दूसरी तिमाही में गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित योगासन, आयुष मंत्रालय की सलाह

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दूसरी तिमाही में गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित योगासन, आयुष मंत्रालय की सलाह

सारांश

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में महिलाओं की ऊर्जा और गतिविधि क्षमता बढ़ती है। आयुष मंत्रालय ताड़ासन, वृक्षासन, सुखासन और शवासन जैसे हल्के योगासनों की सिफारिश करता है, जो शारीरिक ताकत, लचीलापन, मानसिक शांति बढ़ाते हैं और प्रसव के लिए शरीर को तैयार करते हैं।

मुख्य बातें

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में शारीरिक ऊर्जा और गतिविधि में वृद्धि होती है।
आयुष मंत्रालय ने ताड़ासन, वृक्षासन, सुखासन, शवासन, विपरीतकरणी और शंखासन की सिफारिश की है।
ये योगासन शारीरिक ताकत, लचीलापन, मुद्रा सुधार और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।
योग अभ्यास प्रसव प्रक्रिया को सहज बनाने और माँ व बच्चे दोनों के स्वास्थ्य में सुधार लाता है।
किसी भी असुविधा या दर्द की स्थिति में तुरंत योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लें।

नई दिल्ली, 10 मई। मातृत्व की यात्रा हर महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत पल होती है, और प्रेग्नेंसी की दूसरी तिमाही वह दौर है जब शरीर में नई ऊर्जा आती है, प्रारंभिक थकान कम होती है और शारीरिक गतिविधियों की क्षमता बढ़ने लगती है। इसी समय को "बढ़ती ताकत और गतिविधि का सुनहरा दौर" भी कहा जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं की समग्र स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस अवधि में हल्के और सुरक्षित योगासनों को दैनिक दिनचर्या में शामिल करने की सिफारिश की है।

दूसरी तिमाही में योग का महत्व

आयुष मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था की दूसरी तिमाही वह समय है जब महिला अपनी बढ़ती हुई ऊर्जा का सकारात्मक और रचनात्मक इस्तेमाल कर सकती है। सही योगासन करने से न सिर्फ शारीरिक ताकत और लचीलापन बढ़ता है, बल्कि मुद्रा में सुधार आता है, मानसिक शांति मिलती है और प्रसव के लिए शरीर को प्राकृतिक रूप से तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये आसन केवल माँ की सेहत नहीं, बल्कि आने वाले बच्चे के लिए भी सकारात्मक वातावरण बनाते हैं।

अनुशंसित योगासन और उनके लाभ

ताड़ासन का अभ्यास खड़े होकर किया जाता है। इसके लिए दोनों पैरों को जोड़कर सीधे खड़े रहें और हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। इस आसन से पूरा शरीर खिंचता है, रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, संतुलन बेहतर होता है और पोस्चर सुधरता है।

वृक्षासन संतुलन और एकाग्रता बढ़ाने के लिए बेहद प्रभावी है। इसे करने के लिए एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को घुटने के पास रखें और हाथों को जोड़कर ऊपर उठाएं। शुरुआत में दीवार का सहारा लेकर भी यह आसन किया जा सकता है, जिससे संतुलन बनाने में आसानी होती है।

सुखासन गर्भावस्था के दौरान मानसिक शांति के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए फर्श पर आराम की मुद्रा में बैठें, पैरों को मोड़कर रखें और गहरी सांसें लें। इससे मन को शांति मिलती है, कमर को आराम मिलता है और तनाव कम होता है।

शवासन पूरे शरीर को विश्राम देने के लिए अत्यंत लाभकारी है। इसे करने के लिए पीठ के बल लेटकर पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें। दूसरी तिमाही में तकिए का सहारा लेकर बाईं ओर लेटना अधिक सुविधाजनक होता है। इससे थकान दूर होती है, रक्त संचार में सुधार आता है और गहरी, शांतिपूर्ण नींद आती है।

