गर्भावस्था में ध्यान का अभ्यास: आयुष मंत्रालय की सलाह, हर तिमाही में बढ़ाएं समय — माँ और शिशु दोनों को लाभ

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गर्भावस्था में ध्यान का अभ्यास: आयुष मंत्रालय की सलाह, हर तिमाही में बढ़ाएं समय — माँ और शिशु दोनों को लाभ

सारांश

आयुष मंत्रालय ने मदर्स डे से पहले गर्भवती महिलाओं के लिए ध्यान की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है — पहली तिमाही में 5 मिनट से शुरू कर तीसरी तिमाही तक 15 मिनट तक बढ़ाने की सलाह दी गई है। एक शांत माँ, स्वस्थ शिशु की नींव रखती है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने 7 मई 2025 को गर्भावस्था में ध्यान को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया।
पहली तिमाही में 5 मिनट , दूसरी में 10 मिनट और तीसरी में 15 मिनट ध्यान की अनुशंसा।
नियमित ध्यान से तनाव कम होता है, भावनात्मक संतुलन बनता है और माँ व शिशु का जुड़ाव गहरा होता है।
अभ्यास के दौरान डॉक्टर की सलाह लेना अनिवार्य बताया गया है।
मदर्स डे (10 मई) और विश्व योग दिवस के अवसर पर यह अभियान विशेष रूप से प्रासंगिक है।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 7 मई 2025 को गर्भवती महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक विशेष जागरूकता अभियान के तहत सोशल मीडिया पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। मदर्स डे (10 मई) और विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित ध्यान (मेडिटेशन) का अभ्यास माँ और होने वाले शिशु दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है।

ध्यान क्या है और गर्भावस्था में क्यों ज़रूरी है

ध्यान मन को शांत और एकाग्र करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें सांस पर केंद्रित होकर या शांत मुद्रा में बैठकर वर्तमान क्षण में पूरी तरह उपस्थित रहा जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था में शारीरिक देखभाल जितनी आवश्यक है, उतनी ही ज़रूरी मानसिक शांति बनाए रखना भी है। नियमित ध्यान तनाव कम करता है, आत्म-जागरूकता बढ़ाता है और गर्भवती महिला का अपने आने वाले शिशु से गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करता है।

यह ऐसे समय में आया है जब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में प्रसवकालीन मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान माँ का मानसिक संतुलन सीधे शिशु के विकास को प्रभावित करता है।

तिमाही के अनुसार ध्यान का अनुशंसित समय

विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय ने गर्भावस्था की प्रत्येक तिमाही के लिए ध्यान की अवधि का सुझाव दिया है, जो इस प्रकार है:

  • पहली तिमाही: 5 मिनट प्रतिदिन
  • दूसरी तिमाही: 10 मिनट प्रतिदिन
  • तीसरी तिमाही: 15 मिनट प्रतिदिन

यह क्रमिक वृद्धि इसलिए सुझाई गई है ताकि शरीर और मन दोनों धीरे-धीरे अभ्यास के अनुकूल हो सकें और गर्भावस्था के बढ़ते दबाव के साथ मानसिक स्थिरता भी बनी रहे।

ध्यान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ध्यान का अभ्यास करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ अपनानी चाहिए। सीधी लेकिन आरामदायक मुद्रा में बैठें और पीठ पर अनावश्यक दबाव न डालें। खाली या हल्के पेट अभ्यास करें और शांत एवं हवादार स्थान का चुनाव करें। सांस को स्वाभाविक रूप से आने-जाने दें — विचारों से लड़ने की कोशिश न करें। सबसे महत्वपूर्ण, गर्भावस्था या किसी अन्य बीमारी की स्थिति में अभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

मंत्रालय की अपील और आगे की राह

आयुष मंत्रालय ने सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे ध्यान को अपनी दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएँ। मंत्रालय का कहना है कि

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि क्या सोशल मीडिया पोस्ट से परे इसे ज़मीनी स्तर पर लागू करने की कोई ठोस योजना है। भारत में प्रसवकालीन मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ अभी भी अत्यंत सीमित हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशिक्षित परामर्शदाताओं की भारी कमी है। ध्यान जैसी सरल और निःशुल्क तकनीक को सरकारी मातृत्व देखभाल प्रोटोकॉल में शामिल करना एक बड़ा कदम होगा — केवल जागरूकता पोस्ट नहीं।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भावस्था में ध्यान करने से क्या फायदा होता है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था में नियमित ध्यान तनाव कम करता है, मानसिक शांति बढ़ाता है और माँ का शिशु से भावनात्मक जुड़ाव मज़बूत करता है। यह पूरी गर्भावस्था की यात्रा को अधिक शांतिपूर्ण और सकारात्मक बनाने में सहायक है।
गर्भावस्था की किस तिमाही में कितने मिनट ध्यान करना चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, पहली तिमाही में 5 मिनट, दूसरी तिमाही में 10 मिनट और तीसरी तिमाही में 15 मिनट प्रतिदिन ध्यान करना उचित है। यह क्रमिक वृद्धि शरीर और मन को धीरे-धीरे अभ्यास के अनुकूल बनाती है।
क्या गर्भावस्था में ध्यान करना सुरक्षित है?
सामान्यतः गर्भावस्था में ध्यान सुरक्षित माना जाता है, लेकिन आयुष मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बीमारी या जटिल गर्भावस्था की स्थिति में अभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
आयुष मंत्रालय ने यह अभियान क्यों शुरू किया?
मदर्स डे (10 मई) और विश्व योग दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह अभियान शुरू किया। मंत्रालय का उद्देश्य है कि हर गर्भवती महिला ध्यान को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करे।
ध्यान के दौरान गर्भवती महिलाओं को कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
आरामदायक और सीधी मुद्रा में बैठें, पीठ पर दबाव न डालें। खाली या हल्के पेट अभ्यास करें, शांत और हवादार जगह चुनें और सांस को स्वाभाविक रूप से आने-जाने दें। किसी भी असुविधा पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
राष्ट्र प्रेस
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