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गर्भावस्था में हर ट्राइमेस्टर के लिए अलग योग, आयुष मंत्रालय ने बताए सुरक्षित आसन

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गर्भावस्था में हर ट्राइमेस्टर के लिए अलग योग, आयुष मंत्रालय ने बताए सुरक्षित आसन

सारांश

आयुष मंत्रालय ने गर्भावस्था के तीनों चरणों के लिए ट्राइमेस्टर-विशेष योग की जानकारी साझा की है। पहले में सूक्ष्म व्यायाम, दूसरे में संतुलित आसन और तीसरे में हल्का व सुरक्षित अभ्यास — यह मार्गदर्शिका मातृत्व के सफर को शारीरिक और मानसिक रूप से सहज बनाने का प्रयास है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 8 मई 2026 को गर्भावस्था के तीनों ट्राइमेस्टर के लिए अलग-अलग योग अभ्यास की जानकारी साझा की।
पहले ट्राइमेस्टर में ताड़ासन, वृक्षासन, नाड़ी शोधन और भ्रामरी प्राणायाम जैसे हल्के अभ्यास उपयुक्त हैं।
दूसरे ट्राइमेस्टर में त्रिकोणासन, वीरभद्रासन, बद्धकोणासन और उज्जायी प्राणायाम किए जा सकते हैं।
तीसरे ट्राइमेस्टर में सुप्त बद्धकोणासन, शवासन और ओम ध्यान जैसे हल्के अभ्यास सुरक्षित हैं।
किसी भी योग अभ्यास से पहले चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य बताया गया है।

आयुष मंत्रालय ने 8 मई 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक महत्वपूर्ण पोस्ट के ज़रिए गर्भावस्था के तीनों ट्राइमेस्टर में योग अभ्यास के सुरक्षित और उपयोगी तरीके साझा किए। मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था के हर चरण में शरीर की ज़रूरतें अलग होती हैं, इसलिए योग भी उसी अनुसार अपनाना चाहिए। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के दिशानिर्देशों पर आधारित यह जानकारी लाखों गर्भवती महिलाओं के लिए प्रासंगिक है।

पहला ट्राइमेस्टर: शरीर को धीरे-धीरे ढालें

मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार, पहला ट्राइमेस्टर वह समय होता है जब शरीर नई स्थिति में स्वयं को समायोजित कर रहा होता है। इस चरण में हल्की गतिविधियाँ और सूक्ष्म व्यायाम विशेष रूप से सहायक होते हैं — जैसे गर्दन को धीरे-धीरे आगे-पीछे और दाएं-बाएं घुमाना, कंधों को हल्के से घुमाना, तथा घुटनों और टखनों की हलचल करना।

इस दौरान ताड़ासन, वृक्षासन, दंडासन, सुखासन और शवासन जैसे सरल आसन किए जा सकते हैं। प्राणायाम में नाड़ी शोधन, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम मन को शांत रखने में मदद करते हैं। इस स्टेज पर ध्यान और शांति पाठ मानसिक संतुलन बनाए रखने में सहायक होते हैं।

दूसरा ट्राइमेस्टर: स्थिरता के साथ अभ्यास बढ़ाएँ

दूसरा ट्राइमेस्टर प्रायः सबसे स्थिर और आरामदायक चरण माना जाता है। इस समय शरीर अपेक्षाकृत अधिक सक्रिय हो सकता है, इसलिए योग अभ्यास में थोड़ी विविधता लाई जा सकती है। खड़े होकर किए जाने वाले आसनों में ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, वीरभद्रासन और कटी चक्रासन शामिल हैं।

बैठकर किए जाने वाले आसनों में बद्धकोणासन, शशांकासन, मार्जरी आसन और सुखासन विशेष रूप से फायदेमंद बताए गए हैं। दीवार के सहारे विपरीत करणी और शवासन शरीर को विश्राम देते हैं। इस चरण में उज्जायी प्राणायाम भी किया जा सकता है, जो सांस और मन दोनों को नियंत्रित रखने में सहायक है।