विपरीतकरणी (दीवार के सहारे पैर ऊपर करके लेटना) सूजन कम करने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है, जो गर्भावस्था के दौरान आम समस्याएं हैं।

शंखासन पेट और कमर के आसपास की मांसपेशियों को हल्का व्यायाम देता है, जिससे पाचन में सुधार होता है और शारीरिक लचीलापन बढ़ता है।

योग अभ्यास के दौरान सावधानियाँ

स्वास्थ्य विशेषज्ञ और योग प्रशिक्षक सलाह देते हैं कि इन सभी आसनों का अभ्यास धीरे-धीरे, आराम से और अपनी क्षमता के अनुसार करें। यदि किसी भी समय दर्द, असुविधा या अजीब महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं और किसी योग विशेषज्ञ या प्रसूति चिकित्सक से परामर्श लें। हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है।

आगे की यात्रा

दूसरी तिमाही में नियमित योग अभ्यास न सिर्फ गर्भवती महिला की शारीरिक और मानसिक सेहत को मजबूत करता है, बल्कि प्रसव प्रक्रिया को सहज बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुष मंत्रालय की इस सिफारिश का उद्देश्य भारतीय महिलाओं को प्राचीन योग विज्ञान के माध्यम से स्वस्थ और खुशहाल मातृत्व की ओर ले जाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह महत्वपूर्ण है कि गर्भवती महिलाएं किसी योग्य प्रशिक्षक या प्रसूति विशेषज्ञ की व्यक्तिगत निगरानी में ही ये आसन करें, न कि सामान्य दिशानिर्देशों के आधार पर। प्रत्येक गर्भावस्था अद्वितीय है, और शारीरिक जटिलताओं, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था या पूर्व स्वास्थ्य स्थितियों के मामले में सामान्य योग सलाह अपर्याप्त हो सकती है। योग के लाभ निर्विवाद हैं, लेकिन सुरक्षा और व्यक्तिगत मार्गदर्शन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भावस्था की दूसरी तिमाही में योग क्यों महत्वपूर्ण है?
दूसरी तिमाही में शारीरिक ऊर्जा बढ़ती है और प्रारंभिक थकान कम होती है। योग इस समय शारीरिक ताकत, लचीलापन और मानसिक शांति बढ़ाता है, साथ ही प्रसव के लिए शरीर को प्राकृतिक रूप से तैयार करता है। यह माँ और आने वाले बच्चे दोनों के लिए सकारात्मक वातावरण बनाता है।
ताड़ासन को सही तरीके से कैसे करें?
ताड़ासन को खड़े होकर किया जाता है। दोनों पैरों को जोड़कर सीधे खड़े रहें और हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। इससे पूरा शरीर खिंचता है, रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और संतुलन बेहतर होता है।
क्या गर्भवती महिलाएं शवासन कर सकती हैं?
हाँ, शवासन गर्भावस्था के दौरान बहुत लाभकारी है। दूसरी तिमाही में तकिए का सहारा लेकर बाईं ओर लेटना सुविधाजनक होता है। इससे थकान दूर होती है, रक्त संचार बेहतर होता है और गहरी, शांतिपूर्ण नींद आती है।
योग अभ्यास के दौरान कौन-सी सावधानियाँ रखनी चाहिए?
योग को धीरे-धीरे, आराम से और अपनी क्षमता के अनुसार करें। यदि दर्द, असुविधा या अजीब महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं। किसी योग्य योग विशेषज्ञ या प्रसूति चिकित्सक से व्यक्तिगत परामर्श लेना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हर गर्भावस्था अलग होती है।
विपरीतकरणी आसन का क्या लाभ है?
विपरीतकरणी (दीवार के सहारे पैर ऊपर करके लेटना) सूजन को कम करने और रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है, जो गर्भावस्था के दौरान आम समस्याएं हैं।
राष्ट्र प्रेस