गर्भावस्था में ध्यान का अभ्यास: आयुष मंत्रालय की सलाह, हर तिमाही में बढ़ाएं समय — माँ और शिशु दोनों को लाभ
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने 7 मई 2025 को गर्भवती महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक विशेष जागरूकता अभियान के तहत सोशल मीडिया पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। मदर्स डे (10 मई) और विश्व योग दिवस की पूर्व संध्या पर मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित ध्यान (मेडिटेशन) का अभ्यास माँ और होने वाले शिशु दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
ध्यान क्या है और गर्भावस्था में क्यों ज़रूरी है
ध्यान मन को शांत और एकाग्र करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें सांस पर केंद्रित होकर या शांत मुद्रा में बैठकर वर्तमान क्षण में पूरी तरह उपस्थित रहा जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था में शारीरिक देखभाल जितनी आवश्यक है, उतनी ही ज़रूरी मानसिक शांति बनाए रखना भी है। नियमित ध्यान तनाव कम करता है, आत्म-जागरूकता बढ़ाता है और गर्भवती महिला का अपने आने वाले शिशु से गहरा भावनात्मक जुड़ाव स्थापित करता है।
यह ऐसे समय में आया है जब शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में प्रसवकालीन मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्भावस्था के दौरान माँ का मानसिक संतुलन सीधे शिशु के विकास को प्रभावित करता है।
तिमाही के अनुसार ध्यान का अनुशंसित समय
विशेषज्ञों और आयुष मंत्रालय ने गर्भावस्था की प्रत्येक तिमाही के लिए ध्यान की अवधि का सुझाव दिया है, जो इस प्रकार है:
- पहली तिमाही: 5 मिनट प्रतिदिन
- दूसरी तिमाही: 10 मिनट प्रतिदिन
- तीसरी तिमाही: 15 मिनट प्रतिदिन
यह क्रमिक वृद्धि इसलिए सुझाई गई है ताकि शरीर और मन दोनों धीरे-धीरे अभ्यास के अनुकूल हो सकें और गर्भावस्था के बढ़ते दबाव के साथ मानसिक स्थिरता भी बनी रहे।
ध्यान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाँ
मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ध्यान का अभ्यास करते समय कुछ महत्वपूर्ण सावधानियाँ अपनानी चाहिए। सीधी लेकिन आरामदायक मुद्रा में बैठें और पीठ पर अनावश्यक दबाव न डालें। खाली या हल्के पेट अभ्यास करें और शांत एवं हवादार स्थान का चुनाव करें। सांस को स्वाभाविक रूप से आने-जाने दें — विचारों से लड़ने की कोशिश न करें। सबसे महत्वपूर्ण, गर्भावस्था या किसी अन्य बीमारी की स्थिति में अभ्यास शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
मंत्रालय की अपील और आगे की राह
आयुष मंत्रालय ने सभी गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे ध्यान को अपनी दैनिक दिनचर्या का अनिवार्य हिस्सा बनाएँ। मंत्रालय का कहना है कि