तीसरा ट्राइमेस्टर: हल्का और सुरक्षित योग ही उचित

तीसरा ट्राइमेस्टर सबसे संवेदनशील चरण होता है। इस दौरान शरीर भारी महसूस कर सकता है और थकान जल्दी होती है, इसलिए योग अत्यंत हल्का और सुरक्षित होना चाहिए। ताड़ासन, त्रिकोणासन, उपविष्ट कोणासन और सुखासन इस समय उपयोगी बताए गए हैं।

सुप्त बद्धकोणासन और शवासन शरीर को गहरा आराम देते हैं। सांस से जुड़े अभ्यासों में नाड़ी शोधन, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम मन को शांत रखते हैं। इस चरण में ओम ध्यान या सो-हम ध्यान मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।

विशेषज्ञों की सलाह: जबरदस्ती नहीं, सहजता से करें अभ्यास

विशेषज्ञों के अनुसार, योग कभी भी जबरदस्ती या जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए। शरीर जितना सहज महसूस करे, उतना ही अभ्यास उचित माना जाता है। गौरतलब है कि हर ट्राइमेस्टर में अलग तरह की ज़रूरत होती है — कहीं लचीलेपन की, कहीं संतुलन की, और कहीं केवल आराम और शांति की।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में मातृ स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है और आयुष-आधारित समाधानों को मुख्यधारा में लाया जा रहा है। किसी भी योग अभ्यास को शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट और प्रमाणिक चिकित्सीय दिशानिर्देश के बीच की खाई को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। ट्राइमेस्टर-विशेष योग के फायदे तभी मिलते हैं जब अभ्यास किसी प्रशिक्षित योग चिकित्सक की देखरेख में हो — जो भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अभी भी दुर्लभ है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह नहीं बताती कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में ये आसन वर्जित भी हो सकते हैं। मातृ स्वास्थ्य नीति में योग को शामिल करना तभी प्रभावी होगा जब इसे प्रसव-पूर्व देखभाल के ढाँचे में व्यवस्थित रूप से एकीकृत किया जाए।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भावस्था में योग करना सुरक्षित है?
आयुष मंत्रालय और मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान के अनुसार, सही तरीके से और चिकित्सक की सलाह से किया गया योग गर्भावस्था में सुरक्षित और लाभकारी होता है। हालाँकि, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था में किसी भी अभ्यास से पहले डॉक्टर से परामर्श अनिवार्य है।
पहले ट्राइमेस्टर में कौन से योग आसन करने चाहिए?
पहले ट्राइमेस्टर में ताड़ासन, वृक्षासन, दंडासन, सुखासन और शवासन जैसे सरल आसन उपयुक्त हैं। साथ ही नाड़ी शोधन, भ्रामरी और शीतली प्राणायाम मन को शांत रखने में मदद करते हैं।
दूसरे ट्राइमेस्टर में कौन से योग आसन किए जा सकते हैं?
दूसरे ट्राइमेस्टर में त्रिकोणासन, वीरभद्रासन, कटी चक्रासन, बद्धकोणासन और मार्जरी आसन जैसे आसन किए जा सकते हैं। उज्जायी प्राणायाम भी इस चरण में सांस और मन को नियंत्रित रखने में सहायक है।
तीसरे ट्राइमेस्टर में कौन से योग सुरक्षित हैं?
तीसरे ट्राइमेस्टर में सुप्त बद्धकोणासन, शवासन, उपविष्ट कोणासन और सुखासन जैसे हल्के आसन सुरक्षित माने गए हैं। ओम ध्यान और सो-हम ध्यान इस चरण में मानसिक स्थिरता प्रदान करते हैं।
क्या गर्भावस्था में योग से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है?
हाँ, विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था में कोई भी योग अभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लेना अनिवार्य है। हर महिला की शारीरिक स्थिति अलग होती है, इसलिए व्यक्तिगत मार्गदर्शन आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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