड़ता है। वयस्कों के एन95 मास्क बच्चों के छोटे चेहरों पर ठीक से फिट नहीं होते, और किनारों में रह गए गैप से प्रदूषित हवा सीधे उनके फेफड़ों में पहुँच सकती है।
बाज़ार में 'किड्स एन95' और 'किड्स एन90' मास्क उपलब्ध हैं जो बच्चों के चेहरे की बनावट को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। मास्क खरीदते समय यह सुनिश्चित करें कि वह बच्चे की नाक से ठुड्डी तक पूरी तरह सील हो। 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों को मास्क नहीं पहनाना चाहिए, क्योंकि इससे घुटन का गंभीर खतरा रहता है। अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में बच्चों का बाहर खेलना पूरी तरह बंद करना ही सबसे सुरक्षित उपाय है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सही मास्क का चुनाव, उचित देखभाल और समय पर बदलाव — ये तीन आदतें मिलकर प्रदूषण के विरुद्ध सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच तैयार करती हैं।