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गर्भावस्था में प्राणायाम: तनाव दूर करें, माँ और शिशु दोनों को मिलेगा लाभ

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गर्भावस्था में प्राणायाम: तनाव दूर करें, माँ और शिशु दोनों को मिलेगा लाभ

सारांश

आयुष मंत्रालय ने गर्भवती महिलाओं के लिए नाड़ी शोधन, शीतली और भ्रामरी — तीन प्राणायाम तकनीकों को विशेष रूप से उपयोगी बताया है। रोज़ाना केवल 10-15 मिनट का अभ्यास तनाव कम करने, नींद सुधारने और माँ व शिशु दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है।

मुख्य बातें

आयुष मंत्रालय ने गर्भावस्था के दौरान प्राणायाम को माँ और शिशु दोनों के लिए लाभकारी बताया है।
नाड़ी शोधन प्राणायाम तनाव कम करने और मन को शांत करने में सबसे प्रभावी माना गया है।
शीतली प्राणायाम शरीर का तापमान कम करता है और गर्मी व बेचैनी में राहत देता है।
भ्रामरी प्राणायाम चिंता घटाने और नींद की गुणवत्ता सुधारने में सहायक है।
रोज़ाना केवल 10-15 मिनट का अभ्यास पर्याप्त; किसी भी तकनीक को शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह अनिवार्य।

नई दिल्ली — गर्भावस्था हर महिला के जीवन का एक अनमोल और परिवर्तनकारी अध्याय होता है, लेकिन इस दौरान शरीर और मन दोनों में गहरे बदलाव आते हैं। हार्मोनल उतार-चढ़ाव से मूड स्विंग्स, थकान और शारीरिक भारीपन जैसी स्थितियाँ सामान्य हैं। आयुष मंत्रालय के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने में प्राणायाम एक प्रभावी और सुरक्षित उपाय हो सकता है, जिससे माँ और गर्भस्थ शिशु — दोनों को लाभ मिलता है।

प्राणायाम क्या है और यह कैसे काम करता है

प्राणायाम का अर्थ है श्वास को सचेत रूप से नियंत्रित करना। जब कोई धीरे-धीरे और गहरी साँस लेता है, तो मस्तिष्क को शांति मिलती है, शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है और तंत्रिका तंत्र सक्रिय रूप से शिथिल होता है। गर्भावस्था के दौरान यह प्रक्रिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि माँ की मानसिक स्थिति का सीधा प्रभाव गर्भस्थ शिशु के विकास पर पड़ता है।

आयुष मंत्रालय की अनुशंसित तकनीकें

आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में Twitter) पर साझा की गई जानकारी में गर्भवती महिलाओं के लिए तीन प्राणायाम तकनीकों को विशेष रूप से उपयोगी बताया है।

पहला है नाड़ी शोधन प्राणायाम, जिसमें एक नासिका से साँस ली जाती है और दूसरी से छोड़ी जाती है। यह तकनीक मन को स्थिर करती है और तनाव को कम करती है। मंत्रालय के अनुसार, रोज़ कुछ मिनट के अभ्यास से ही फर्क महसूस होने लगता है।

दूसरा है शीतली प्राणायाम, जिसमें जीभ को नली की तरह मोड़कर साँस ली जाती है और नाक से छोड़ी जाती है। यह शरीर का तापमान कम करता है और गर्मी व बेचैनी में राहत देता है — गर्भावस्था की दूसरी और तीसरी तिमाही में यह विशेष रूप से आरामदायक माना जाता है।

तीसरा है भ्रामरी प्राणायाम, जिसमें साँस छोड़ते समय मधुमक्खी की तरह गुंजन की ध्वनि निकाली जाती है। यह मस्तिष्क को शांत करता है, चिंता को कम करता है और नींद की गुणवत्ता सुधारने में सहायक है।

कितना समय पर्याप्त है

इन तकनीकों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनके लिए किसी विशेष उपकरण या लंबे समय की आवश्यकता नहीं होती। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सुबह या शाम 10 से 15 मिनट का नियमित अभ्यास भी उल्लेखनीय लाभ दे सकता है। शांत वातावरण में बैठकर, आँखें बंद करके इन्हें किया जा सकता है।

समग्र स्वास्थ्य के लिए एकीकृत दृष्टिकोण

प्राणायाम के साथ-साथ हल्की सैर, पौष्टिक आहार और पर्याप्त विश्राम भी गर्भावस्था के दौरान आवश्यक हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि माँ की मानसिक शांति शिशु के संपूर्ण विकास के लिए उतनी ही ज़रूरी है जितनी शारीरिक देखभाल। यह ऐसे समय में आया है जब मातृ मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता तेज़ी से बढ़ रही है।

महत्वपूर्ण सूचना: गर्भावस्था के दौरान कोई भी योग या प्राणायाम शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक या प्रशिक्षित विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे व्यापक मातृ मानसिक स्वास्थ्य नीति के संदर्भ में देखना ज़रूरी है — भारत में मातृ अवसाद (prenatal depression) के मामले कम रिपोर्ट होते हैं, न कि कम होते हैं। प्राणायाम एक सुलभ और सिद्ध पूरक उपाय है, परंतु इसे चिकित्सकीय निगरानी का विकल्प नहीं समझा जाना चाहिए। सरकारी सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिए स्वास्थ्य सलाह देना सराहनीय है, किंतु इसके साथ प्रशिक्षित प्रसवपूर्व योग प्रशिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भावस्था में प्राणायाम करना सुरक्षित है?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान नाड़ी शोधन, शीतली और भ्रामरी जैसे प्राणायाम सामान्यतः सुरक्षित और लाभकारी माने जाते हैं। हालाँकि, किसी भी तकनीक को शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।
गर्भावस्था में कौन-सा प्राणायाम सबसे अच्छा है?
आयुष मंत्रालय ने नाड़ी शोधन प्राणायाम को गर्भावस्था के लिए सबसे उपयुक्त बताया है, क्योंकि यह मन को शांत करता है और तनाव घटाता है। शीतली और भ्रामरी प्राणायाम भी क्रमशः शारीरिक बेचैनी और मानसिक चिंता में राहत देते हैं।
गर्भावस्था में प्राणायाम कितने समय तक करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, रोज़ाना 10 से 15 मिनट का नियमित अभ्यास पर्याप्त है। सुबह या शाम शांत वातावरण में बैठकर यह अभ्यास किया जा सकता है।
क्या प्राणायाम से गर्भस्थ शिशु को भी फायदा होता है?
हाँ, आयुष मंत्रालय के अनुसार प्राणायाम से माँ और शिशु दोनों को लाभ मिलता है। माँ की मानसिक शांति और बेहतर ऑक्सीजन आपूर्ति का सकारात्मक प्रभाव शिशु के विकास पर भी पड़ता है।
गर्भावस्था में तनाव कम करने के और क्या उपाय हैं?
प्राणायाम के साथ-साथ हल्की सैर, पौष्टिक आहार और पर्याप्त नींद भी गर्भावस्था में तनाव कम करने में सहायक हैं। किसी भी नई दिनचर्या को अपनाने से पहले चिकित्सक की सलाह लेना ज़रूरी है।
राष्ट्र प्रेस
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